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Amroha News: घोषणाएं तमाम...जमीन पर उतरने से पहले ही योजनाएं धड़ाम
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अमरोहा। जिले में घोषणाओं और बजट स्वीकृत होने के बावजूद कई विकास परियोजनाएं अधूरी हैं। कैलसा रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज की घोषणा को छह साल से अधिक हो चुके हैं, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हुआ। गजरौला सहकारी चीनी मिल की क्षमता वृद्धि मुख्यमंत्री की घोषणा के आठ साल बाद भी धरातल पर नहीं उतरी।
शहर में जलनिकासी सुधारने के लिए 32 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद कांठ रोड का नाला अधूरा है। हर घर जल योजना के 493 ओवरहेड टैंकों में से केवल 200 बने हैं। नगर पालिका क्षेत्र का विस्तार होने के बाद भी जलभराव और दूषित पेयजल की समस्या बनी है। परिवहन विभाग की बस कार्यशाला का निर्माण भी लंबित है। अधूरे कार्यों से लोगों को जाम, जलभराव, पेयजल संकट समेत कई परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।
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छह साल बाद भी ओवरब्रिज का इंतजार
दिल्ली-मुरादाबाद रेलमार्ग पर कैलसा रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज बनाने की घोषणा के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हो सका है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अक्तूबर 2020 में विधानसभा उपचुनाव के दौरान ओवरब्रिज बनाने का एलान किया था। तत्कालीन विधायक संगीता चौहान की पहल पर प्रदेश सरकार ने सहमति दी और सेतु निगम ने 60.65 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट तैयार किया। प्रस्तावित सेतु की कुल लंबाई 852.50 मीटर और रेलवे पोर्सन की लंबाई 70 मीटर निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। ट्रेनों के गुजरने पर फाटक बंद होने से अमरोहा-मुरादाबाद मार्ग पर जाम लगता है। इससे रोजाना हजारों लोगों को परेशानी होती है।
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आठ साल बाद भी नहीं बढ़ी चीनी मिल की क्षमता
गजरौला की सहकारी चीनी मिल की क्षमता वृद्धि का मामला भी लंबित है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 अप्रैल 2018 को इसकी क्षमता बढ़ाने की घोषणा की थी। करीब 50 साल पुरानी इस मिल में फिलहाल प्रतिदिन 2500 टन गन्ने की पेराई की क्षमता है। किसानों को उम्मीद थी कि क्षमता बढ़ने से गन्ने की पेराई तेज होगी और उन्हें कई-कई दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, आठ साल बाद भी योजना जमीन पर नहीं उतर सकी। मिल के जर्जर पुर्जों के कारण हर पेराई सत्र में दिक्कतें आती हैं। इंटीग्रेटेड शुगर कांप्लेक्स बनाने और रिफाइंड चीनी, एथनॉल व बिजली उत्पादन की योजनाएं भी अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं।
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32 करोड़ खर्च, फिर भी अधूरा नाला
अमरोहा शहर की जलनिकासी सुधारने के लिए कांठ रोड पर पांच किलोमीटर लंबे नाले का निर्माण प्रस्तावित है। इसमें 3.2 किलोमीटर नाला बनाने और उसे ढकने पर करीब 32 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन 1.8 किलोमीटर हिस्सा अधूरा है। अब इसे पूरा करने के लिए 19 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। वहीं, नगर पालिका क्षेत्र के विस्तार के बाद 34 वार्ड बढ़कर 40 हो गए हैं। इसमें 21 ग्राम पंचायतों के 45 गांव शामिल हुए हैं। इसके बावजूद हल्की बारिश में भी जलभराव होता है। पुरानी पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से कई घरों में दूषित पानी पहुंचने की शिकायतें हैं। नगर पालिका ने नई पाइपलाइन और विभिन्न मोहल्लों में नालों के निर्माण की योजना बनाई है।
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493 में से 293 ओवरहेड टैंक अधूरे
हर घर जल योजना के दूसरे और तीसरे चरण में जिले में 493 ओवरहेड टैंकों का निर्माण होना था, लेकिन अब तक केवल 200 टैंक पूरे हो सके हैं। 293 टैंक अधूरे हैं। योजना के तहत तीन कंपनियां 3849 किलोमीटर पाइपलाइन बिछा रही हैं, जिनमें से करीब 3724 किलोमीटर काम पूरा होने का दावा है। सड़कों की खुदाई के बाद मरम्मत नहीं होने या जल्दी उखड़ने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। योजना को पूरा करने का लक्ष्य अब वर्ष 2028 रखा गया है।
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बसों की मरम्मत के लिए कार्यशाला का इंतजार
अमरोहा डिपो में 95 बसें हैं, लेकिन बड़ी तकनीकी खराबी आने पर बसों को मुरादाबाद या दूसरी कार्यशालाओं में भेजना पड़ता है। गजरौला में यूपीएसआईडीसी की छह बीघा जमीन पर नई कार्यशाला बनाई जा रही है। जमीन जुबिलेंट के पास स्थित है और इसे 90 साल की लीज पर लिया गया है। दो मंजिला कार्यशाला के साथ कैंटीन, फायर रूम, पार्किंग और टिन शेड बनाने की योजना है। अब तक 40 से 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
