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बदला-बदला सा रमजान शुगर वाले रोजेदारों का लेगा इम्तिहान

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 25 Apr 2020 12:51 AM IST
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अमरोहा। इस बार मुकद्दस रमजान बदला-बदला सा होगा। लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंस का पालन भी करना होगा। ऐसे में मस्जिदों से अजान होंगी, घरों में रमजान होंगे। न तो मस्जिदों में जमात के साथ आप तरावीह पढ़ सकेंगे और न ही नमाज। क्योंकि मस्जिदों में नमाजियों की संख्या तय हैं। घर में रहकर रोजों के 879 मिनट से लेकर 927 मिनट लम्हे को गुजारना होगा। इफ्तार करने के बाद सड़कों पर टहलना फिरना भी नहीं होगा। पहली बार ऐसे बदला रमजान शुगर वाले रोजेदारों का इम्तिहान लेगा। उन्हें अपने खाने से लेकर दवाओं तक का खास ध्यान देना होगा। रोजा रखने वाले शुगर के मरीजों को अपनी दवा की डोज और टाइमिंग का मैनेजमेंट दुरुस्त करने से रमजान में सहूलियत होगी। वह बदले डोज के साथ रोजा रख सकते हैं। वरना खाली पेट रहने पर शुगर लो होने का खतरा हो सकता है।
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खाली पेट रहने पर शुगर लो होने का खतरा
अमरोहा। एमडी मेडिसिन डा. जावेद अख्तर का कहना है कि डायबिटीज मरीज, जो रमजान में रोजा रखना चाहते हैं, उन्हें दवाओं के बदले डोज और टाइमिंग से दवा लेनी चाहिए। रमजान में रोजेदारों को खाने की टाइमिंग के मुताबिक दवा और इंसुलिन की डोज होना चाहिए। शुगर वाले रोजेदारों को अपनी दवाएं भी बदलवानी चाहिए। क्योंकि खाली पेट रहने से शुगर लो होने का खतरा अधिक रहता है।
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डाक्टरों की सलाह
इफ्तार के समय दवा की मात्रा अधिक लें।
सेहरी से तीन घंटे पहले लें दवा।
खाने के वक्त के मुताबिक इंसुलिन की टाइमिंग और डोज तय करें।
चिकनाई वाली चीजों से परहेज करें।
इफ्तार के वक्त डाइट ओवर इटिंग न हो दें, थोड़ा-थोड़ा खाएं।
अनावश्यक धूप में जाने से बचें।
बीपी के मरीज भी बरतें सावधानी
अमरोहा। डाक्टरों के मुताबिक रमजान में शुगर की तरह बीपी के मरीजों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। बीपी वाले मरीज रोजा रखते हैं तो वह बीपी पर नजर रखें। मानीटरिंग के साथ बीपी चेक कराते रहे। डाक्टर की सलाह पर दवाओं का डोज और टाइमिंग एडजेस्ट करा लें। क्योंकि गर्मी अधिक होने से खूब पसीना होता है, इससे रोजेदार केश शरीर से नमक की कमी आ जाती है। बीपी लो होने की अधिक चांस होते हैं।
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शुगर वाले रोजेदार के लिए सहरी जरूरी
अमरोहा। डाक्टरों के मुताबिक शुगर वाले रोजदारों के लिए सहरी बहुत जरूरी है। सेहरी में मल्टीग्रेन, ओट्स, दलिया, फल, ग्रीन सलाद का इस्तेमाल अधिक करे। रोजे के दौरान खानपान में लापरवाही से मधुमेह रोगियों को कमजोरी के साथ दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर रखने के लिए शरीर को मजबूत रखना बहुत जरूरी है। रोजेदारों को स्वास्थ्य का ख्याल रखना के लिए नियमित डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
दिन में पांच बार जांच जरूरी
अमरोहा। रोजेदार को शुगर की शिकायत है तो उसे दिन में औसतन पांच बार शुगर की जांच करनी चाहिए। सबसे पहले सेहरी करने से पहले, सेहरी के दो घंटे बाद, दोपहर में, इफ्तार से दो घंटे पहले और इफ्तार के बाद शुगर लेवल की जांच करनी चाहिए। अगर शुगर का लेवल 70 ग्राम से कम हो गई हो तो रोजा तुरंत छोड़ देना चाहिए। क्योंकि ऐसी स्थिति में जान जोखिम में पड़ सकती है।
खजूर अधिक फायदेमंद, शरीर को मिलती है ऊर्जा
अमरोहा। रोजे के बाद दावतों का दौर चलता है। ऐसे में मधुमेह के साथ अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को तले भुने खाने से परहेज करना चाहिए। तले भूने भोजन से पेट में गैस और दर्द की शिकायत हो सकती है। तेल युक्त पदार्थ सेहत को अधिक नुकसान करता है। ऐसे में रोजेदारों को उबला चना, फल, सब्जियों का सलाद, बादाम और अखरोट का सेवन कर सकते हैं। खजूर अधिक फायदेमंद होता है। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है।

रोजा रखने से पहले डाक्टर से लें सलाह
अमरोहा। स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. बी मुजक्करा के मुताबिक अगर कोई महिला गर्भवती है और रोजा रखना चाहती है तो उसे अपनी सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए। रोजे में दिनभर बिना पानी रहना पड़ता है। ऐसे में जब आहार लेने का समय होता है तो पानी का सेवन अधिक करें। शरीर में पानी की मात्रा कम होने से सोडियम पोटेशियम, मैगनीशियम, फास्फेट की मात्रा कम होने लगती है। इस वजह से मांसपेशियों में अकड़न, रक्तदाब कम होने की परेशानी हो सकती है। थारायड हार्मोन का स्तर भी गिर सकता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को रोजा रखने से पहले एक बार डाक्टरी सलाह जरूरी है।
डाक्टरों की सलाह
रोजे में मट्ठा, रेशे युक्त फल और जूस का सेवन करें।
हरी सब्जियों की सलाद सेहत के लिए बेहतर।
दलिया दूध और पौष्टिक आहार का सेवन अधिक हों।
किसी तरह की समस्या होने पर उसे नजरअंदाज न करें।
गर्भवतियों में परेशानी के लक्षण
अचानक तेजी से पसीना आना
दिन की धड़कन तेज होना
घबराहट और बेचैनी होना
चक्कर आना
अचानक बेहोशी आ जाना
भूख न लगना और जी घबराना
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