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Amroha News: ऑनलाइन एविएटर प्लेन गेम खेलकर रेलवे ठेकेदार ने गंवाए 90 लाख रुपये
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अमरोहा। ऑनलाइन एविएटर प्लेन गेम खेलकर रकम कमाने का लालच रेलवे के एक ठेकेदार पर इतना भारी पड़ा कि उसने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी गंवा दी। गजरौला क्षेत्र के रहने वाले रेलवे विभाग के ठेकेदार ने करीब डेढ़ वर्ष में ऑनलाइन एविएटर गेम खेलते हुए 90 लाख रुपये गंवा दिए। रकम जुटाने के लिए उसे अपनी चार बीघा पैतृक जमीन और दो दुकानें तक गिरवी रखनी पड़ीं। अब आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से जूझ रहे ठेकेदार ने एसपी कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है।
गजरौला थाना क्षेत्र के गांव मोहरा पट्टी निवासी कामिल अली ने बताया कि उनके पिता अश्क अली रेलवे विभाग में ट्रैकमैन थे। करीब आठ वर्ष पहले पिता के निधन के बाद उन्होंने रेलवे विभाग में ठेकेदारी शुरू की। करीब डेढ़ वर्ष पहले वह चंडीगढ़ में रेलवे की एक साइट पर कार्य कर रहे थे। इसी दौरान मजदूरों में शामिल एक युवक ने उनके मोबाइल में एक ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर आईडी बनाकर एविएटर गेम लॉगिन करा दिया। कामिल अली के अनुसार शुरुआत में उन्होंने केवल दो हजार रुपये लगाए थे। रकम हारने के बाद उन्होंने नुकसान की भरपाई के लिए बार-बार पैसे लगाने शुरू कर दिए। लेकिन हर बार हार ही हाथ लगी। आरोप है कि गेम संचालित करने वालों ने उनकी करीब 13 लाख रुपये वाली एक आईडी भी ब्लॉक कर दी, जिसके बाद नई आईडी बनाकर फिर गेम खिलाया गया। हारी हुई रकम वापस जीतने की उम्मीद में उन्होंने गूगल पे के माध्यम से 20 से अधिक लोगों के खातों में 500 से ज्यादा ट्रांजैक्शन किए।
इस दौरान गेम संचालित करने वाले लोग लगातार व्हाट्सएप के जरिए उनके संपर्क में रहे। कामिल के पास चैट और लेन-देन के रिकॉर्ड भी मौजूद हैं। कामिल अली ने बताया कि रुपये की व्यवस्था करने के लिए उन्हें अपनी चार बीघा पैतृक जमीन और दो दुकानें गिरवी रखनी पड़ीं। अब वह भारी कर्ज और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। उनका कहना है कि इस घटना के बाद कई बार आत्महत्या जैसे विचार भी मन में आए, लेकिन परिवार को देखते हुए उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बृहस्पतिवार को एसपी कार्यालय पहुंचकर कामिल अली ने पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि ऑनलाइन गेम में पैसे लगाने के लालच से बचें, क्योंकि यह कुछ ही समय में पूरी जिंदगी की कमाई खत्म कर सकता है।
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गजरौला थाना क्षेत्र के गांव मोहरा पट्टी निवासी कामिल अली ने बताया कि उनके पिता अश्क अली रेलवे विभाग में ट्रैकमैन थे। करीब आठ वर्ष पहले पिता के निधन के बाद उन्होंने रेलवे विभाग में ठेकेदारी शुरू की। करीब डेढ़ वर्ष पहले वह चंडीगढ़ में रेलवे की एक साइट पर कार्य कर रहे थे। इसी दौरान मजदूरों में शामिल एक युवक ने उनके मोबाइल में एक ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर आईडी बनाकर एविएटर गेम लॉगिन करा दिया। कामिल अली के अनुसार शुरुआत में उन्होंने केवल दो हजार रुपये लगाए थे। रकम हारने के बाद उन्होंने नुकसान की भरपाई के लिए बार-बार पैसे लगाने शुरू कर दिए। लेकिन हर बार हार ही हाथ लगी। आरोप है कि गेम संचालित करने वालों ने उनकी करीब 13 लाख रुपये वाली एक आईडी भी ब्लॉक कर दी, जिसके बाद नई आईडी बनाकर फिर गेम खिलाया गया। हारी हुई रकम वापस जीतने की उम्मीद में उन्होंने गूगल पे के माध्यम से 20 से अधिक लोगों के खातों में 500 से ज्यादा ट्रांजैक्शन किए।
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इस दौरान गेम संचालित करने वाले लोग लगातार व्हाट्सएप के जरिए उनके संपर्क में रहे। कामिल के पास चैट और लेन-देन के रिकॉर्ड भी मौजूद हैं। कामिल अली ने बताया कि रुपये की व्यवस्था करने के लिए उन्हें अपनी चार बीघा पैतृक जमीन और दो दुकानें गिरवी रखनी पड़ीं। अब वह भारी कर्ज और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। उनका कहना है कि इस घटना के बाद कई बार आत्महत्या जैसे विचार भी मन में आए, लेकिन परिवार को देखते हुए उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बृहस्पतिवार को एसपी कार्यालय पहुंचकर कामिल अली ने पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि ऑनलाइन गेम में पैसे लगाने के लालच से बचें, क्योंकि यह कुछ ही समय में पूरी जिंदगी की कमाई खत्म कर सकता है।
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