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Amroha News: बीयूएमएस-बीएएमएस की डिग्री लगाकर अस्पताल चला रहे झोलाछाप
Fri, 18 Apr 2025 02:40 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 18 Apr 2025 02:40 AM IST
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अमरोहा।
बीयूएमएस-बीएएमएस चिकित्सकों की डिग्री लगाकर इंटर पास झोलाछाप क्लीनिक और अस्पताल चला रहे हैं। वह डिग्रीधारक चिकित्सकों के कागज लगाकर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन करा लेते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ऐसे कई क्लीनिक व अस्पतालों को सील कर चुका है, बाबजूद इसके रवैया नहीं सुधर रहा है। झोलाछाप और सेहत विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ से मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। जिले में गली-गली और मोहल्लों में झोलाछापों की भरमार है। वह बिना डिग्री के ही लोगों की नजरों में डाॅक्टर बने है और लोगों को लूट रहे हैं। इनमें कुछ झोलाछाप ऐसे हैं, जिन्होंने नया फंडा अपना रखा है।
सीएमओ कार्यालय में डिग्रीधारक चिकित्सक के कागजात से रजिस्ट्रेशन कराकर अस्पताल व क्लीनिक चला रहे हैं। इसके बदले महकमे के अधिकारियों और कर्मियों की जेब गर्म करते हैं। विभागीय सूत्रों की माने से तो जिले में 50 फीसद अस्पताल व क्लीनिक झोलाछाप ही चला रहे हैं और जिस चिकित्सक के नाम से अस्पताल का रजिस्ट्रेशन है वह कभी नहीं आते हैं।
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इन झोलाछापों के सामने बड़े-बडे डॉक्टर, हकीम भी फेल है। वह गंभीर मरीजों के ऑपरेशन से लेकर महिलाओं की डिलीवरी भी करते हैं। कई क्लीनिक और अस्पतालों में मेडिकल स्टोर भी चलते हैं तो कई मेडिकल स्टोर में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। डिग्रीधारक चिकित्सकों के होर्डिंग व बैनर देखकर मरीज भी इलाज कराने पहुंच जाते हैं।
पिछले सालों में कई मरीजों की मौत हुई है। पिछले दिनों हसनपुर के रहरा अड्डे पर निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। वहां पर भी कक्षा आठ पास झोलाछाप इलाज कर रहा था।
जोया में एक अवैध अस्पताल पर मेहरबानी
जोया में एक निजी क्लीनिक की शिकायत मिली थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने निरीक्षण के बाद अस्पताल को सील कर दिया था। विभाग के अधिकारियों ने अस्पताल को अवैध बताते हुए संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही थी। लेकिन, कुछ दिन बाद ऐसे क्या हुआ जो अस्पताल शुरू हो गया। चर्चा है कि अस्पताल संचालक की विभाग के अधिकारियों से अच्छी सांठगांठ है, जिस कारण उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और अस्पताल की सील खोल दी गई है।
छह महीने पहले अवैध अस्पताल व क्लीनिक किए थे सील, ठिकाना बदलकर चला रहे
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक स्तर की टीमों ने करीब छह महीने पहले जिलेभर में झोलाछापों के खिलाफ छापामार अभियान चलाकर अवैध रूप से संचालित क्लीनिक और अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस दौरान कहीं झोलाछाप इलाज करते मिले तो कहीं मानक अधूरे पाए गए थे। नियम विरुद्ध चल रहे करीब 15 अवैध अस्पताल, क्लीनिक और नर्सिंग होम को सील किया गया था। लेकिन, कुछ दिन बंद रहने बाद अधिकांश झोलाछापों ने अपना ठिकाना बदल लिया और फिर से क्लीनिक अस्पताल शुरू कर दिए हैं।
- अवैध रूप से संचालित अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती रही है। पिछले दिनों भी दस से अधिक अस्पताल सील किए गए हैं। कई क्लीनिक संचालकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। एक बार फिर जिलेभर में अभियान चलाकर झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ .एसपी सिंह, सीएमओ अमरोहा
