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Amroha News: बिना फिटनेस दौड़ रहीं 100 से ज्यादा एंबुलेंस
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अमरोहा। जिले की सड़कों पर मरीजों को लेकर दौड़ रही 100 से ज्यादा एंबुलेंस कंडम हो चुकी हैं। वहीं, कई एंबुलेंस बिना पंजीकरण ही फर्राटा भर रही है। इससे मरीजों व उनके तीमारदारों की जान को खतरा बन रहता है। उधर, सड़कों पर दौड़ती एंबुलेंस की पुलिस व परिवहन विभाग के अफसर भी जांच करने से बचते हैं। ऐसे में एंबुलेंस संचालक भी मनमानी करते हैं।
एआरटीओ कार्यालय के अनुसार करीब 700 एंबुलेंस जिले में पंजीकृत हैं। इनमें 42 सरकारी और इसके अलावा सभी निजी हैं, जो दिनभर मरीजों को लेकर सड़कों पर दौड़ती रहती हैं। शासन की ओर से एंबुलेंस के कुछ मानक भी तय किए गए हैं, लेकिन जिले के अस्पतालों में जितनी एंबुलेंस चल रही हैं, उनमें से अधिकांश के मानक ही पूरे नहीं हैं। कई एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर व अग्निशमन यंत्र नहीं हैं, तो अधिकांश में पैरामेडिकल स्टाफ भी मौजूद नहीं होता। वहीं, कुछ एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर लगे हैं तो यह सिर्फ दिखावे के लिए ही है।
अधिकांश एंबुलेंस खस्ताहाल हो चुकी हैं। इसके अलावा 100 से ज्यादा एंबुलेंस के फिटनेस सर्टिफिकेट ही नहीं है। इसके बाद भी यह दिन रात सड़कों पर दौड़ रही हैं। साथ ही तीमारदारों से ज्यादा रुपये लिए जाते है। फिर भी जिम्मेदारों की ओर से कार्रवाई नहीं की जाती है।
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जरूरी दवा और स्टाफ भी नहीं
नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही इन एंबुलेंस में न तो जीवन रक्षक दवाओं की व्यवस्था है और न ही प्रशिक्षित स्टाफ की। इतना ही नहीं इनकी निगरानी करने वाला स्वास्थ्य विभाग भी मौन साधे हुए है। जिसका कुप्रभाव मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि नौसिखिया एंबुलेंस चालक गंभीर मरीजों को ढ़ोते नजर आ रहे हैं। जबकि, नेशनल हेल्थ मिशन और परिवहन विभाग की तरफ से बनाए गए नियमों को ताक पर रखकर जिलेभर में निजी एंबुलेंस संचालित की जा रही हैं।
फर्जी नाम-पते पर रजिस्टर्ड होने पर नहीं हुई थी कार्रवाई
श्री साइन एंबुलेंस सर्विसेज और गगन त्यागी एंबुलेंस सर्विस के फर्जी नाम-पते पर रजिस्टर्ड 448 एंबुलेंस के पंजीयन को निरस्त कर दिया था। इन पतों पर कोई भी एंबुलेंस सर्विस देने वाली संस्था कार्यरत नहीं है। एंबुलेंस के अधिकतर मालिक दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा के मूल निवासी हैं। परिवहन विभाग ने फर्जी नाम पते पर एंबुलेंस का पंजीयन कराने वाले फर्म के मालिकों पर केस दर्ज कराने की बात कही थी। लेकिन, आज तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
एंबुलेंस में पकड़ी जा चुकी है शराब की तस्करी
धनौरा के फर्जी पते पर रजिस्टर्ड एंबुलेंस से 2017 में शराब की तस्करी पकड़ी थी। जिले में रजिस्टर्ड एंबुलेंस में हरियाणा शराब की बिहार तक अवैध तस्करी की जा रही थी। नोएडा पुलिस ने एंबुलेंस संग बिहार के दो व बुलंदशहर के एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 2021 में डिडौली पुलिस ने हाईवे पर एंबुलेंस के जरिए हरियाणा से लाई जा रही अवैध शराब बरामद की थी। इस दौरान पुलिस ने तीन तस्करों को भी गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से बरामद शराब की कीमत चार लाख रुपये बताई गई थी।
एंबुलेंस फिटनेस के लिए यह जरूरी
