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जल जीवन मिशन: अमरोहा में 312 ओवरहेड टैंक अधूरे, टूटी पड़ी सड़कें

Fri, 27 Mar 2026 12:50 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Fri, 27 Mar 2026 12:50 AM IST
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Jal Jeevan Mission: 312 overhead tanks in Amroha are incomplete, roads are broken
अमरोहा। जल जीवन मिशन में प्रदेश स्तर पर लापरवाही पर सख्ती के बावजूद अमरोहा जनपद में योजना की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जहां एक ओर सरकार ने 26 इंजीनियरों पर कार्रवाई करते हुए 12 को निलंबित किया है, वहीं जिले में भी परियोजना को लेकर जिम्मेदारों की उदासीनता साफ नजर आ रही है।
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जिले में दूसरे और तीसरे फेज के तहत गांव-गांव स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से 493 ओवरहेड टैंक बनाए जाने थे, लेकिन अब तक केवल 181 टैंक ही पूरे हो सके हैं, जबकि 312 टैंक अधूरे पड़े हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना अपने अंतिम चरण तक नहीं पहुंच सकी है। योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने का काम भी अधूरा पड़ा है। सड़कों को पाइप डालने के लिए खोद तो दिया गया, लेकिन उनकी समय पर मरम्मत नहीं कराई गई। कई स्थानों पर मरम्मत होने के बाद भी सड़कें दोबारा टूट गईं, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जब गड्ढों और कीचड़ से आवागमन बाधित हो जाता है। जिले में 2024 तक इस योजना को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन कार्यों की धीमी गति और लापरवाही के कारण इसे समय पर पूरा नहीं किया जा सका। अब शासन ने योजना को पूरा करने के लिए दो साल की अतिरिक्त समयावधि दी है और इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। जानकारी के अनुसार जिले में तीन कंपनियों को इस परियोजना की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इन कंपनियों को कुल 3849 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का कार्य दिया गया था, जिसमें से लगभग 3724 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। हालांकि, पाइपलाइन बिछने के बावजूद कई गांवों में जल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें न तो अधूरे कार्यों से निजात मिली और न पानी। गांवों में ओवरहेड टैंक अधूरे पड़े हैं, जबकि कहीं स्थानों पर पाइपलाइन ही नहीं बिछाई गई है। जोया ब्लॉक के गांव बुढनपुर व श्यौनाली में ओवरहैड टेंक अधर में पड़े हैं। जबकि गांवों में पाइप लाइन बिछाने के लिए तोड़ी गई सड़क को ठीक नहीं कराया गया है।
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जल जीवन मिशन के तहत टोकरा पट्टी और सुनपुरा खुर्द गांव में घर-घर पानी पहुंचाने के लिए बनाए गए ओवरहैड टैंक का काम दो साल से पूरा नहीं हो पाया है। इस वजह से ग्रामीण अभी भी स्वच्छ पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। टोकरा पट्टी गांव में करीब दो साल पहले ओवरहैड टैंक का निर्माण शुरू किया गया। सुनपुरा कलां मार्ग किनारे बन रहे टैंक के साथ पाइप लाइन बिछाने का काम भी शुरू हुआ, जिसके लिए गांव की पक्की सड़क तोड़ दी गई। पानी के लिए पंपसेट भी लगाया गया और टैंक की बाउंड्री भी कर दी गई। लेकिन आधे से अधिक निर्माण होने के बाद जल जीवन मिशन के अधिकारी गायब हो गए और काम पर ध्यान नहीं दिया। ग्राम प्रधान रियासत मलिक ने बताया कि सड़क तोड़ने के कारण ग्रामीणों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सुनपुरा खुर्द गांव में भी हालात ऐसे ही हैं। बरसात में गंगा के किनारे बसा यह गांव हैंडपंप का पानी पीने पर बीमार हो जाता है। टैंक बनने के बाद घर-घर कनेक्शन भी दिए गए थे, लेकिन एक महीने ही पानी की आपूर्ति हुई और उसके बाद टैंक से किसी को पानी नहीं मिला। टैंक का सबमर्सिबल पंप भी कई साल से खराब पड़ा है। ग्रामीण नदीम और नूर हसन का कहना है कि यह टैंक सिर्फ सुनपुरा खुर्द ही नहीं, बल्कि पड़ोसी घासीपुरा और शाहपुर उर्फ साहबपुर तक पानी पहुंचाने का सपना था, जो अधूरा रह गया।
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जल जीवन मिशन को लेकर भाकियू असली के जिला प्रवक्ता नरेश कुमार के नेतृत्व में पदाधिकारी और कार्यकर्ता तीन फरवरी को कलक्ट्रेट पहुंचे थे। यहां डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर योजना में बड़े स्तर पर अनियमितता और घोटाले का आरोप लगाया था। किसानों का कहना था कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत एमएमडीके इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को घर-घर जल पहुंचाने का ठेका दिया गया था, लेकिन कंपनी ने अपनी प्रगति रिपोर्ट में गलत आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। किसानों के अनुसार कंपनी ने 2,83,413 घरों में पानी पहुंचाने का दावा किया है, जबकि लक्ष्य 2,97,872 घरों का है। वहीं, कंपनी 90 प्रतिशत कार्य पूरा होने का दावा कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत में केवल करीब 10 प्रतिशत गांवों तक ही पानी पहुंच पाया है। कई गांवों में ओवरहेड टैंक का निर्माण शुरू ही नहीं हुआ, जबकि अधिकांश जगह अधूरे पड़े हैं। साथ ही पाइपलाइन डालने के लिए सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। किसानों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
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