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सीएम से मिलकर हमलावरों पर कार्रवाई करने की बात कह रहे थे साधु शीशराम
सार
छह सितंबर को साधु शीशराम उर्फ सीताराम पर जानलेवा हमला किया गया था।करीब सत्रह दिन पूर्व साधु पर आश्रम में जानलेवा हमला किया गया था।बताते हैं कि उसके बाद से आरोपी लगातार साधु को धमकी दे रहे थे।
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विस्तार
छह सितंबर को साधु शीशराम उर्फ सीताराम पर जानलेवा हमला किया गया था। आरोप है कि हमलावरों ने 45 हजार रुपये लूट लिए थे। फिर भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई। हमलावरों पर सख्त कार्रवाई और पुलिस की लापरवाही की शिकायत सीएम से मिलकर करने को कह रहे थे, इसी बीच उनकी हत्या हो जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।
आदमपुर के गांव मरौरा में हुई साधु की हत्या के मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आ रही है। करीब सत्रह दिन पूर्व साधु पर आश्रम में जानलेवा हमला किया गया था। उनके सिर में चोट भी आई थी। गांव के ही आरोपियों पर जानलेवा हमला करने व पैंतालीस हजार लूटने का आरोप भी लगाया था। लेकिन मामले में पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की थी, बल्कि आरोपियों का शांतिभंग में चालान कर दिया था। यदि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती तो शायद ये घटना ना होती।
बताते हैं कि मरौरा निवासी साधु सीताराम ने अपने आश्रम पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया था। उसका समापन छह सितंबर को हुआ था। इसी बीच गांव के ही कुछ दबंग किस्म के लोगों ने आश्रम पर पहुंचकर साधु के साथ मारपीट कर उन्हें घायल कर दिया था। साधु ने घटना के बाद आदमपुर थाने की दढ़ियाल पुलिस चौकी और थाने में पहुंचकर मामले की तहरीर दी थी। जिसमें उन्होंने गांव के ही तीन लोगों पर जानलेवा हमला करने व पैंतालीस हजार रुपये लूटने का आरोप भी लगाया था लेकिन पुलिस ने मामले में तहरीर के आधार पर कार्रवाई ना करते हुए केवल आरोपियों का शांतिभंग में चालान किया था। बताते हैं कि उसके बाद से आरोपी लगातार साधु को धमकी दे रहे थे। इसके बाद साधु ने मामले में पुलिस पर दूसरे पक्ष से मिलीभगत का आरोप लगाया था। जिसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसमें साधु ने कहा था कि यदि यहां मेरी सुनवाई नहीं होती है तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर न्याय की गुहार लगाऊंगा। साधु की हत्या के बाद से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल तो खड़े हुए ही हैं। इसके साथ ही साधु की मुख्यमंत्री से मिलकर शिकायत करने की उम्मीद भी खत्म हो गई।
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पति की मौत के बाद साधु सीताराम को अपना लिया था मुनिया ने
रहरा। साधु सीताराम की पत्नी मुनिया ने दो शादी कीं थी। पहली शादी साधु के बड़े भाई राधे से हुई थी लेकिन राधे की बीस वर्ष पूर्व मौत हो गई थी। उससे दो बेटी व एक बेटा है। इसके बाद मुनिया ने पति के छोटे भाई साधु सीताराम से शादी की थी। जिससे दो संतान पैदा हुई। एक बेटी व एक बेटा। सभी बच्चे शादीशुदा हैं। मुनिया के पहले पति से हुआ बेटा रविंद्र नोएडा में रहकर मजदूरी करता है। जबकि साधु से उत्पन्न बेटा कृष्णा बरौला गांव में रहता है। दो माह पूर्व रविंद्र नोएडा से घर आया था लेकिन नोएडा नहीं गया। यहीं पर खेतीबाड़ी का कार्य कर रहा है।
पंद्रह साल पहले साधु का हादसे में कट गया था बांया हाथ
रहरा। गांव मरौरा निवासी साधु सीताराम की गला काटकर हत्या कर दी गई। साधु का बांया हाथ नहीं था। पंद्रह वर्ष पूर्व एक हादसे में उनका हाथ कंधे से कट गया था। बताते हैं कि पंद्रह वर्ष पूर्व वह बुलंदशहर में एक क्रेशर पर मजदूरी कर रहे थे। वहां उनका हाथ मशीन में आने से कट गया था।
तंत्र क्रिया भी करते थे साधु
गांव मरौरा निवासी साधु तंत्र क्रिया भी किया करते थे। ग्रामीणों के मुताबिक उनसे लोग झाड़ फूंक कराने भी आते रहते थे। लेकिन तंत्र क्रिया को लेकर कभी कोई विवाद की स्थिति ग्रामीणों के सामने नहीं आई।
आश्रम पर बुधवार शाम व बृहस्पतिवार सुबह को नहीं हुई आरती