वाहनों की फिटनेस का प्रमाणपत्र मानकों की पड़ताल के बाद आरआई की ओर से जारी किया जाता है। एंबुलेंस के लिए भी फिटनेस प्रमाणपत्र आरआई जारी किया जाता है। इसके लिए जरूरी दवा सहित ऑक्सीजन की पड़ताल नहीं हो पाती थी। वहीं, एंबुलेंस पर ईएमओ है या नहीं इसकी जांच नहीं की जाती थी। ऐसे में उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जिले में एंबुलेंस को फिटनेट प्रमाणपत्र देने के पहले एआरटीओ की ओर से एक आवश्यक रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय से ली जाती है। सीएमओ कार्यालय में तैनात संबंधित नोडल अधिकारी की संस्तुति के बाद ही फिटनेस प्रमाणपत्र दिया जाता है।
40 फीसदी एंबुलेंस 10 साल से ज्यादा हैं पुरानी
एआरटीओ के यहां पंजीकृत 700 एंबुलेंस में से 40 फीसदी 10 साल पुरानी हैं। इनको नियमानुसार हर साल एआरटीओ के यहां फिटनेस करानी होती है। इसमें धुआं जांच के अलावा वाहन की मौजूदा हालत भी परखी जाती है। चिकित्सकीय उपकरण समेत चालक के लाइसेंस समेत अन्य की भी जांच की जाती। मानक नहीं होने और खटारा हाल में एंबुलेंस होने के कारण चालक इनका फिटनेस कराने नहीं आ रहे हैं।
एंबुलेंस के मानक
- एंबुलेंस में मरीज के लिए प्राथमिक उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए।
- प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और जरूरी दवा उपलब्ध हों।
- प्राथमिक उपचार, स्ट्रेचर, कार्डियक मॉनीटर, बीपी मॉनीटर और ऑक्सीजन मशीनों का जानकार हो।
- खुलने बंद होने वाली खिड़कियां, थर्मो इलेक्ट्रिक कूलर और दो ऑक्सीजन सिलिंडर होने चाहिए।
- इलेक्ट्रॉनिक सायरन होना चाहिए।
एंबुलेंस में मरीज होने कारण मानवता के नाते कार्रवाई नहीं हो पाती है। सड़क पर खाली एंबुलेंस मिलती नहीं हैं। अगर एंबुलेंस पर कार्रवाई करने की कोशिश की जाती है तो मरीज और तीमारदार हंगामा करने लगते हैं। जिन एंबुलेंसों की फिटनेस नहीं हुई है उनके मालिकों को नोटिस जारी किए जाते हैं।
- महेश चंद शर्मा, एआरटीओ अमरोहा
बिना फिटनेस एंबुलेंस पर कार्रवाई करना परिवहन विभाग और पुलिस का काम है। इससे हमारा कोई लेनादेना नहीं हैं। ऐसे अस्पताल या एंबुलेंस पर कार्रवाई करने में परिवहन विभाग को मदद की जरूरत है तो हम तैयार हैं। हमारी 102 और 108 वाली सभी एंबुलेंस की फिटेनस हैं। - डॉ. एसपी सिंह, सीएमओ अमरोहा
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एआरटीओ कार्यालय के अनुसार करीब 700 एंबुलेंस जिले में पंजीकृत हैं। इनमें 42 सरकारी और इसके अलावा सभी निजी हैं, जो दिनभर मरीजों को लेकर सड़कों पर दौड़ती रहती हैं। शासन की ओर से एंबुलेंस के कुछ मानक भी तय किए गए हैं, लेकिन जिले के अस्पतालों में जितनी एंबुलेंस चल रही हैं, उनमें से अधिकांश के मानक ही पूरे नहीं हैं। कई एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर व अग्निशमन यंत्र नहीं हैं, तो अधिकांश में पैरामेडिकल स्टाफ भी मौजूद नहीं होता। वहीं, कुछ एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर लगे हैं तो यह सिर्फ दिखावे के लिए ही है।
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अधिकांश एंबुलेंस खस्ताहाल हो चुकी हैं। इसके अलावा 100 से ज्यादा एंबुलेंस के फिटनेस सर्टिफिकेट ही नहीं है। इसके बाद भी यह दिन रात सड़कों पर दौड़ रही हैं। साथ ही तीमारदारों से ज्यादा रुपये लिए जाते है। फिर भी जिम्मेदारों की ओर से कार्रवाई नहीं की जाती है।
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जरूरी दवा और स्टाफ भी नहीं
नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही इन एंबुलेंस में न तो जीवन रक्षक दवाओं की व्यवस्था है और न ही प्रशिक्षित स्टाफ की। इतना ही नहीं इनकी निगरानी करने वाला स्वास्थ्य विभाग भी मौन साधे हुए है। जिसका कुप्रभाव मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि नौसिखिया एंबुलेंस चालक गंभीर मरीजों को ढ़ोते नजर आ रहे हैं। जबकि, नेशनल हेल्थ मिशन और परिवहन विभाग की तरफ से बनाए गए नियमों को ताक पर रखकर जिलेभर में निजी एंबुलेंस संचालित की जा रही हैं।
