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दिमागी टेंशन और नशे से दूर रहकर बचाएं याददाश्त

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 21 Sep 2022 12:24 AM IST
सार

दिमागी टेंशन और नशे से दूर रहकर बचाएं याददाश्तअमरोहा।ध्यान और योग से इस बीमारी से निजात मिल सकती है।इसमें किसी कारण से मरीज के दिमाग की नसें दब जाती हैं जो दवाओं से भी रिवर्ट नहीं हो पाता है।

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Save memory by staying away from mental tension and intoxication

विस्तार

दिमागी टेंशन और नशे से दूर रहकर बचाएं याददाश्त
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अमरोहा। अगर आपको दिमागी टेंशन है और नशे के आदी हैं तो आपको अल्जाइमर्स डेमेंशिया हो सकती है। आपकी याददाश्त धीरे धीरे जा सकती है। 55 साल पार होने वाली इस बीमारी की जद में समय से पहले आ सकते हैं। ऐसे में अनुशासन भरा जीवन शैली अपना कर अपनी याददाश्त जाने से बचाइएं।
पिछले दस सालों में अल्जाइमर्स डेमेंशिया के मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। ये बीमारी अब कामन होती जा रही है। 60 साल पार कर चुके 15 से 20 फीसदी लोग इससे पीड़ित होते हैं। हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर्स दिवस मनाया जाता है। अल्जाइमर्स यानी कि भूलने की बीमारी। ध्यान और योग से इस बीमारी से निजात मिल सकती है। भूलना कई तरह से होता है- जैसे कहीं पर कुछ रखकर भूल जाना या कुछ देर पहले कही बात को भूल जाना आदि। पहले लोग इसे सामान्य समझकर ध्यान नहीं देते हैं। मगर, यह बीमारी एक उम्र के बाद ज्यादा होने लगती है। उसमें चीजों को याद रखना मुश्किल होता है। बुजुर्ग इस बीमारी के ज्यादा शिकार होते हैं। मगर, आज के समय में युवा भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। कुछ वर्षों से इस बीमारी के मरीजों की संख्या में खासी बढ़ोत्तरी देखी गई है।जनपद में अब तक अल्जाइमर्स बीमारी से ग्रसित 30 मरीज सामने आए हैं। इनमें सर्वाधिक शहरी क्षेत्र के लोग शामिल हैं।
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सीएमओ डॉ. राजीव सिंघल ने बताया कि भूलने की बीमारी दिमाग से जुड़ी होती है। मस्तिष्क की नसों को नुकसान पहुंचने के कारण व्यक्तियों में यह बीमारी होती है। इस बीमारी में व्यक्ति धीरे-धीरे अपनी याददाश्त खोने लगता है। अभी तक इस बीमारी का कोई सटीक इलाज नहीं मिल सका है। जीवनशैली में बदलाव करके कुछ हद तक इस बीमारी से बचा जा सकता है। बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर लोग ध्यान नहीं देते हैं, जिससे यह बढ़ती जाती है। आमतौर पर 55 साल की उम्र पार करने पर होती है। इसमें किसी कारण से मरीज के दिमाग की नसें दब जाती हैं जो दवाओं से भी रिवर्ट नहीं हो पाता है। इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है। इसके चलते धीरे-धीरे वह अपना याददाश्त खो जाता है।
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नशा करने वालों पर सीधा असर
अमरोहा। यंग एज में शुगर और ब्लडप्रेशर के मरीज बनने वाले लोगों में अल्जाइमर्स डेमेंसिया का खतरा अधिक होता है। ऐसे लोग इस बीमारी के जद में अधिक आते हैं। नशा करने वाले लोगों पर भी अधिक असर पड़ता है।

अल्जाइमर्स से बचने को ये करें उपाय
अगर किसी व्यक्ति में अल्जाइमर्स के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। व्यायाम करने के साथ ही उसे पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए। अधिक से अधिक लोगों से मिलना जुलना चाहिए, ताकि डिप्रेशन न हो। घर के लोगों को ज्यादा संपर्क में रहना चाहिए ताकि उनके चेहरे पहचानने में परेशानी न हो। डॉ. फाइक अली, फिजिशियन
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