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ढबारसी में घायल मिले एक और मोर की मौत
ब्यूरो अमर उजाला/ढबारसी /अमरोहा।
Updated Tue, 17 Apr 2018 01:58 AM IST
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ढबारसी में घायल मोर को पकड़कर लाती वन विभाग की टीम।
- फोटो : अमर उजाला
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14 अप्रैल को घायल अवस्था में मिले राष्ट्रीय पक्षी मोर ने सोमवार को दम तोड़ दिया। मोर का विसरा जांच के लिए भेजा गया है। अब तक जख्मी मिले तीनों मोरों की मौत हो चुकी है। वहीं ढबारसी में सोमवार ट्यूबवेल की कुइयां में एक और मोर जख्मी पड़ा मिला। उसे इलाज के लिए आईवीआरआई बरेली भेज दिया गया है। लगातार घायल मिल रहे मोरों के चलते वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
नौ अप्रैल से लगातार मोर घायल अवस्था में मिल रहे हैं। अब तक चार मोर जख्मी हालत में मिले हैं, जिनमें से तीन की मौत हो चुकी है। दो मोर पहले ही दम तोड़ चुके हैं, जबकि तीसरे मोर ने सोमवार को दम तोड़ दिया। ये मोर 14 अप्रैल को घायल अवस्था में मिला था। वहीं सोमवार को गारबपुर गांव निवासी डा. मित्रपाल के बाग में टयूबवैल की कुइयां में एक मोर घायल हालत में पड़ा मिला। इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। मौके पर पहुंचे वन कर्मियों ने मोर को निकाला और अपने साथ सियाली जागीर के रेंज कार्यालय में ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद मोर को भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली भेजा गया है। सूत्रों की मानें तो पशु चिकित्सकों ने तीन मोर मरने के बाद चौथे का इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए। डाक्टरों का कहना था कि चौथे मोर को बरेली ही भेज दो, वहां उचित उपचार मिल सकता है।
उधर वन विभाग ने राष्ट्रीय पक्षी मोर पर आफत को देखते हुए इनकी गणना कराने का निर्णय लिया है। जल्द ही मोरों की गिनती कराई जाएगी। जिससे शिकार होने की दशा में मोर की संख्या का पता चल सके। लोगों का कहना था कि पहले बागों में काफी मोर हुआ करते थे लेकिन, अब कम दिखाई देते हैं।
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सूत्रों की मानें तो मोरों का शिकार किया जा रहा है। उधर वन विभाग के एसडीओ एके सिंह ने बताया कि मोर की मौत होना गंभीर मामला है। इसमें रिपोर्ट दर्ज करते हुए मामले की जांच की जाएगी। वहीं मोरों की गणना करने के लिए भी आदेश जारी किए गए हैं।
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नौ अप्रैल से लगातार मोर घायल अवस्था में मिल रहे हैं। अब तक चार मोर जख्मी हालत में मिले हैं, जिनमें से तीन की मौत हो चुकी है। दो मोर पहले ही दम तोड़ चुके हैं, जबकि तीसरे मोर ने सोमवार को दम तोड़ दिया। ये मोर 14 अप्रैल को घायल अवस्था में मिला था। वहीं सोमवार को गारबपुर गांव निवासी डा. मित्रपाल के बाग में टयूबवैल की कुइयां में एक मोर घायल हालत में पड़ा मिला। इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। मौके पर पहुंचे वन कर्मियों ने मोर को निकाला और अपने साथ सियाली जागीर के रेंज कार्यालय में ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद मोर को भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली भेजा गया है। सूत्रों की मानें तो पशु चिकित्सकों ने तीन मोर मरने के बाद चौथे का इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए। डाक्टरों का कहना था कि चौथे मोर को बरेली ही भेज दो, वहां उचित उपचार मिल सकता है।
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उधर वन विभाग ने राष्ट्रीय पक्षी मोर पर आफत को देखते हुए इनकी गणना कराने का निर्णय लिया है। जल्द ही मोरों की गिनती कराई जाएगी। जिससे शिकार होने की दशा में मोर की संख्या का पता चल सके। लोगों का कहना था कि पहले बागों में काफी मोर हुआ करते थे लेकिन, अब कम दिखाई देते हैं।
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सूत्रों की मानें तो मोरों का शिकार किया जा रहा है। उधर वन विभाग के एसडीओ एके सिंह ने बताया कि मोर की मौत होना गंभीर मामला है। इसमें रिपोर्ट दर्ज करते हुए मामले की जांच की जाएगी। वहीं मोरों की गणना करने के लिए भी आदेश जारी किए गए हैं।