फर्जी नाम-पते पर रजिस्टर्ड होने पर नहीं हुई थी कार्रवाई
श्री साइन एंबुलेंस सर्विसेज और गगन त्यागी एंबुलेंस सर्विस के फर्जी नाम-पते पर रजिस्टर्ड 448 एंबुलेंस के पंजीयन को निरस्त कर दिया था। इन पतों पर कोई भी एंबुलेंस सर्विस देने वाली संस्था कार्यरत नहीं है। एंबुलेंस के अधिकतर मालिक दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा के मूल निवासी हैं। परिवहन विभाग ने फर्जी नाम पते पर एंबुलेंस का पंजीयन कराने वाले फर्म के मालिकों पर केस दर्ज कराने की बात कही थी। लेकिन, आज तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
एंबुलेंस में पकड़ी जा चुकी है शराब की तस्करी
धनौरा के फर्जी पते पर रजिस्टर्ड एंबुलेंस से 2017 में शराब की तस्करी पकड़ी थी। जिले में रजिस्टर्ड एंबुलेंस में हरियाणा शराब की बिहार तक अवैध तस्करी की जा रही थी। नोएडा पुलिस ने एंबुलेंस संग बिहार के दो व बुलंदशहर के एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 2021 में डिडौली पुलिस ने हाईवे पर एंबुलेंस के जरिए हरियाणा से लाई जा रही अवैध शराब बरामद की थी। इस दौरान पुलिस ने तीन तस्करों को भी गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से बरामद शराब की कीमत चार लाख रुपये बताई गई थी।
एंबुलेंस फिटनेस के लिए यह जरूरी
वाहनों की फिटनेस का प्रमाणपत्र मानकों की पड़ताल के बाद आरआई की ओर से जारी किया जाता है। एंबुलेंस के लिए भी फिटनेस प्रमाणपत्र आरआई जारी किया जाता है। इसके लिए जरूरी दवा सहित ऑक्सीजन की पड़ताल नहीं हो पाती थी। वहीं, एंबुलेंस पर ईएमओ है या नहीं इसकी जांच नहीं की जाती थी। ऐसे में उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जिले में एंबुलेंस को फिटनेट प्रमाणपत्र देने के पहले एआरटीओ की ओर से एक आवश्यक रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय से ली जाती है। सीएमओ कार्यालय में तैनात संबंधित नोडल अधिकारी की संस्तुति के बाद ही फिटनेस प्रमाणपत्र दिया जाता है।
40 फीसदी एंबुलेंस 10 साल से ज्यादा हैं पुरानी
एआरटीओ के यहां पंजीकृत 700 एंबुलेंस में से 40 फीसदी 10 साल पुरानी हैं। इनको नियमानुसार हर साल एआरटीओ के यहां फिटनेस करानी होती है। इसमें धुआं जांच के अलावा वाहन की मौजूदा हालत भी परखी जाती है। चिकित्सकीय उपकरण समेत चालक के लाइसेंस समेत अन्य की भी जांच की जाती। मानक नहीं होने और खटारा हाल में एंबुलेंस होने के कारण चालक इनका फिटनेस कराने नहीं आ रहे हैं।
एंबुलेंस के मानक
- एंबुलेंस में मरीज के लिए प्राथमिक उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए।
- प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और जरूरी दवा उपलब्ध हों।
- प्राथमिक उपचार, स्ट्रेचर, कार्डियक मॉनीटर, बीपी मॉनीटर और ऑक्सीजन मशीनों का जानकार हो।
- खुलने बंद होने वाली खिड़कियां, थर्मो इलेक्ट्रिक कूलर और दो ऑक्सीजन सिलिंडर होने चाहिए।
- इलेक्ट्रॉनिक सायरन होना चाहिए।
एंबुलेंस में मरीज होने कारण मानवता के नाते कार्रवाई नहीं हो पाती है। सड़क पर खाली एंबुलेंस मिलती नहीं हैं। अगर एंबुलेंस पर कार्रवाई करने की कोशिश की जाती है तो मरीज और तीमारदार हंगामा करने लगते हैं। जिन एंबुलेंसों की फिटनेस नहीं हुई है उनके मालिकों को नोटिस जारी किए जाते हैं।
- महेश चंद शर्मा, एआरटीओ अमरोहा
बिना फिटनेस एंबुलेंस पर कार्रवाई करना परिवहन विभाग और पुलिस का काम है। इससे हमारा कोई लेनादेना नहीं हैं। ऐसे अस्पताल या एंबुलेंस पर कार्रवाई करने में परिवहन विभाग को मदद की जरूरत है तो हम तैयार हैं। हमारी 102 और 108 वाली सभी एंबुलेंस की फिटेनस हैं। - डॉ. एसपी सिंह, सीएमओ अमरोहा