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Amroha News: सड़क चौड़ीकरण की तैयारी, तीन हजार से अधिक हरे पेड़ों पर चलेगी आरी
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गजरौला (अमरोहा)।
एक तरफ पेड़ों के कटान और वन संपदा उजड़ने के कारण बिगड़ रहे पर्यावरण को लेकर चिंतित वैज्ञानिक, शिक्षक, चिकित्सक, समाजसेवी और नागरिक भी अधिक से अधिक पौधे लगाकर हरियाली बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। जिससे पर्यावरण संतुलन बना रहे और लोगों को भरपूर ऑक्सीजन मिल सके। वहीं दूसरी ओर वन निगम जिले में तीन हजार पेड़ कटवाने की तैयारियां कर रहा है। अगले महीने से पेड़ों पर आरी चलने लगेगी। ऐसे में सवाल है कि जिले में हरियाली कैसे आएगी।
वन निगम को जिले की अमरोहा, हसनपुर और धनौरा रेंज में तीन हजार पेड़ काटने का काम मिला है। अगले महीने से पेड़ों का कटान शुरू हो जाएगा। धनौरा रेंज के गजरौला में गजरौला से सलेमपुर गौसाईं तक सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पांच सौ पेड़ काटे जाएंगे। काटने के लिए यूकेलिप्टिस, पापड़ी और अर्जुन के पेड़ों पर निशान लगा दिए गए हैं। खास बात यह है कि पापड़ी छायादार होता है, जबकि अर्जुन का पेड़ औषधीय होते हैं। जिनसे सैकड़ों तरह की दवाइवां बनाई जाती हैं। हसनपुर रेंज में भी हसनपुर से गजरौला तक कुछ पेड़ ऐसे है, जो स्टेट हाईवे के किनारे है, जो आंधी-तूफान के दौरान गिरने से मार्ग बाधित हो जाता है। ऐसे ही पांच सौ पेड़ों पर कटान के लिए निशान लगाए गए हैं। अमरोहा रेंज में हकीमपुर रेलवे स्टेशन से 31 किलोमीटर के दायरे में रेल लाइन के किनारे यूकेलिप्टिस, शीशम व पापड़ी के पेड़ों को काटा जाएगा। वन निगम के इकाई अधिकारी गोपाल कृष्ण सक्सेना का कहना कि फिलहाल तीन हजार पेड़ काटे जाएंगे। इसके बाद अन्य पेड़ों को कटवाया जाएगा। उन पर अंक छपवाने का काम चल रहा है।
- हरे भरे पेड़ प्रकृति का श्रंगार हैं। पर्यावरण प्रदूषण को रोकने व तरह-तरह की बीमारियों को कम करने के लिए पेड़ पौधे लगाने पर जोर दिया जा रहा है। जनपद में तीन हजार पेड़ों को काटे जाने की तैयारी प्रकृति के विरोध में है। इसके खिलाफ आवाज उठाई जाएगी। जरूरत पड़ी तो जिले के शिक्षकों को लेकर चिपको की तरह आंदोलन चलाया जाएगा। - डॉ.यतेंद्र कटारिया,
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सदस्य जिला पर्यावरण समिति एवं राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित
- अर्जुन का पेड़ औषधीय है। इसकी छाल उबाल कर पीने से हार्ट का खतरा नहीं रहता। इसलिए अर्जुन का पेड़ तो काटा ही नहीं जाना चाहिए। इसके अलावा जिन स्थानों पर पेड़ पौधे अधिक होते हैं, वहां पर तापमान कम होता है और ऑक्सीजन का स्तर अच्छा रहता है। पेड़ों के कटान का विरोध किया जाएगा। - संजीव कुमार पाल गजरौला,
पर्यावरण सचेतक समिति अध्यक्ष
- गजरौला से सलेमपुर गौसाईं तक सड़क बनाई जाएगी। इसलिए पेड़ काटे जाएंगे। अमरोहा में पांच सौ पेड़ रेलवे लाइन किनारे हैं। आंधी में पटरियों पर गिर जाते हैं। यातायात बाधित हो जाता है। हसनपुर में भी विकास कार्य के लिए पेड़ों को कटवाया जाएगा। -
