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दुश्वारियां झेल भाइयों के घर पहुंची बहनें, बांधी स्नेह की डोर
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अमरोहा। भाई-बहन के पवित्र प्रेम के प्रतीक त्योहार रक्षाबंधन पर बस और ट्रेनों में जबरदस्त भीड़ देखी गई। बहनों को भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। रोडवेज बसों में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। बैठने को लेकर धक्का-मुक्की का माहौल रहा। डिपो में बस पहुंचते ही उसमें चढ़ने को लेकर आपाधापी मची रही। बसों को लेकर बहनें इधर-उधर भटकती रहीं। त्योहार पर उमड़ी भीड़ के चलते रोडवेज की व्यवस्था बौनी साबित हुई। बहनों को बसों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा। दुश्वारियां के बीच बहने भाइयों के घर पहुंचीं और स्नेह की डोर बांधी।
परिवहन निगम ने रक्षाबंधन पर बहनों को बसों की बेहतर सेवा मुहैया कराने का दावा किया था। डिपो पर 76 बसें हैं। इसमें 22 बसें खराब पड़ी हैं। लिहाजा जिम्मेदारों ने 55 बसें संचालित कर बहनों को परेशानियों नहीं होने देने का दावा किया था। लेकिन त्योहार पर उमड़ी भीड़ के आगे रोडवेज की बस सेवा बौनी साबित हुए है। सुबह से ही बहनें बसों के अभाव में इधर-उधर भटकती देखी गई। डिपो में बसों के इंतजार में काफी देर बैठना पड़ा। रोडवेज की व्यवस्था नाकाफी साबित हुई है। भीड़ के आगे बसों की संख्या कम पड़ गई। जिसके चलते बहनों को बसों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा। पूरे दिन बसों को लेकर मारामारी रही। अमरोहा डिपो से लेकर जोया तिराहे पर भीड़ देखी गई। डिपो पर बस पहुंचते ही उसमें चढ़ने के लिए आपाधापी का माहौल रहा धक्का मुक्की होती रही। बहनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बस के अंदर सीट को लेकर भी मारामारी की स्थिति बनी रही। भीड़ का आलम यह था कि जल्द पहुंचने के चक्कर में बहनों ने खिड़की के सहारे बच्चों के बस के अंदर किया। इस दौरान रोडवेज की अव्यवस्था के कारण कोविड-19 के प्रोटोकाल की जमकर धज्जियां उड़ीं।
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परिवहन निगम ने रक्षाबंधन पर बहनों को बसों की बेहतर सेवा मुहैया कराने का दावा किया था। डिपो पर 76 बसें हैं। इसमें 22 बसें खराब पड़ी हैं। लिहाजा जिम्मेदारों ने 55 बसें संचालित कर बहनों को परेशानियों नहीं होने देने का दावा किया था। लेकिन त्योहार पर उमड़ी भीड़ के आगे रोडवेज की बस सेवा बौनी साबित हुए है। सुबह से ही बहनें बसों के अभाव में इधर-उधर भटकती देखी गई। डिपो में बसों के इंतजार में काफी देर बैठना पड़ा। रोडवेज की व्यवस्था नाकाफी साबित हुई है। भीड़ के आगे बसों की संख्या कम पड़ गई। जिसके चलते बहनों को बसों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा। पूरे दिन बसों को लेकर मारामारी रही। अमरोहा डिपो से लेकर जोया तिराहे पर भीड़ देखी गई। डिपो पर बस पहुंचते ही उसमें चढ़ने के लिए आपाधापी का माहौल रहा धक्का मुक्की होती रही। बहनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बस के अंदर सीट को लेकर भी मारामारी की स्थिति बनी रही। भीड़ का आलम यह था कि जल्द पहुंचने के चक्कर में बहनों ने खिड़की के सहारे बच्चों के बस के अंदर किया। इस दौरान रोडवेज की अव्यवस्था के कारण कोविड-19 के प्रोटोकाल की जमकर धज्जियां उड़ीं।
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