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गर्भवती महिलाओं को बताए पोषण के तरीके
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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं को जागरूक किया गया। शीघ्र स्तनपान-केवल स्तनपान थीम पर वीडियो कांफ्रेंसिंग से पोषण पाठशाला का आयोजन किया गया। केंद्रों पर पंजीकृत गर्भवती महिलाएं, धात्री महिलाएं और उनके परिवार के सदस्य भी इस कार्यक्रम से जुड़े।
जिला कार्यक्रम अधिकारी संजीव सिंह ने बताया कि जनपद के सभी 1430 आंगनबाड़ी केंद्रों पर आंगनबाड़ी द्वारा अपने-अपने केंद्रों पर धात्री महिलाएं व गर्भवती महिलाओं को पोषण पाठशाला के माध्यम से जागरूक किया गया। प्रथम पोषण पाठशाला का आयोजन वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा दोपहर 12 से 2 बजे तक किया गया। पोषण पाठशाला में विभागीय अधिकारियों और विशेषज्ञों ने ‘शीघ्र स्तनपान- केवल स्तनपान की आवश्यकता, उपयोगिता, विभाग की सेवाओं, पोषण प्रबंधन, कुपोषण से बचाव के उपाय, पोषण शिक्षा आदि के संबंध में विस्तार से बताया।
वीडियो कांफ्रेंसिंग में लाभार्थियों व अन्य के द्वारा पूछे गये प्रश्नों का उत्तर दिया गया। उन्हें बताया गया कि स्तनपान बच्चे के लिए महत्वपूर्ण है। स्तनपान से मातृ मृत्यु दर में 2020 में 3 प्रतिशत की कमी आई है। गाय व भैंस के दूध के मुकाबले में मां का दूध 5 गुना ज्यादा फायदा बच्चे को पहुंचाता है। जो बच्चे मां का दूध पीते हैं उन्हें आगे चलकर मधुमेह की बीमारी होने का खतरा कम रहता है। जिन बच्चों को मां का दूध नहीं मिलता उन बच्चों में मधुमेह की बीमारी होने का खतरा ज्यादा रहता है। कम से कम बच्चे को 10 से 12 बार दूध पिलाना चाहिए और मां को ज्यादातर दूध रात के समय में बच्चे को पिलाना चाहिए। जिससे मां भी स्वस्थ रहती है और बच्चा भी स्वस्थ रहेगा। बच्चे को 6 माह तक केवल अपना ही दूध पिलाना चाहिए। इस दौरान सीडीपीओ सुधा, सुपरवाइजर नगमा शहर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुनीता जैकब, मीना, यशोदा आदि मौजूद रहे।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी संजीव सिंह ने बताया कि जनपद के सभी 1430 आंगनबाड़ी केंद्रों पर आंगनबाड़ी द्वारा अपने-अपने केंद्रों पर धात्री महिलाएं व गर्भवती महिलाओं को पोषण पाठशाला के माध्यम से जागरूक किया गया। प्रथम पोषण पाठशाला का आयोजन वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा दोपहर 12 से 2 बजे तक किया गया। पोषण पाठशाला में विभागीय अधिकारियों और विशेषज्ञों ने ‘शीघ्र स्तनपान- केवल स्तनपान की आवश्यकता, उपयोगिता, विभाग की सेवाओं, पोषण प्रबंधन, कुपोषण से बचाव के उपाय, पोषण शिक्षा आदि के संबंध में विस्तार से बताया।
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वीडियो कांफ्रेंसिंग में लाभार्थियों व अन्य के द्वारा पूछे गये प्रश्नों का उत्तर दिया गया। उन्हें बताया गया कि स्तनपान बच्चे के लिए महत्वपूर्ण है। स्तनपान से मातृ मृत्यु दर में 2020 में 3 प्रतिशत की कमी आई है। गाय व भैंस के दूध के मुकाबले में मां का दूध 5 गुना ज्यादा फायदा बच्चे को पहुंचाता है। जो बच्चे मां का दूध पीते हैं उन्हें आगे चलकर मधुमेह की बीमारी होने का खतरा कम रहता है। जिन बच्चों को मां का दूध नहीं मिलता उन बच्चों में मधुमेह की बीमारी होने का खतरा ज्यादा रहता है। कम से कम बच्चे को 10 से 12 बार दूध पिलाना चाहिए और मां को ज्यादातर दूध रात के समय में बच्चे को पिलाना चाहिए। जिससे मां भी स्वस्थ रहती है और बच्चा भी स्वस्थ रहेगा। बच्चे को 6 माह तक केवल अपना ही दूध पिलाना चाहिए। इस दौरान सीडीपीओ सुधा, सुपरवाइजर नगमा शहर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुनीता जैकब, मीना, यशोदा आदि मौजूद रहे।
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