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फैसला तो हुआ पर बवाल में मिले जख्मों से उबर नहीं पा रहे ग्रामीण
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Thu, 30 Jun 2016 01:41 AM IST
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नौगावां सादात के गांव कलामपुर में उपद्रव के दौरान टूटे दरवाजे को ठीक करते ग्रामीण।
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क्षेत्रीय विधायक के फैसला कराने के बाद कलामपुर गांव में तीसरे दिन शांति रही, लेकिन पुलिस बल तैनात रहा। बवाल में मिले जख्मों से लोग उबर नहीं पाए। टूटे दरवाजे, घरों में बिखरा सामान दहशत की गवाही दे रहे हैं।
उधर, राजनीतिक दलों को गांव में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। लोगों ने रोजमर्रा के कार्यों को अंजाम दिया, मगर जुबां पर जेल गए ग्रामीणों की चर्चा ही रही। धार्मिक स्थल को लेकर नौगावां सादात थाना क्षेत्र के गांव कलामपुर में गत 26 जून की सुबह बवाल हो गया था। इसमें दरोगा समेत कई लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने नौ ग्रामीणों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। दोनों पक्ष की ओर से रिपोर्ट दर्ज की गई थी। था। ग्रामीणों के बुलावे पर मंगलवार को विधायक अशफाक अली खां गांव में पहुंचे थे। दोनों पक्ष से अलग अलग बातचीत की थी।
फैसले पर सहमति बन जाने के बाद उन्होंने उच्चाधिकारियों से मिलकर मुकदमे वापस कराने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया था। बुधवार को तीसरे दिन गांव में माहौल शांत रहा। ग्रामीणों ने शांतिपूर्वक अपने कार्यों को निपटाया, किंतु बवाल का दर्द उनके सीने से अभी नहीं निकला। एहतियातन गांव में पुलिस का पहरा है। एसओ उपेंद्र सिंह यादव ने बताया कि उच्चाधिकारियों के आदेश पर ही बाहरी लोगों को गांव में जाने की अनुमति मिलेगी। असामाजिक तत्वों पर पुलिस बराबर नजर रखे है।
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उधर, राजनीतिक दलों को गांव में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। लोगों ने रोजमर्रा के कार्यों को अंजाम दिया, मगर जुबां पर जेल गए ग्रामीणों की चर्चा ही रही। धार्मिक स्थल को लेकर नौगावां सादात थाना क्षेत्र के गांव कलामपुर में गत 26 जून की सुबह बवाल हो गया था। इसमें दरोगा समेत कई लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने नौ ग्रामीणों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। दोनों पक्ष की ओर से रिपोर्ट दर्ज की गई थी। था। ग्रामीणों के बुलावे पर मंगलवार को विधायक अशफाक अली खां गांव में पहुंचे थे। दोनों पक्ष से अलग अलग बातचीत की थी।
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फैसले पर सहमति बन जाने के बाद उन्होंने उच्चाधिकारियों से मिलकर मुकदमे वापस कराने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया था। बुधवार को तीसरे दिन गांव में माहौल शांत रहा। ग्रामीणों ने शांतिपूर्वक अपने कार्यों को निपटाया, किंतु बवाल का दर्द उनके सीने से अभी नहीं निकला। एहतियातन गांव में पुलिस का पहरा है। एसओ उपेंद्र सिंह यादव ने बताया कि उच्चाधिकारियों के आदेश पर ही बाहरी लोगों को गांव में जाने की अनुमति मिलेगी। असामाजिक तत्वों पर पुलिस बराबर नजर रखे है।
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