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Amroha News: डॉक्टर न सुविधाएं, लोग निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर
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गजरौला (अमरोहा)।
सीएचसी गजरौला में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। कहने को सीएचसी तो है, लेकिन यहां डाॅक्टरों की कमी है। वहीं, अन्य संसाधन भी नहीं होने से ज्यादातर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। सिर्फ चार डॉक्टरों के भरोसे ही सीएचसी चल रही है। जबकि, यहां पर सात डॉक्टरों की जरूरत है। ऐसे में मरीज जिला अस्पताल और निजी डॉक्टरों की ओर रुख करने को मजबूर रहते हैं। नेशनल हाईवे और औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण गजरौला सीएचसी की अहमियत बहुत बढ़ जाती है।
शहर के अलावा आसपास के कई गांवों के लोग सीएचसी पर निर्भर हैं। जबकि, आए दिन हाईवे पर होने वाले हादसों में घायलों को भी सीएचसी में भर्ती कराया जाता है। मगर, गंभीर मरीजों को सिर्फ प्रारंभिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है। इसकी वजह स्टाफ की कमी होना है। यहां पर सात चिकित्सक तैनात होने चाहिए, जबकि इस समय चार चिकित्सकों ही है। सबसे अधिक कमी सीएचसी में सर्जन नहीं होने की खलती है। जिसके कारण हादसे में घायलों को रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा सीएचसी में अन्य सुविधाएं भी बदहाल है।
दंत व हड्डी रोग विशेषज्ञ भी नहीं
जिले में गजरौला सीएचसी को काफी अच्छा माना जाता है, लेकिन यहां भी अव्यवस्थाएं हावी हैं। सीएचसी में दंत रोग विशेषज्ञ के साथ हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं ही है। ऐसे में दांतों का उपचार कराने पहुंचने वाले मरीज निजी अस्पताल में जाने को मजबूर है। इसके अलावा हाईवे या आसपास के क्षेत्र में हादसे में घायल या अन्य चोट के कारण हड्डी फ्रेक्चर वाले मरीजों को भी गजरौला सीएचसी से हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है।
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नहीं होती महिला की सर्जरी
सीएचसी में सर्जन की भी तैनाती नहीं है। जिसके चलते गर्भवती महिलाओं का आपरेशन नहीं हो पाता है। उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। नार्मल डिलीवरी ही यहां पर होती है। उधर, महिला वार्डों में महिला मरीजों की देखभाल के लिए एक भी आया नहीं है। दो आया की जरूरत है।
- दंत रोग विशेषज्ञ का बीते महीने हापुड़ तबादला हो गया। उनके बाद किसी की तैनाती नहीं हुई। हड्डी और दंत रोग विशेषज्ञ और सर्जन की तैनाती के लिए उन्होंने सीएमओ के माध्यम से शासन को पत्र लिखा है। उम्मीद है कि जल्द ही स्टाफ मिल जाएगा। - डॉ. योगेंद्र सिंह, सीएचसी प्रभारी
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सीएचसी गजरौला में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। कहने को सीएचसी तो है, लेकिन यहां डाॅक्टरों की कमी है। वहीं, अन्य संसाधन भी नहीं होने से ज्यादातर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। सिर्फ चार डॉक्टरों के भरोसे ही सीएचसी चल रही है। जबकि, यहां पर सात डॉक्टरों की जरूरत है। ऐसे में मरीज जिला अस्पताल और निजी डॉक्टरों की ओर रुख करने को मजबूर रहते हैं। नेशनल हाईवे और औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण गजरौला सीएचसी की अहमियत बहुत बढ़ जाती है।
शहर के अलावा आसपास के कई गांवों के लोग सीएचसी पर निर्भर हैं। जबकि, आए दिन हाईवे पर होने वाले हादसों में घायलों को भी सीएचसी में भर्ती कराया जाता है। मगर, गंभीर मरीजों को सिर्फ प्रारंभिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है। इसकी वजह स्टाफ की कमी होना है। यहां पर सात चिकित्सक तैनात होने चाहिए, जबकि इस समय चार चिकित्सकों ही है। सबसे अधिक कमी सीएचसी में सर्जन नहीं होने की खलती है। जिसके कारण हादसे में घायलों को रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा सीएचसी में अन्य सुविधाएं भी बदहाल है।
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दंत व हड्डी रोग विशेषज्ञ भी नहीं
जिले में गजरौला सीएचसी को काफी अच्छा माना जाता है, लेकिन यहां भी अव्यवस्थाएं हावी हैं। सीएचसी में दंत रोग विशेषज्ञ के साथ हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं ही है। ऐसे में दांतों का उपचार कराने पहुंचने वाले मरीज निजी अस्पताल में जाने को मजबूर है। इसके अलावा हाईवे या आसपास के क्षेत्र में हादसे में घायल या अन्य चोट के कारण हड्डी फ्रेक्चर वाले मरीजों को भी गजरौला सीएचसी से हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है।
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नहीं होती महिला की सर्जरी
सीएचसी में सर्जन की भी तैनाती नहीं है। जिसके चलते गर्भवती महिलाओं का आपरेशन नहीं हो पाता है। उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। नार्मल डिलीवरी ही यहां पर होती है। उधर, महिला वार्डों में महिला मरीजों की देखभाल के लिए एक भी आया नहीं है। दो आया की जरूरत है।
- दंत रोग विशेषज्ञ का बीते महीने हापुड़ तबादला हो गया। उनके बाद किसी की तैनाती नहीं हुई। हड्डी और दंत रोग विशेषज्ञ और सर्जन की तैनाती के लिए उन्होंने सीएमओ के माध्यम से शासन को पत्र लिखा है। उम्मीद है कि जल्द ही स्टाफ मिल जाएगा। - डॉ. योगेंद्र सिंह, सीएचसी प्रभारी