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बीयूएमएस-बीएएमएस चिकित्सकों की डिग्री लगाकर इंटर पास झोलाछाप क्लीनिक और अस्पताल चला रहे हैं। वह डिग्रीधारक चिकित्सकों के कागज लगाकर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन करा लेते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ऐसे कई क्लीनिक व अस्पतालों को सील कर चुका है, बाबजूद इसके रवैया नहीं सुधर रहा है। झोलाछाप और सेहत विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ से मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। जिले में गली-गली और मोहल्लों में झोलाछापों की भरमार है। वह बिना डिग्री के ही लोगों की नजरों में डाॅक्टर बने है और लोगों को लूट रहे हैं। इनमें कुछ झोलाछाप ऐसे हैं, जिन्होंने नया फंडा अपना रखा है।
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सीएमओ कार्यालय में डिग्रीधारक चिकित्सक के कागजात से रजिस्ट्रेशन कराकर अस्पताल व क्लीनिक चला रहे हैं। इसके बदले महकमे के अधिकारियों और कर्मियों की जेब गर्म करते हैं। विभागीय सूत्रों की माने से तो जिले में 50 फीसद अस्पताल व क्लीनिक झोलाछाप ही चला रहे हैं और जिस चिकित्सक के नाम से अस्पताल का रजिस्ट्रेशन है वह कभी नहीं आते हैं।
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इन झोलाछापों के सामने बड़े-बडे डॉक्टर, हकीम भी फेल है। वह गंभीर मरीजों के ऑपरेशन से लेकर महिलाओं की डिलीवरी भी करते हैं। कई क्लीनिक और अस्पतालों में मेडिकल स्टोर भी चलते हैं तो कई मेडिकल स्टोर में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। डिग्रीधारक चिकित्सकों के होर्डिंग व बैनर देखकर मरीज भी इलाज कराने पहुंच जाते हैं।
पिछले सालों में कई मरीजों की मौत हुई है। पिछले दिनों हसनपुर के रहरा अड्डे पर निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। वहां पर भी कक्षा आठ पास झोलाछाप इलाज कर रहा था।
जोया में एक अवैध अस्पताल पर मेहरबानी
जोया में एक निजी क्लीनिक की शिकायत मिली थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने निरीक्षण के बाद अस्पताल को सील कर दिया था। विभाग के अधिकारियों ने अस्पताल को अवैध बताते हुए संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही थी। लेकिन, कुछ दिन बाद ऐसे क्या हुआ जो अस्पताल शुरू हो गया। चर्चा है कि अस्पताल संचालक की विभाग के अधिकारियों से अच्छी सांठगांठ है, जिस कारण उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और अस्पताल की सील खोल दी गई है।
छह महीने पहले अवैध अस्पताल व क्लीनिक किए थे सील, ठिकाना बदलकर चला रहे
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक स्तर की टीमों ने करीब छह महीने पहले जिलेभर में झोलाछापों के खिलाफ छापामार अभियान चलाकर अवैध रूप से संचालित क्लीनिक और अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस दौरान कहीं झोलाछाप इलाज करते मिले तो कहीं मानक अधूरे पाए गए थे। नियम विरुद्ध चल रहे करीब 15 अवैध अस्पताल, क्लीनिक और नर्सिंग होम को सील किया गया था। लेकिन, कुछ दिन बंद रहने बाद अधिकांश झोलाछापों ने अपना ठिकाना बदल लिया और फिर से क्लीनिक अस्पताल शुरू कर दिए हैं।
- अवैध रूप से संचालित अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती रही है। पिछले दिनों भी दस से अधिक अस्पताल सील किए गए हैं। कई क्लीनिक संचालकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। एक बार फिर जिलेभर में अभियान चलाकर झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ .एसपी सिंह, सीएमओ अमरोहा