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Amroha News: अपात्रों को जारी किए गए पट्टों के मामले फंसे कई अधिकारी
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अमरोहा। हसनपुर क्षेत्र में फर्जीवाड़ा कर अपात्रों को पट्टों का आवंटन कर दिया गया था। इस संंबंध में एडीएम कोर्ट में चल रहे वाद में निर्णय आने के बाद अधिकारियों एवं कर्मचारियों की गर्दन फंस गई है। मामले में तत्कालीन एसडीएम उद्भव त्रिपाठी एवं तत्कालीन तहसीलदार अर्चना शर्मा के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्रावली प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
हसनपुर तहसील क्षेत्र के गांव खुंगावली निवासी गजराज सिंह ने डीएम काे शिकायती पत्र दिया था। इसमें आरोप लगाया था कि ननिया ग्राम पंचायत खुंगावली निवासी है और प्रधान पद का चुनाव लड़ चुकी है। इसके अलावा कुलदीप, मुरारी व छतर सिंह अपात्र होने के बाद भी उनको पट्टों का आवंटन कर दिया गया। जबकि ओमवती नाम की महिला को भगवानपुर खादर निवासी दर्शाया गया। जबकि वह खुंगावली गांव की है। ओमवती को भी पट्टे का आवंटन कर दिया गया। आरोप था कि पट्टों का आवंटन दो दिसंबर 2019 की बैक डेट में किया गया जबकि आवंटन कंप्यूटर खतौनी पर चार अगस्त 2021 को अपलोड किया गया। इसकी जांच डीएम ने हसनपुर एसडीएम को सौंपी थी। एसडीएम के निर्देश पर नायब तहसीलदार ने मामले की जांच की। इसमें आरोप सही पाए गए। बाद में मामला एडीएम कोर्ट में स्थानांतरित हुआ। जिसमें एडीएम कोर्ट ने तत्कालीन एसडीएम उद्भव त्रिपाठी, तत्कालीन तहसीलदार अर्चना शर्मा के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पत्रावली प्रस्तुत करने के आदेश दिए साथ ही सीडीओ अमरोहा को वर्तमान ग्राम प्रधान भगवानपुर खादर गजराज सिंह के विरुद्ध न्यायालय को गुमराह करने एवं पद के दायित्व का निर्वहन न कर न्यायालय के समक्ष झूठा शपथ पत्र प्रस्तुत करने पर कार्रवाई के लिए पत्र प्रेषित करने को कहा। इसके साथ ही पट्टों का निरस्तीकरण किया गया। साथ ही इसमें लिप्त सभी कर्मियों के विरुद्ध अलग से कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। वहीं, तत्कालीन लेखपाल माधव के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई कर अवगत कराने के आदेश दिए हैं।
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सेवानिवृत्त हो चुके हैं तत्कालीन एसडीएम
अमरोहा। फर्जीवाड़ा कर अपात्रों को जमीन के पट्टों का आवंटन करने में फंसे तत्कालीन एसडीएम उद्भव त्रिपाठी सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि तहसीलदार अर्चना शर्मा प्रमोशन पाकर एसडीएम बन चुकी हैं। वर्तमान में वह जनपद शामली में तैनात हैं। इसके अलावा इस मामले में संलिप्त रहे कानूनगो देशराज की मृत्यु हो चुकी है। आदेश के बाद संलिप्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों में खलबली मची हुई है।
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शिकायत के बाद मुकर गया था प्रधान
मामले की शिकायत करने वाला ग्राम प्रधान गजराज सिंह जांच के बाद पट्टेदारों से हमसाज होकर शिकायत से मुकर गया था। बाद में उसने शिकायत के विपरीत शपथ पत्र व बयान डीएम न्यायालय में दिए थे। कोर्ट ने इसे अवमानना की श्रेणी में मानते हुए प्रधान के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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हसनपुर तहसील क्षेत्र के गांव खुंगावली निवासी गजराज सिंह ने डीएम काे शिकायती पत्र दिया था। इसमें आरोप लगाया था कि ननिया ग्राम पंचायत खुंगावली निवासी है और प्रधान पद का चुनाव लड़ चुकी है। इसके अलावा कुलदीप, मुरारी व छतर सिंह अपात्र होने के बाद भी उनको पट्टों का आवंटन कर दिया गया। जबकि ओमवती नाम की महिला को भगवानपुर खादर निवासी दर्शाया गया। जबकि वह खुंगावली गांव की है। ओमवती को भी पट्टे का आवंटन कर दिया गया। आरोप था कि पट्टों का आवंटन दो दिसंबर 2019 की बैक डेट में किया गया जबकि आवंटन कंप्यूटर खतौनी पर चार अगस्त 2021 को अपलोड किया गया। इसकी जांच डीएम ने हसनपुर एसडीएम को सौंपी थी। एसडीएम के निर्देश पर नायब तहसीलदार ने मामले की जांच की। इसमें आरोप सही पाए गए। बाद में मामला एडीएम कोर्ट में स्थानांतरित हुआ। जिसमें एडीएम कोर्ट ने तत्कालीन एसडीएम उद्भव त्रिपाठी, तत्कालीन तहसीलदार अर्चना शर्मा के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पत्रावली प्रस्तुत करने के आदेश दिए साथ ही सीडीओ अमरोहा को वर्तमान ग्राम प्रधान भगवानपुर खादर गजराज सिंह के विरुद्ध न्यायालय को गुमराह करने एवं पद के दायित्व का निर्वहन न कर न्यायालय के समक्ष झूठा शपथ पत्र प्रस्तुत करने पर कार्रवाई के लिए पत्र प्रेषित करने को कहा। इसके साथ ही पट्टों का निरस्तीकरण किया गया। साथ ही इसमें लिप्त सभी कर्मियों के विरुद्ध अलग से कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। वहीं, तत्कालीन लेखपाल माधव के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई कर अवगत कराने के आदेश दिए हैं।
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सेवानिवृत्त हो चुके हैं तत्कालीन एसडीएम
अमरोहा। फर्जीवाड़ा कर अपात्रों को जमीन के पट्टों का आवंटन करने में फंसे तत्कालीन एसडीएम उद्भव त्रिपाठी सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि तहसीलदार अर्चना शर्मा प्रमोशन पाकर एसडीएम बन चुकी हैं। वर्तमान में वह जनपद शामली में तैनात हैं। इसके अलावा इस मामले में संलिप्त रहे कानूनगो देशराज की मृत्यु हो चुकी है। आदेश के बाद संलिप्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों में खलबली मची हुई है।
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शिकायत के बाद मुकर गया था प्रधान
मामले की शिकायत करने वाला ग्राम प्रधान गजराज सिंह जांच के बाद पट्टेदारों से हमसाज होकर शिकायत से मुकर गया था। बाद में उसने शिकायत के विपरीत शपथ पत्र व बयान डीएम न्यायालय में दिए थे। कोर्ट ने इसे अवमानना की श्रेणी में मानते हुए प्रधान के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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