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Amroha News: चार महीने से धूल फांक रहीं ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की मशीनें
Thu, 11 Jan 2024 01:04 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 11 Jan 2024 01:04 AM IST
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अमरोहा। दो साल से जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट तैयार करने की कवायद चल रही है। चार महीने से यूनिट की सभी मशीन धूल फांक रही हैं। लेकिन लाइसेंस नहीं मिलने के कारण मरीज और तीमारदारों की उम्मीद पर पानी फिरा हुआ है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी मरीज और तीमारदार मेरठ-मुरादाबाद की दौड़ लगाने को मजबूर हैं। सेपरेशन यूनिट के लिए दिल्ली से लाइसेंस नहीं मिलने के कारण समस्या बनी हुई है।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में लगीं मशीनों में सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर दिए हैं। ब्लड बैंक कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। ताकि मरीजों को अमरोहा में ही प्लेटलेट्स मिल सके। इसके बाद भी मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। दरअसल जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की क्षमता 300 यूनिट ब्लड रखने की है। औसतन प्रतिदिन 15-20 यूनिट ब्लड की यहां खपत होती है। लोगों की सहूलियत को देखते हुए सरकार ने ब्लड बैंक के पीछे ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट स्थापित करने का फैसला लिया था। शासन से मंजूरी मिलने के बाद पहले बिल्डिंग का निर्माण कार्य भी पूरा हुआ। सभी मशीनें लग चुकी हैं। उम्मीद थी कि इस साल से खून की एक यूनिट से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी (पैक्ड रेड ब्लड सेल) और क्रॉयोप्रेसीपिटेट तैयार किए जा सकेंगे। जिससे एक यूनिट खून से चार अलग-अलग मरीजों की जान बचाई जा सके। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। चार महीने से यूनिट में लगी मशीनें धूल फांक रही हैं। यूनिट की लाइसेंस प्रक्रिया चल रही है। यूनिट के चालू नहीं होने के कारण गंभीर बीमार मरीजों को प्लेटलेट्स नहीं मिल पा रही हैं। तीमारदार मरीजों को लेकर मेरठ- मुरादाबाद और दिल्ली की दौड़ लगाने को मजबूर हो रहे हैं।
यूनिट पूरी तरह तैयार है। फिलहाल लाइसेंस की प्रक्रिया चल ही है। लाइसेंस मिलते ही यूनिट को चालू कर दिया जाएगा। जिसके बाद यहीं पर मरीजों को प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी और क्रॉयोप्रेसीपिटेट मिल सकेंगे। -डॉ. प्रमोद कुमार, प्रभारी, ब्लड बैंक जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में लगीं मशीनों में सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर दिए हैं। ब्लड बैंक कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। ताकि मरीजों को अमरोहा में ही प्लेटलेट्स मिल सके। इसके बाद भी मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। दरअसल जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की क्षमता 300 यूनिट ब्लड रखने की है। औसतन प्रतिदिन 15-20 यूनिट ब्लड की यहां खपत होती है। लोगों की सहूलियत को देखते हुए सरकार ने ब्लड बैंक के पीछे ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट स्थापित करने का फैसला लिया था। शासन से मंजूरी मिलने के बाद पहले बिल्डिंग का निर्माण कार्य भी पूरा हुआ। सभी मशीनें लग चुकी हैं। उम्मीद थी कि इस साल से खून की एक यूनिट से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी (पैक्ड रेड ब्लड सेल) और क्रॉयोप्रेसीपिटेट तैयार किए जा सकेंगे। जिससे एक यूनिट खून से चार अलग-अलग मरीजों की जान बचाई जा सके। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। चार महीने से यूनिट में लगी मशीनें धूल फांक रही हैं। यूनिट की लाइसेंस प्रक्रिया चल रही है। यूनिट के चालू नहीं होने के कारण गंभीर बीमार मरीजों को प्लेटलेट्स नहीं मिल पा रही हैं। तीमारदार मरीजों को लेकर मेरठ- मुरादाबाद और दिल्ली की दौड़ लगाने को मजबूर हो रहे हैं।
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यूनिट पूरी तरह तैयार है। फिलहाल लाइसेंस की प्रक्रिया चल ही है। लाइसेंस मिलते ही यूनिट को चालू कर दिया जाएगा। जिसके बाद यहीं पर मरीजों को प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी और क्रॉयोप्रेसीपिटेट मिल सकेंगे। -डॉ. प्रमोद कुमार, प्रभारी, ब्लड बैंक जिला अस्पताल
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