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कभी थी वरदान, आज ढूंढ रही खुद के निशान
कृष्ण कुमार/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sat, 14 May 2016 01:14 AM IST
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नदी
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कोटद्वार की पहाड़ियों से प्रदेश के बिजनौर जिले में प्रवेश करते ही नदी की बदहाल तस्वीर नजर आने लगती है। बिजनौर में जहां इसमें फैक्ट्रियों का गंदा पानी बहाया जा रहा है तो अमरोहा में नदी सूख चुकी है। किसान नदी की तलहटी में फसलें उगा रहे हैं।
उत्तराखंड के कोटद्वार और उत्तर प्रदेश के बिजनौर, अमरोहा जिले से होते मुरादाबाद में गागन नदी में मिलती है। कभी नदी से इन जिलों के किसान फसलों की सिंचाई करते थे। इससे फसलों का अच्छा उत्पादन होता था और किसान इसे वरदान मानते थे। लेकिन, समय बीतने के साथ शुरू हुई नदी की बदहाली बदस्तूर जारी है। बिजनौर जिले की सीमा में प्रवेश करते ही बान नदी की बदहाली की दास्तां शुरू हो जाती है। स्योहारा और सहसपुर में फैक्ट्रियों का दूषित पानी नदी में छोड़ा जा रहा है।
इससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है। लेकिन, अमरोहा पहुंचते-पहुंचते नदी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करती नजर आती है। कहीं-कहीं तो नदी के निशान भी नहीं दिख रहे हैं। लेकिन, इसके बावजूद सड़कों पर बने पुलों पर अभी भी नदी का नाम दर्ज होने से निशान बाकी हैं। नदी के सूख जाने के कारण किसान उसकी तलहटी में फसलें उगा रहे हैं। कुछ स्थानों पर नालों और फैक्ट्रियों का गंदा पानी जरूर इसमें छोड़ा जा रहा है।
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बान क्या तुम अब भी प्रवाहित हो?
अमरोहा। शहर में जन्मे उर्दू के मशहूर शायर जॉन एलिया ने अस्सी के दशक में कराची में समुद्र किनारे एक तस्वीर खिंचवाई। इसके पीछे लिखा कि इस समुंदर पे आकर भी तश्नाकाम (प्यासा) हूं मैं। बान तुम अब भी बह रही हो क्या? जॉन के बचपन में बान खूब शान के साथ लहराती, बलखाती अमरोहा के नजदीक से बहती थी। मुल्क के बंटवारे में जॉन बान के किनारे की यादें समेटकर सरहद के उस पार पाकिस्तान चले गए।
इब्नेबतूता के किस्सों में मौजूद गागन नदी
अमरोहा। इब्नेबतूता ने अपने सफरनामे में एक खूबसूरत शहर होने का जिक्र किया है। किसी जमाने में अमरोहा शहर तालाब, नदी और पोखरों से घिरा था। लेकिन मौजूदा वक्त में पानी की किल्लत से जूझ रहा है। इब्नेबतूता ने अपने सफरनामे में अमरोहा से अगवानपुर के सफर का जिक्र किया है। वे लिखते हैं कि नदी का पानी चढ़ा हुआ है। उस नदी को पार करने में उन्हें खासी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। जिस गांगन नदी का जिक्र इब्ने बतूता ने किया है अब उस नदी का का पानी अब जहरीला हो चुका है।
बान नदी में जहां भी अवैध कब्जे हैं। अधिकारियों को भेजकर जांच कराई जाएगी। जमीन की पैमाइश कराकर नदी को अवैध कब्जा मुक्त कराया जाएगा। इसके बाद मनरेगा से प्लान बनाकर नदी को पुनर्जीवित किया जाएगा। -वेद प्रकाश, डीएम
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उत्तराखंड के कोटद्वार और उत्तर प्रदेश के बिजनौर, अमरोहा जिले से होते मुरादाबाद में गागन नदी में मिलती है। कभी नदी से इन जिलों के किसान फसलों की सिंचाई करते थे। इससे फसलों का अच्छा उत्पादन होता था और किसान इसे वरदान मानते थे। लेकिन, समय बीतने के साथ शुरू हुई नदी की बदहाली बदस्तूर जारी है। बिजनौर जिले की सीमा में प्रवेश करते ही बान नदी की बदहाली की दास्तां शुरू हो जाती है। स्योहारा और सहसपुर में फैक्ट्रियों का दूषित पानी नदी में छोड़ा जा रहा है।
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इससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है। लेकिन, अमरोहा पहुंचते-पहुंचते नदी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करती नजर आती है। कहीं-कहीं तो नदी के निशान भी नहीं दिख रहे हैं। लेकिन, इसके बावजूद सड़कों पर बने पुलों पर अभी भी नदी का नाम दर्ज होने से निशान बाकी हैं। नदी के सूख जाने के कारण किसान उसकी तलहटी में फसलें उगा रहे हैं। कुछ स्थानों पर नालों और फैक्ट्रियों का गंदा पानी जरूर इसमें छोड़ा जा रहा है।
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बान क्या तुम अब भी प्रवाहित हो?
अमरोहा। शहर में जन्मे उर्दू के मशहूर शायर जॉन एलिया ने अस्सी के दशक में कराची में समुद्र किनारे एक तस्वीर खिंचवाई। इसके पीछे लिखा कि इस समुंदर पे आकर भी तश्नाकाम (प्यासा) हूं मैं। बान तुम अब भी बह रही हो क्या? जॉन के बचपन में बान खूब शान के साथ लहराती, बलखाती अमरोहा के नजदीक से बहती थी। मुल्क के बंटवारे में जॉन बान के किनारे की यादें समेटकर सरहद के उस पार पाकिस्तान चले गए।
इब्नेबतूता के किस्सों में मौजूद गागन नदी
अमरोहा। इब्नेबतूता ने अपने सफरनामे में एक खूबसूरत शहर होने का जिक्र किया है। किसी जमाने में अमरोहा शहर तालाब, नदी और पोखरों से घिरा था। लेकिन मौजूदा वक्त में पानी की किल्लत से जूझ रहा है। इब्नेबतूता ने अपने सफरनामे में अमरोहा से अगवानपुर के सफर का जिक्र किया है। वे लिखते हैं कि नदी का पानी चढ़ा हुआ है। उस नदी को पार करने में उन्हें खासी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। जिस गांगन नदी का जिक्र इब्ने बतूता ने किया है अब उस नदी का का पानी अब जहरीला हो चुका है।
बान नदी में जहां भी अवैध कब्जे हैं। अधिकारियों को भेजकर जांच कराई जाएगी। जमीन की पैमाइश कराकर नदी को अवैध कब्जा मुक्त कराया जाएगा। इसके बाद मनरेगा से प्लान बनाकर नदी को पुनर्जीवित किया जाएगा। -वेद प्रकाश, डीएम