गोपाल कृष्ण सक्सेना,
इकाई अधिकारी वन निगम अमरोहा।
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एक तरफ पेड़ों के कटान और वन संपदा उजड़ने के कारण बिगड़ रहे पर्यावरण को लेकर चिंतित वैज्ञानिक, शिक्षक, चिकित्सक, समाजसेवी और नागरिक भी अधिक से अधिक पौधे लगाकर हरियाली बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। जिससे पर्यावरण संतुलन बना रहे और लोगों को भरपूर ऑक्सीजन मिल सके। वहीं दूसरी ओर वन निगम जिले में तीन हजार पेड़ कटवाने की तैयारियां कर रहा है। अगले महीने से पेड़ों पर आरी चलने लगेगी। ऐसे में सवाल है कि जिले में हरियाली कैसे आएगी।
वन निगम को जिले की अमरोहा, हसनपुर और धनौरा रेंज में तीन हजार पेड़ काटने का काम मिला है। अगले महीने से पेड़ों का कटान शुरू हो जाएगा। धनौरा रेंज के गजरौला में गजरौला से सलेमपुर गौसाईं तक सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पांच सौ पेड़ काटे जाएंगे। काटने के लिए यूकेलिप्टिस, पापड़ी और अर्जुन के पेड़ों पर निशान लगा दिए गए हैं। खास बात यह है कि पापड़ी छायादार होता है, जबकि अर्जुन का पेड़ औषधीय होते हैं। जिनसे सैकड़ों तरह की दवाइवां बनाई जाती हैं। हसनपुर रेंज में भी हसनपुर से गजरौला तक कुछ पेड़ ऐसे है, जो स्टेट हाईवे के किनारे है, जो आंधी-तूफान के दौरान गिरने से मार्ग बाधित हो जाता है। ऐसे ही पांच सौ पेड़ों पर कटान के लिए निशान लगाए गए हैं। अमरोहा रेंज में हकीमपुर रेलवे स्टेशन से 31 किलोमीटर के दायरे में रेल लाइन के किनारे यूकेलिप्टिस, शीशम व पापड़ी के पेड़ों को काटा जाएगा। वन निगम के इकाई अधिकारी गोपाल कृष्ण सक्सेना का कहना कि फिलहाल तीन हजार पेड़ काटे जाएंगे। इसके बाद अन्य पेड़ों को कटवाया जाएगा। उन पर अंक छपवाने का काम चल रहा है।
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- हरे भरे पेड़ प्रकृति का श्रंगार हैं। पर्यावरण प्रदूषण को रोकने व तरह-तरह की बीमारियों को कम करने के लिए पेड़ पौधे लगाने पर जोर दिया जा रहा है। जनपद में तीन हजार पेड़ों को काटे जाने की तैयारी प्रकृति के विरोध में है। इसके खिलाफ आवाज उठाई जाएगी। जरूरत पड़ी तो जिले के शिक्षकों को लेकर चिपको की तरह आंदोलन चलाया जाएगा। - डॉ.यतेंद्र कटारिया,
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सदस्य जिला पर्यावरण समिति एवं राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित
- अर्जुन का पेड़ औषधीय है। इसकी छाल उबाल कर पीने से हार्ट का खतरा नहीं रहता। इसलिए अर्जुन का पेड़ तो काटा ही नहीं जाना चाहिए। इसके अलावा जिन स्थानों पर पेड़ पौधे अधिक होते हैं, वहां पर तापमान कम होता है और ऑक्सीजन का स्तर अच्छा रहता है। पेड़ों के कटान का विरोध किया जाएगा। - संजीव कुमार पाल गजरौला,
पर्यावरण सचेतक समिति अध्यक्ष
- गजरौला से सलेमपुर गौसाईं तक सड़क बनाई जाएगी। इसलिए पेड़ काटे जाएंगे। अमरोहा में पांच सौ पेड़ रेलवे लाइन किनारे हैं। आंधी में पटरियों पर गिर जाते हैं। यातायात बाधित हो जाता है। हसनपुर में भी विकास कार्य के लिए पेड़ों को कटवाया जाएगा। -
गोपाल कृष्ण सक्सेना,
इकाई अधिकारी वन निगम अमरोहा।