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Amroha News: हिंदू ही नहीं, मुस्लिम भी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर उत्साहित
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अमरोहा। अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भव्य आयोजन की तैयारी है। अमरोहा जिले में हिंदू ही नहीं यहां मुस्लिम भी कह रहे हैं सबके राम। करीब पचास साल से नौगांवा सादात में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम करने वाले मुस्लिम समाज के लोग 22 जनवरी को दिवाली मनाएंगे। इतना ही नहीं हसनपुर के रहने वाले पांच वक्त के नमाजी हाजी नाहिद भी भगवान और अल्लाह में कोई फर्क नहीं मानते। वह भी प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन मंदिर में पूजा करेंगे।
जिला मुख्यालय से 16 किलोमीटर दूर स्थित नौगांवा सादात में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल यहां की रामलीला भी इस कस्बे को मशहूर बनाए हुए है। रामलीला का सारा दारोमदार रामलीला कमेटी के कंधों पर है। इस रामलीला की कमान मुस्लिमों के हाथों में है। अब गुलाम अब्बास किट्टी इस कमेटी के अध्यक्ष हैं। 50 साल पहले इसकी शुरुआत रामलीला कमेटी बनाकर की गई थी।
वहीं हसनपुर में पांच वक्त के नमाजी हाजी नाहिद के लिए भगवान और अल्लाह एक ही हैं, उनके लिए धार्मिक वर्जनाएं कोई मायने नहीं रखतीं। उनकी राम के प्रति अटूट भक्ति इसकी मिसाल है। उन्होंने नगर में मस्जिद के साथ ही मंदिर बनवाकर सामाजिक सद्भाव और समरसता का संदेश दिया है। वे 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि वह इस दिन स्थानीय बहुचरा माता के मंदिर में प्रभु श्रीराम की पूजा- अर्चना करेंगे। साथ ही शहर के अन्य मंदिरों में जाकर हवन-यज्ञ में भी शिरकत करते हुए भगवान श्रीराम का गुणगान करेंगे। आंकड़ों की बात करें तो नौगांवा सादात कस्बे में आबादी का 80 फीसदी हिस्सा मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखता है। जबकि यहां केवल 20 फीसदी ही हिन्दू समाज के लोग रहते हैं। शनिवार को गुलाम अब्बास किट्टी ने कस्बे के शिव मंदिर में पहुंचकर साफ-सफाई की।
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अहसान अख्तर ने शुरू कराया था रामलीला का आयोजन
समाजसेवी सैय्यद अहसान अख्तर के नेतृत्व में शुरू हुआ रामलीला का आयोजन हर साल परंपरागत ढंग से जारी है। कमेटी के मौजूदा अध्यक्ष गुलाम अब्बास किट्टी ने बताया कि अहसान अख्तर ने करीब 35 साल तक रामलीला के आयोजन की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया था। फिलहाल गुलाम अब्बास किट्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी के साथ आपसी सौहार्द की रामलीला का आयोजन करा रहे हैं।
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पूजन में तिलक लगाकर मौजूद रहते हैं मुस्लिम
रामलीला के आयोजन की शुरुआत में होने वाले पूजन में मुस्लिम समाज के लोग शामिल रहते हैं। मंत्रोच्चार की गूंज के बीच रोली-चावल का तिलक लगाए मुस्लिम भाइयों की मौजूदगी अपने आप में मिसाल है। अध्यक्ष गुलाम अब्बास किट्टी ने कहा कि ये यहां की गंगा-जमुनी तहजीब है, जो हमारे खून में बसी है।
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जिला मुख्यालय से 16 किलोमीटर दूर स्थित नौगांवा सादात में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल यहां की रामलीला भी इस कस्बे को मशहूर बनाए हुए है। रामलीला का सारा दारोमदार रामलीला कमेटी के कंधों पर है। इस रामलीला की कमान मुस्लिमों के हाथों में है। अब गुलाम अब्बास किट्टी इस कमेटी के अध्यक्ष हैं। 50 साल पहले इसकी शुरुआत रामलीला कमेटी बनाकर की गई थी।
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वहीं हसनपुर में पांच वक्त के नमाजी हाजी नाहिद के लिए भगवान और अल्लाह एक ही हैं, उनके लिए धार्मिक वर्जनाएं कोई मायने नहीं रखतीं। उनकी राम के प्रति अटूट भक्ति इसकी मिसाल है। उन्होंने नगर में मस्जिद के साथ ही मंदिर बनवाकर सामाजिक सद्भाव और समरसता का संदेश दिया है। वे 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि वह इस दिन स्थानीय बहुचरा माता के मंदिर में प्रभु श्रीराम की पूजा- अर्चना करेंगे। साथ ही शहर के अन्य मंदिरों में जाकर हवन-यज्ञ में भी शिरकत करते हुए भगवान श्रीराम का गुणगान करेंगे। आंकड़ों की बात करें तो नौगांवा सादात कस्बे में आबादी का 80 फीसदी हिस्सा मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखता है। जबकि यहां केवल 20 फीसदी ही हिन्दू समाज के लोग रहते हैं। शनिवार को गुलाम अब्बास किट्टी ने कस्बे के शिव मंदिर में पहुंचकर साफ-सफाई की।
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अहसान अख्तर ने शुरू कराया था रामलीला का आयोजन
समाजसेवी सैय्यद अहसान अख्तर के नेतृत्व में शुरू हुआ रामलीला का आयोजन हर साल परंपरागत ढंग से जारी है। कमेटी के मौजूदा अध्यक्ष गुलाम अब्बास किट्टी ने बताया कि अहसान अख्तर ने करीब 35 साल तक रामलीला के आयोजन की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया था। फिलहाल गुलाम अब्बास किट्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी के साथ आपसी सौहार्द की रामलीला का आयोजन करा रहे हैं।
पूजन में तिलक लगाकर मौजूद रहते हैं मुस्लिम
रामलीला के आयोजन की शुरुआत में होने वाले पूजन में मुस्लिम समाज के लोग शामिल रहते हैं। मंत्रोच्चार की गूंज के बीच रोली-चावल का तिलक लगाए मुस्लिम भाइयों की मौजूदगी अपने आप में मिसाल है। अध्यक्ष गुलाम अब्बास किट्टी ने कहा कि ये यहां की गंगा-जमुनी तहजीब है, जो हमारे खून में बसी है।

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