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Amroha News: शहर से गांव तक बंदरों का आतंक, दो माह में 4415 से ज्यादा लोगों को काटा
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अमरोहा। शहर से गांव तक बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। बंदरों के झुंड आए दिन लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर रहे हैं। अस्पतालों में पहुंच रहे घायलों के आंकड़ों के अनुसार जून और जुलाई में बंदरों के काटने के 4415 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, बंदरों से बचने की कोशिश में छत से गिरकर दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसके बावजूद बंदरों को पकड़ने के लिए प्रभावी अभियान नहीं चलने से लोगों में दहशत है।
रजबपुर थाना क्षेत्र के तासिया गांव में पिछले दिनों बंदरों ने 18 लोगों को काटकर घायल कर दिया था। इनमें अधिकांश महिलाएं थीं। गांव निवासी 55 वर्षीय भगवानदास छत पर गए थे, तभी बंदरों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। कई जगह काटने से वह घायल हो गए। हमले से बचने के दौरान गिरकर भी चोटिल हुए। इससे पहले इंद्र सिंह, जसवीर सिंह, अनामिका, दुर्गेश, जयवती, प्रकाश, लीलावती, भागवती, शकुंतला, विद्या देवी, संतपाल सिंह, गुरमीत सिंह, मुन्नू, यशपाल सिंह, सुनीता, मोहित और सरिता भी बंदरों के हमले में घायल हो चुके हैं।
रजबपुर के कालाखेड़ा गांव निवासी गीता शर्मा घर की दूसरी मंजिल पर आंगन में धूप में बैठी थीं। इसी दौरान बंदरों ने हमला कर दिया। उनसे बचने के लिए दौड़ते समय वह छत से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। परिजन उन्हें जोया के निजी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
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इससे पहले आदमपुर थाना क्षेत्र के चकफेरी गांव में किसान बाबूराम की पत्नी चमेली देवी पर बंदरों ने हमला कर दिया था। बंदरों से बचने के प्रयास में छत से गिरने से उनकी भी मौत हो गई थी।
बंदर के काटने पर लापरवाही न करें
सीएमओ डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि बंदर के काटने से हुए घाव को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन उपचार में लापरवाही भी नहीं करनी चाहिए। घाव को साबुन और पानी से केवल कुछ सेकंड नहीं, बल्कि पांच से दस मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद डेटॉल या बीटाडीन जैसे एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि केवल कुत्ते के काटने से ही रैबीज होने की धारणा गलत है। बंदर के काटने से भी रैबीज हो सकता है। इसलिए बंदर के काटने के बाद घाव को तुरंत धोकर चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए और 24 घंटे के भीतर रैबीज का इंजेक्शन लगवाना चाहिए।
बंदर के काटने पर क्या करें, क्या न करें
बंदर के काटने के बाद घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोएं।
घाव को कम से कम 5-10 मिनट तक धोना चाहिए।
इसके बाद डेटॉल या बीटाडीन जैसे एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
घाव को खुला छोड़कर घरेलू उपचार करने के बजाय चिकित्सक से संपर्क करें।
24 घंटे के भीतर रैबीज का इंजेक्शन लगवाएं।
बंदर के काटने से भी रैबीज हो सकता है, इसलिए इसे मामूली चोट समझकर नजरअंदाज न करें।
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रजबपुर थाना क्षेत्र के तासिया गांव में पिछले दिनों बंदरों ने 18 लोगों को काटकर घायल कर दिया था। इनमें अधिकांश महिलाएं थीं। गांव निवासी 55 वर्षीय भगवानदास छत पर गए थे, तभी बंदरों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। कई जगह काटने से वह घायल हो गए। हमले से बचने के दौरान गिरकर भी चोटिल हुए। इससे पहले इंद्र सिंह, जसवीर सिंह, अनामिका, दुर्गेश, जयवती, प्रकाश, लीलावती, भागवती, शकुंतला, विद्या देवी, संतपाल सिंह, गुरमीत सिंह, मुन्नू, यशपाल सिंह, सुनीता, मोहित और सरिता भी बंदरों के हमले में घायल हो चुके हैं।
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रजबपुर के कालाखेड़ा गांव निवासी गीता शर्मा घर की दूसरी मंजिल पर आंगन में धूप में बैठी थीं। इसी दौरान बंदरों ने हमला कर दिया। उनसे बचने के लिए दौड़ते समय वह छत से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। परिजन उन्हें जोया के निजी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
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इससे पहले आदमपुर थाना क्षेत्र के चकफेरी गांव में किसान बाबूराम की पत्नी चमेली देवी पर बंदरों ने हमला कर दिया था। बंदरों से बचने के प्रयास में छत से गिरने से उनकी भी मौत हो गई थी।
बंदर के काटने पर लापरवाही न करें
सीएमओ डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि बंदर के काटने से हुए घाव को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन उपचार में लापरवाही भी नहीं करनी चाहिए। घाव को साबुन और पानी से केवल कुछ सेकंड नहीं, बल्कि पांच से दस मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद डेटॉल या बीटाडीन जैसे एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि केवल कुत्ते के काटने से ही रैबीज होने की धारणा गलत है। बंदर के काटने से भी रैबीज हो सकता है। इसलिए बंदर के काटने के बाद घाव को तुरंत धोकर चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए और 24 घंटे के भीतर रैबीज का इंजेक्शन लगवाना चाहिए।
बंदर के काटने पर क्या करें, क्या न करें
बंदर के काटने के बाद घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोएं।
घाव को कम से कम 5-10 मिनट तक धोना चाहिए।
इसके बाद डेटॉल या बीटाडीन जैसे एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
घाव को खुला छोड़कर घरेलू उपचार करने के बजाय चिकित्सक से संपर्क करें।
24 घंटे के भीतर रैबीज का इंजेक्शन लगवाएं।
बंदर के काटने से भी रैबीज हो सकता है, इसलिए इसे मामूली चोट समझकर नजरअंदाज न करें।