गांव मरौरा में साधु सीताराम की हत्या कर दी गई। उनका शव बृहस्पतिवार की शाम को आश्रम में ही चारपाई पर मिला। ग्रामीणों का कहना है कि आश्रम पर रोजना सुबह शाम पूजा होती थी। लाउडस्पीकर पर आरती हुआ करती थी। लेकिन बुधवार शाम को भी लाउडस्पीकर नहीं चला और बृहस्पतिवार की सुबह को भी लाउडस्पीकर से आरती होने की आवाज गांव तक नहीं पहुंच पाई।
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आदमपुर के गांव मरौरा में हुई साधु की हत्या के मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आ रही है। करीब सत्रह दिन पूर्व साधु पर आश्रम में जानलेवा हमला किया गया था। उनके सिर में चोट भी आई थी। गांव के ही आरोपियों पर जानलेवा हमला करने व पैंतालीस हजार लूटने का आरोप भी लगाया था। लेकिन मामले में पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की थी, बल्कि आरोपियों का शांतिभंग में चालान कर दिया था। यदि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती तो शायद ये घटना ना होती।
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बताते हैं कि मरौरा निवासी साधु सीताराम ने अपने आश्रम पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया था। उसका समापन छह सितंबर को हुआ था। इसी बीच गांव के ही कुछ दबंग किस्म के लोगों ने आश्रम पर पहुंचकर साधु के साथ मारपीट कर उन्हें घायल कर दिया था। साधु ने घटना के बाद आदमपुर थाने की दढ़ियाल पुलिस चौकी और थाने में पहुंचकर मामले की तहरीर दी थी। जिसमें उन्होंने गांव के ही तीन लोगों पर जानलेवा हमला करने व पैंतालीस हजार रुपये लूटने का आरोप भी लगाया था लेकिन पुलिस ने मामले में तहरीर के आधार पर कार्रवाई ना करते हुए केवल आरोपियों का शांतिभंग में चालान किया था। बताते हैं कि उसके बाद से आरोपी लगातार साधु को धमकी दे रहे थे। इसके बाद साधु ने मामले में पुलिस पर दूसरे पक्ष से मिलीभगत का आरोप लगाया था। जिसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसमें साधु ने कहा था कि यदि यहां मेरी सुनवाई नहीं होती है तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर न्याय की गुहार लगाऊंगा। साधु की हत्या के बाद से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल तो खड़े हुए ही हैं। इसके साथ ही साधु की मुख्यमंत्री से मिलकर शिकायत करने की उम्मीद भी खत्म हो गई।
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पति की मौत के बाद साधु सीताराम को अपना लिया था मुनिया ने
रहरा। साधु सीताराम की पत्नी मुनिया ने दो शादी कीं थी। पहली शादी साधु के बड़े भाई राधे से हुई थी लेकिन राधे की बीस वर्ष पूर्व मौत हो गई थी। उससे दो बेटी व एक बेटा है। इसके बाद मुनिया ने पति के छोटे भाई साधु सीताराम से शादी की थी। जिससे दो संतान पैदा हुई। एक बेटी व एक बेटा। सभी बच्चे शादीशुदा हैं। मुनिया के पहले पति से हुआ बेटा रविंद्र नोएडा में रहकर मजदूरी करता है। जबकि साधु से उत्पन्न बेटा कृष्णा बरौला गांव में रहता है। दो माह पूर्व रविंद्र नोएडा से घर आया था लेकिन नोएडा नहीं गया। यहीं पर खेतीबाड़ी का कार्य कर रहा है।
पंद्रह साल पहले साधु का हादसे में कट गया था बांया हाथ
रहरा। गांव मरौरा निवासी साधु सीताराम की गला काटकर हत्या कर दी गई। साधु का बांया हाथ नहीं था। पंद्रह वर्ष पूर्व एक हादसे में उनका हाथ कंधे से कट गया था। बताते हैं कि पंद्रह वर्ष पूर्व वह बुलंदशहर में एक क्रेशर पर मजदूरी कर रहे थे। वहां उनका हाथ मशीन में आने से कट गया था।
तंत्र क्रिया भी करते थे साधु
गांव मरौरा निवासी साधु तंत्र क्रिया भी किया करते थे। ग्रामीणों के मुताबिक उनसे लोग झाड़ फूंक कराने भी आते रहते थे। लेकिन तंत्र क्रिया को लेकर कभी कोई विवाद की स्थिति ग्रामीणों के सामने नहीं आई।
आश्रम पर बुधवार शाम व बृहस्पतिवार सुबह को नहीं हुई आरती
गांव मरौरा में साधु सीताराम की हत्या कर दी गई। उनका शव बृहस्पतिवार की शाम को आश्रम में ही चारपाई पर मिला। ग्रामीणों का कहना है कि आश्रम पर रोजना सुबह शाम पूजा होती थी। लाउडस्पीकर पर आरती हुआ करती थी। लेकिन बुधवार शाम को भी लाउडस्पीकर नहीं चला और बृहस्पतिवार की सुबह को भी लाउडस्पीकर से आरती होने की आवाज गांव तक नहीं पहुंच पाई।