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UP: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने बच्चों से किया संवाद, बोले- भारत चार कदम चला तो दुनिया ने माना बड़ी शक्ति

Tue, 30 Jul 2024 11:00 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरोहा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरोहा Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 30 Jul 2024 11:00 PM IST
सार

 मद् दयानंद कन्या गुरुकुल चोटी महाविद्यालय में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत छात्राओं से खासे प्रभावित हुए। उन्होंने करीब आधा घंटे से अधिक समय तक उनसे सीधा संवाद किया।

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RSS chief Mohan Bhagwat interacted with children said When India took four steps forward world accepted it as
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्री मद् दयानंद कन्या गुरुकुल चोटी महाविद्यालय में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत छात्राओं से खासे प्रभावित हुए। उन्होंने करीब आधा घंटे से अधिक समय तक उनसे सीधा संवाद किया। यही नहीं छात्राओं ने संघ व उनसे जुड़े सवालों को रखा तो उन्होंने शिक्षक की भांति उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया। पांच छात्राओं के सवालों को उन्होंने हर बिंदुओं पर विस्तार के साथ समझाया।

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सवाल- अपने प्रभाव पूर्ण व्यक्तित्व के कारण आप आरएसएस के सर संघचालक होने के साथ देश के प्रधानमंत्री व अन्य वरिष्ठ पदों को भी प्राप्त कर सकते थे। लेकिन आपने ऐसा क्यों नहीं किया। - हिमानी
जवाब- मेरे जैसे जो कार्यकर्ता यहां बैठे हैं, सब ऐसे ही हैं। कुछ होने के लिए हम यहां नही हैं। देश के लिए काम करना है। तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहे ना रहें। किसी भी स्वयंसेवक को आप व्यक्तिगत पूछो, वह शाखा चलाने की इच्छा जताएगा। संघ का आदेश सर्वोपरि है।

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सवाल- महाभारत के समय अर्जुन के बलशाली होने पर भी गीता के उपदेश के लिए श्री कृष्ण की आवश्यकता पड़ी थी। लेकिन आज इस सब के अभाव में क्या गीता सबको उपदेश देने में सफल हो पाएगी। - आयुषी
जवाब - अभाव नहीं हैं। श्रीकृष्ण तो सत्य है ना। जो सत्य है, उसका अभाव नहीं होता। जो असत्य है उसका कहीं भाव नही होता। वह विभिन्न रूपों में आते हैं। भारत में योगेश्वरों की कमी कभी नही रही। ना पहले रही, ना अब है। लेकिन धनुर्धर पार्थ चाहिए। ऐसे लोग चाहिए जो कर्तव्य के लिए धनुष उठाने को तैयार रहें। आज भारत वर्ष आगे बढ़ रहा है। सनातन संस्कृति आगे बढ़ रही है। भारत चार कदम चला तो दुनिया को लग रहा है कि भारत बड़ी शक्ति बन रहा है। गीता एक जीवन है।

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सवाल- हम आपके जीवन के उन संघर्षों को जानना चाहते हैं जिन्हें पार करके आप एक सफल व्यक्ति बने हैं। - श्रेष्ठा 
जवाब - मेरे बारे में जानने की ज्यादा जिज्ञासा है, सभी को। मेरे बारे में जो सुना, ऐसा मैं अकेला नहीं हूं, संघ के सभी कार्यकर्ता ऐसे ही होते हैं। जीवन में संघर्ष क्या होता है। हम जाे वास्तविक हैं, उस पर बुद्धि मन व शरीर का आवरण करें। अंहकार को हावी न होने दें। हालांकि मनुष्य को भौतिक जीवन जीने के लिए थोड़ा अहंकार भी जरूरी। एक दूसरे के सहायक भी बनें।

सवाल- संघ के विस्तार में महिलाओं की कितनी भूमिका है, क्या आरएसएस में नारी उत्थान के लिए भी कार्य किए जाते हैं। - दिव्यांशी
जवाब- सीधे तौर पर संघ में भूमिका नहीं दिखती है। लेकिन पर्दे के पीछे से बड़ी भूमिका है। संघ में करीब 4 हजार स्वयंसेवक अविवाहित हैं जबकि चार लाख से अधिक स्वयंसेवक गृहस्थी में रहकर संघ के लिए काम करते हैं। उनके घर की माताएं-बहने काम करने देती हैं, इसलिए वह काम कर पाते हैं। मातृ शक्ति के लिए राष्ट्र सेविका समिति नाम का संगठन की करीब नौ हजार शाखाएं समाज के लिए काम कर रही है। संघ महिलाओं को उन्नत नही, बल्कि सक्षम बनाता है।

सवाल- आपके नाम के दोनों शब्द ईश्वर का स्मरण कराते हैं। आप के इस नाम को रखने के पीछे क्या रहस्य है। - निशा
जवाब - यह तो मुझे नहीं पता। मेरा नाम भी परिजनों द्वारा दिया गया है। जिसको ढो रहा हूं (हंसते हुए)। एक बार संघ के एक स्वयं सेवक किसी घर में गए। वहां उन्होंने बच्चे का नाम पूछा, बताया सज्जन वो बोले कि तुम ऐसे हो इसलिए तुम्हारा नाम ऐसा रखा है या बनो इसलिए रखा है। उसके पिता जी बोले- मैंने मेरे लड़के का नाम विवेक रखा है, वो ऐसा है इसलिए नहीं रखा वैसा बने इसलिए रखा है। इसीलिए मेरा नाम ऐसा क्यों रखा, मुझे भी नहीं पता। भागवत उपनाम बुजुर्गों ने दिया। भक्ति का प्रचार करने वाले भागवत कहलाते हैं। हमारे कुल में भी ऐसे रहे होंगे। मैं तो देशभक्ति का प्रचार करता हूं। मैं देश व देव में अंतर नहीं मानता।

सवाल - हमें देश व धर्म में किसे सबसे ऊपर स्थान देना चाहिए। क्या धर्म उन्नति व देश उन्नति अलग-अलग वस्तुएं हैं। - रिया
जबाव- नहीं, यह सब एक ही है। सनातन अर्थात जो दुनिया के समय से चलता आया है, वह सनातन धर्म है। संपूर्ण सृष्टि की विविधता ही धर्म है। सत्यार्थ का प्रकाश हमारे दिल में हो। धर्म की रक्षा करते हुए देश हित के लिए काम करें।

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