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Amroha News: महफूजा को मृत दिखाकर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में सभासद समेत चार गवाहों पर नोटिस जारी

Thu, 11 Jun 2026 01:39 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Thu, 11 Jun 2026 01:39 AM IST
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Notices issued to four witnesses, including a municipal councillor, for obtaining a death certificate by falsely declaring Mahfuja dead.
अमरोहा। नगर पालिका परिषद अमरोहा में जन्म-मृत्यु पटल पर बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। यहां जीवित महिला महफूजा बेगम को मृत दिखाकर न केवल मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया, बल्कि पूरी प्रक्रिया में सभासद समेत चार लोगों को गवाह बनाकर दस्तावेज भी तैयार किए गए। मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने सभासद सहित चार लोगों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। वहीं, नगर पालिका के एक चर्चित कर्मी की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।
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मोहल्ला अहमद नगर निवासी महफूजा बेगम के नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करने के लिए जो शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया उसमें मृत्यु की तिथि 25 जुलाई 2024 दर्ज की गई थी। जबकि वास्तविकता यह है कि महफूजा बेगम ने बीती 4 फरवरी को नगर कोतवाली में छह लोगों के खिलाफ अपनी जमीन के फर्जी बैनामे को लेकर एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसकी वर्तमान में विवेचना चल रही है। इसके बावजूद 26 फरवरी को नगर पालिका परिषद की जन्म-मृत्यु शाखा से महफूजा का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में स्थानीय सभासद समेत चार लोगों को गवाह दर्शाया गया है। इनके आधार कार्ड और शपथ पत्र भी दस्तावेजों के साथ लगाए गए हैं। इसके अलावा एक व्यक्ति को महफूजा का बेटा बताकर शपथ पत्र दाखिल किया गया, जबकि जांच में यह संबंध भी संदिग्ध पाया गया है।
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दस्तावेजों में न केवल गवाहों के आधार कार्ड लगाए गए, बल्कि मृतका के नाम पर भी आधार से जुड़े कागजात प्रस्तुत किए गए, जिससे पूरी प्रक्रिया की सत्यता पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में नगर पालिका के एक चचर्चित कर्मचारी की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। उसकी के माध्यम से सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे, जिसके आधार पर प्रमाण पत्र जारी किया गया।
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इस मामले में नगर कोतवाली पुलिस के तैनात दरोगा पवन कुमार ने नगर पालिका को पत्र लिखकर मृत्यु प्रमाण पत्र के संबंध में जवाब मागा था जिसके बाद मामले में तत्कालीन ईओ डॉ बृजेश सिंह ने कर अधीक्षक केशव प्रसान के नेतृत्व में लेखाकार मोहम्मद अजहर और सफाई एवं खाद्य निरीक्षक जगत सिंह समेत तीन सदस्य कमेटी गठित की थी। करीब दो महीने बाद भी जांच ठंडे बस्ते में पड़ी रही। ईओ दिनेश यादव ने बताया कि मामले में प्रमाण पत्र के लिहाज से प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर पालिका कर्मियों ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया था। इस संबंध में मोहल्ला लकड़ा के आबिद, अहमद नगर निवासी जमीर अहमद, महफूजा का बेटा बनकर शपथ पत्र देने वाले हाशिम और स्थानीय सभासद को नाटिस जारी गया गया है। नगर पालिका में प्रस्तुत किए दस्तावेजों में आबिद, जमीर अहमद और सभासद गवाह बने हुए हैं। फिलहाल जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने पर रोक लगाई गई है।
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जमीन विवाद से जुड़ा है पूरा मामला
पीड़िता महफूजा के अनुसार जनवरी 2025 में उन्हें जानकारी मिली कि उनकी जमीन का फर्जी बैनामा करा लिया गया है। जांच के दौरान पता चला कि यह बैनामा कुछ लोगों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कराया गया था। इसके बाद 4 फरवरी 2026 को महफूजा ने नगर कोतवाली में शबनम जहां, नवाब, अफसाना, शशि, अश्वनी और यशवंत सहित छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसी मामले से जुड़ी जांच अभी जारी थी कि इसी बीच महफूजा को मृत दिखाकर प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया, जिससे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

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जांच कमेटी पर भी उठे सवाल
मामले में ईओ के आदेश पर जांच कमेटी गठित की गई थी, लेकिन जांच की स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। न तो यह सामने आया कि प्रमाण पत्र किस स्तर पर जारी हुआ और न ही दोषियों की पहचान हो पाई है। जांच केवल कागजों तक सीमित रह गई है और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। महफूजा को जीवित होते हुए मृत दर्शाकर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जाना न केवल जिम्मेदारों की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि जांच कमेटी इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल लोगों पर कब और क्या कार्रवाई करती है।
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