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शबनम के बेटे को उम्मीद मां की फांसी होगी माफ
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अमरोहा। बेमेल इश्क की खातिर अपनों के सात कत्लों की खूनी दास्तां लिखने वाली खलनायिका शबनम के बेटे को मां की फांसी से माफी की उम्मीद है। वह परवरिश करने वाले परिजनों से कहता है कि बड़े बच्चों की बात मान लेते हैं। ये ही वजह है कि उसने रामपुर कारागार में बंद मां को राष्ट्रपति से माफ करने की भावुक अपील की थी। इतना ही नहीं खलनायिका शबनम की दया याचिकाओं में बेटा ही फांसी के बचाव की एकमात्र ढाल है।
23 फरवरी को अमरोहा जिला जज की अदालत से शबनम का डेथ वारंट जारी होना था। लेकिन, इसी बीच शबनम के वकील ने राज्यपाल को दोबारा विचरण दया याचिका दायर कर दी है जबकि 17 फरवरी को शबनम का बेटा उससे मिलने रामपुर कारागार गया था। वहां से लौटने के बाद उसने राष्ट्रपति से मां शबनम को माफ करने की भावुक अपील की थी। अब प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही परिवार के सात लोगों की हत्या करने वाली शबनम ने दया की उम्मीद में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के पास याचिका भेजी है जिसमें बेटे की परवरिश, हरियाणा का सोनिया कांड, और आजाद भारत में अब तक किसी भी महिला को फांसी नहीं दिए जाने को बिंदू बनाया है। शबनम का बेटा नाबालिग है और मां से मिलने जेल जाता रहता है। हर कोई इस मामले में राज्यपाल के निर्णय का इंतजार कर रहा है।
इस जघन्य घटना को अंजाम देने वाली शबनम के पास फिलहाल एकमात्र उम्मीद बची है कि शायद उसे राहत मिल जाए। अगर राज्यपाल उसकी दया याचिका को खारिज करती हैं तो शबनम फांसी की सजा पाने वाली आजाद भारत की पहली महिला होगी। इस दया याचिका पर निर्णय आने के बाद ही अमरोहा जिला जज की अदालत से डेथ वारंट पर अग्रिम सुनवाई होगी। याचिका पर सुनवाई के बाद ही तय होगा कि शबनम का डेथ वारंट जारी होगा या उसे फांसी से राहत मिलेगी। वहीं शबनम के बेटे की परवरिश करने वाले उस्मान ने बताया कि बेटे को मां की फांसी माफ होने की उम्मीद है। वह अक्सर कहता है कि बच्चों की बात बड़े मान लेते हैं। इसीलिए उसने राष्ट्रपति से मां शबनम को माफ करने की अपील की है। लेकिन इस मामले में दूसरे पक्ष भी अपनी ओर से पैरवी कर रहे हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि बेटे का पक्ष मजबूत है। लेकिन कानून भावनाओं से ज्यादा साक्ष्यों और कृत्यों के आधार पर निर्णय लेता है। राज्यपाल इस पर जो निर्णय लेंगी वो कानून सम्मत होगा।
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23 फरवरी को अमरोहा जिला जज की अदालत से शबनम का डेथ वारंट जारी होना था। लेकिन, इसी बीच शबनम के वकील ने राज्यपाल को दोबारा विचरण दया याचिका दायर कर दी है जबकि 17 फरवरी को शबनम का बेटा उससे मिलने रामपुर कारागार गया था। वहां से लौटने के बाद उसने राष्ट्रपति से मां शबनम को माफ करने की भावुक अपील की थी। अब प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही परिवार के सात लोगों की हत्या करने वाली शबनम ने दया की उम्मीद में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के पास याचिका भेजी है जिसमें बेटे की परवरिश, हरियाणा का सोनिया कांड, और आजाद भारत में अब तक किसी भी महिला को फांसी नहीं दिए जाने को बिंदू बनाया है। शबनम का बेटा नाबालिग है और मां से मिलने जेल जाता रहता है। हर कोई इस मामले में राज्यपाल के निर्णय का इंतजार कर रहा है।
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इस जघन्य घटना को अंजाम देने वाली शबनम के पास फिलहाल एकमात्र उम्मीद बची है कि शायद उसे राहत मिल जाए। अगर राज्यपाल उसकी दया याचिका को खारिज करती हैं तो शबनम फांसी की सजा पाने वाली आजाद भारत की पहली महिला होगी। इस दया याचिका पर निर्णय आने के बाद ही अमरोहा जिला जज की अदालत से डेथ वारंट पर अग्रिम सुनवाई होगी। याचिका पर सुनवाई के बाद ही तय होगा कि शबनम का डेथ वारंट जारी होगा या उसे फांसी से राहत मिलेगी। वहीं शबनम के बेटे की परवरिश करने वाले उस्मान ने बताया कि बेटे को मां की फांसी माफ होने की उम्मीद है। वह अक्सर कहता है कि बच्चों की बात बड़े मान लेते हैं। इसीलिए उसने राष्ट्रपति से मां शबनम को माफ करने की अपील की है। लेकिन इस मामले में दूसरे पक्ष भी अपनी ओर से पैरवी कर रहे हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि बेटे का पक्ष मजबूत है। लेकिन कानून भावनाओं से ज्यादा साक्ष्यों और कृत्यों के आधार पर निर्णय लेता है। राज्यपाल इस पर जो निर्णय लेंगी वो कानून सम्मत होगा।
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