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संबंधित विभागों से विकास कार्यों के संबंध में रिपोर्ट मांगी जा रही है। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई करते हुए जिम्मेदारी तय की जाएगी।
-अश्वनी कुमार मिश्र, सीडीओ
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शहर में जलनिकासी सुधारने के लिए 32 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद कांठ रोड का नाला अधूरा है। हर घर जल योजना के 493 ओवरहेड टैंकों में से केवल 200 बने हैं। नगर पालिका क्षेत्र का विस्तार होने के बाद भी जलभराव और दूषित पेयजल की समस्या बनी है। परिवहन विभाग की बस कार्यशाला का निर्माण भी लंबित है। अधूरे कार्यों से लोगों को जाम, जलभराव, पेयजल संकट समेत कई परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।
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छह साल बाद भी ओवरब्रिज का इंतजार
दिल्ली-मुरादाबाद रेलमार्ग पर कैलसा रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज बनाने की घोषणा के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हो सका है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अक्तूबर 2020 में विधानसभा उपचुनाव के दौरान ओवरब्रिज बनाने का एलान किया था। तत्कालीन विधायक संगीता चौहान की पहल पर प्रदेश सरकार ने सहमति दी और सेतु निगम ने 60.65 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट तैयार किया। प्रस्तावित सेतु की कुल लंबाई 852.50 मीटर और रेलवे पोर्सन की लंबाई 70 मीटर निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। ट्रेनों के गुजरने पर फाटक बंद होने से अमरोहा-मुरादाबाद मार्ग पर जाम लगता है। इससे रोजाना हजारों लोगों को परेशानी होती है।
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आठ साल बाद भी नहीं बढ़ी चीनी मिल की क्षमता
गजरौला की सहकारी चीनी मिल की क्षमता वृद्धि का मामला भी लंबित है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 अप्रैल 2018 को इसकी क्षमता बढ़ाने की घोषणा की थी। करीब 50 साल पुरानी इस मिल में फिलहाल प्रतिदिन 2500 टन गन्ने की पेराई की क्षमता है। किसानों को उम्मीद थी कि क्षमता बढ़ने से गन्ने की पेराई तेज होगी और उन्हें कई-कई दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, आठ साल बाद भी योजना जमीन पर नहीं उतर सकी। मिल के जर्जर पुर्जों के कारण हर पेराई सत्र में दिक्कतें आती हैं। इंटीग्रेटेड शुगर कांप्लेक्स बनाने और रिफाइंड चीनी, एथनॉल व बिजली उत्पादन की योजनाएं भी अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं।
32 करोड़ खर्च, फिर भी अधूरा नाला
अमरोहा शहर की जलनिकासी सुधारने के लिए कांठ रोड पर पांच किलोमीटर लंबे नाले का निर्माण प्रस्तावित है। इसमें 3.2 किलोमीटर नाला बनाने और उसे ढकने पर करीब 32 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन 1.8 किलोमीटर हिस्सा अधूरा है। अब इसे पूरा करने के लिए 19 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। वहीं, नगर पालिका क्षेत्र के विस्तार के बाद 34 वार्ड बढ़कर 40 हो गए हैं। इसमें 21 ग्राम पंचायतों के 45 गांव शामिल हुए हैं। इसके बावजूद हल्की बारिश में भी जलभराव होता है। पुरानी पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से कई घरों में दूषित पानी पहुंचने की शिकायतें हैं। नगर पालिका ने नई पाइपलाइन और विभिन्न मोहल्लों में नालों के निर्माण की योजना बनाई है।
493 में से 293 ओवरहेड टैंक अधूरे
हर घर जल योजना के दूसरे और तीसरे चरण में जिले में 493 ओवरहेड टैंकों का निर्माण होना था, लेकिन अब तक केवल 200 टैंक पूरे हो सके हैं। 293 टैंक अधूरे हैं। योजना के तहत तीन कंपनियां 3849 किलोमीटर पाइपलाइन बिछा रही हैं, जिनमें से करीब 3724 किलोमीटर काम पूरा होने का दावा है। सड़कों की खुदाई के बाद मरम्मत नहीं होने या जल्दी उखड़ने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। योजना को पूरा करने का लक्ष्य अब वर्ष 2028 रखा गया है।
बसों की मरम्मत के लिए कार्यशाला का इंतजार
अमरोहा डिपो में 95 बसें हैं, लेकिन बड़ी तकनीकी खराबी आने पर बसों को मुरादाबाद या दूसरी कार्यशालाओं में भेजना पड़ता है। गजरौला में यूपीएसआईडीसी की छह बीघा जमीन पर नई कार्यशाला बनाई जा रही है। जमीन जुबिलेंट के पास स्थित है और इसे 90 साल की लीज पर लिया गया है। दो मंजिला कार्यशाला के साथ कैंटीन, फायर रूम, पार्किंग और टिन शेड बनाने की योजना है। अब तक 40 से 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
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संबंधित विभागों से विकास कार्यों के संबंध में रिपोर्ट मांगी जा रही है। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई करते हुए जिम्मेदारी तय की जाएगी।
-अश्वनी कुमार मिश्र, सीडीओ