फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Amroha News ›   Amroha: Case will be registered against former Hasanpur Inspector and Consolidation Settlement Officer

अमरोहा: हसनपुर के पूर्व इंस्पेक्टर और चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी पर दर्ज होगा केस, सीजेएम ने दिए आदेश

Sun, 01 Oct 2023 12:19 PM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Sun, 01 Oct 2023 12:19 PM IST
सार

कोर्ट की अवमानना करने के आरोप में हसनपुर के पूर्व इंस्पेक्टर और चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी फंस गए हैं। कोर्ट ने इस पर दोनों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा विभागीय कार्रवाई करने के लिए अधिकारियों को पत्र लिखा है। 

विज्ञापन
Amroha: Case will be registered against former Hasanpur Inspector and Consolidation Settlement Officer
अदालत का फैसला - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोर्ट के कारण बताओ नोटिस का जवाब न देने पर बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी (एसओसी चकबंदी) और हसनपुर इंस्पेक्टर फंस गए हैं। कोर्ट ने दोनों के रवैये को आपत्तिजनक माना है और दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को स्पष्टीकरण के साथ तीन अक्तूबर और हसनपुर इंस्पेक्टर को चार अक्तूबर को कोर्ट में पेश होने आदेश दिए हैं।

विज्ञापन


दोनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा है। हसनपुर कोतवाली में वर्ष 2009 में अपहरण, षड्यंत्र और दुष्कर्म के आरोप में प्रवीन, सुंदर, सुरेश व बबीता के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चौधरी अमर प्रताप सिंह की अदालत ने चारों आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए थे। 
विज्ञापन


हसनपुर पुलिस ने वारंट तामील कर वापस न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया और न आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। मामले में एक सितंबर को न्यायालय ने हसनपुर इंस्पेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन इंस्पेक्टर ने न तो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया और न कारण बताओ नोटिस का जवाब दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


जिसे न्यायालय ने आपत्तिजनक और कर्तव्यों के प्रति लापरवाही माना। न्यायालय ने हसनपुर इंस्पेक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही इंस्पेक्टर को व्यक्तिगत रूप से स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए चार अक्तूबर को न्यायालय में पेश होने के आदेश दिए हैं।

ऐसा ही एक मामला बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी से जुड़ा है। अशरफ अली नाम के एक व्यक्ति ने धारा 156 (3) के तहत न्यायालय की शरण ली। लिहाजा न्यायालय ने बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों की प्रारंभिक जांच कराकर आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे, लेकिन बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने न्यायालय के आदेश पालन नहीं किया।

न्यायालय ने 16 सितंबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने कोर्ट के कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं दिया और न प्रार्थना पत्र के संबंध में प्रारंभिक जांच कराकर आख्या न्यायालय में प्रस्तुत की। न्यायालय ने एसओसी की लापरवाही को धारा 349 के अंतर्गत दंडनीय अपराध माना।


साथ ही बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। साथ ही बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को तीन अक्तूबर को स्पष्टीकरण के साथ उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसपी और बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के खिलाफ डीएम को लिखा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed