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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Amroha News ›   If business is limited, then you are setting your sails by doing other work.

सिमटा कारोबार तो दूसरे काम करके नैया लगा रहे पार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 07 Aug 2021 01:27 AM IST
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If business is limited, then you are setting your sails by doing other work.
अमरोहा में हैंडलूम पर काम करते कारीगर। - फोटो : JPNAGAR
अमरोहा। चीन से आयातित सस्ते कालीन, मैट आदि उत्पादों ने अमरोहा के हथकरघा उद्योग की कमर तोड़ दी है। इसके अलावा घरेलू बाजार में पांच प्रतिशत टैक्स लागू होने से हथकरघा उद्योग में काफी गिरावट आ गई है। रही सही कसर बिजली की कीमतों ने पूरी कर दी है। कॉमर्शियल बिजली महंगी होने से हैंडलूम के कारखाने बंद होने लगे हैं। घरेलू उत्पाद विदेशी उत्पादों के मुकाबले महंगा पड़ने से देसी उत्पाद के खरीदार भी कम हो गए हैं। फिलहाल अधिकांश बुनकर आजीविका के लिए अब दूसरे काम धंधे में जुट गए हैं और जीवन की नैया को पार करने की जुगत में लगे हैं।
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जिले की पहचान हथकरघा उत्पादों के लिए हुआ करती थी। इससे हजारों परिवार जुड़े हुए थे। यहां के अंगोछा, तौलिया, मैट, बेडशीट, दरी, लिहाफ के खादी के कवर और कारपेट बनाए जाते थे, जिसकी देश के विभिन्न शहरों में बहुत अधिक मांग हुआ करती थी। लेकिन अब धीरे धीरे हैंडलूम बंद होने लगे। हैंडलूम के उत्पादों की देश के विभिन्न शहरों में खूब बिक्री हुआ करती थी। सस्ती कीमत पर चीन के दरी और बेडशीट आने से हैंडलूम उत्पादों के खरीदार कम हो गए। इसके अलावा कुरैशी मोहल्ले की कालीन की बहुत मांग हुआ करती थी लेकिन कलर महंगे होने से अब डाइंग हाउस में रंगाई कराते हैं। इसके चलते पावरलूम की तरफ रुझान बढ़ा है जबकि हैंडलूम पर लागत अधिक आती है। कोऑपरेटिव फैक्टरी से बुनकरों को मिलने वाली छूट भी अब नहीं मिलती है।
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अब शहर में बच गए हैं 40 हैंडलूम
शहर में कुछ साल पहले तब हर तरफ हैंडलूम संचालित होते थे। सर्वाधिक 900 हैंडलूम कुरैशी मोहल्ले में थे इसके अलावा चिल्ला, बटवाल, नल, सराय कोहना, सट्टी, नौगजा, लकड़ा, बसावनगंज, बैरियान, जामा मस्जिद, पचदरा, चकली, बेगम सराय, मजापोता में भी लोग काम करते थे। फिलहाल शहर में 40 कारखाने हैं, जबकि जिले के नौगांवा सादात, नई बस्ती, खेड़ा अपरौला, धनौरा, चुचैला, बछरायूं में कारोबार से लोग जुड़े हैं।
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बुनकर को 328 रुपये बिजली की मासिक सब्सिडी
पंजीकृत बुनकरों को 328 रुपये मासिक सब्सिडी मिलती है, जबकि सालाना 3,936 रुपये है। यह रकम बुनकर के बैंक अकाउंट में आता है। पहले बिजली निगम को आता था, लेकिन बदलाव कर दिया गया है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है। इससे अधिक बिजली खपत पर बुनकर को खुद वहन करना है।
बुनकर नेताओं की यह है प्रमुख मांग
पांच प्रतिशत टैक्स खत्म करे
विदेशों से आयातित माल पर एंटी डंपिंग टैक्स लागू करें
बिजली का बिल फ्लैट रेट को चालू करें,
बुनकर नेता हसन आरिफ अंसारी ने बताया कि पहले 20 से 25 हजार हैंडलूम संचालित थे लेकिन अब यह संख्या शहर में 40 पर सिमट गई है। कॉमर्शियल बिजली बहुत महंगी है। सेमी ऑटोमेटिक लूम में आधे हॉर्स पॉवर की बिजली खपत होती है। बिजली के फ्लैट रेट को बहाल किया जाए।
सरकार ने हथकरघा उत्पादों से ध्यान हटा दी है इसके अलावा वस्तुओं की कीमत बढ़ गई है। धागा बहुत महंगा हो गया है। लागत बढ़ने से हथकरघा के उत्पाद महंगे हो गए हैं। हथकरघा के सामान नहीं बिक रहे हैं। इसके चलते बुनकर अब दूसरे काम करने लगे हैं। अनीश अहमद, हैंडलूम संचालक, धनौरी मीर

घरेलू बाजार में बिक्री पर पांच प्रतिशत टैक्स को खत्म किया जाए। हैंडलूम को प्रोत्साहन के लिए सरकार ठोस रणनीति बनाए। ताकि हथकरघा उद्योग को संरक्षित किया जा सके। पहले जिले से बहुत अधिक निर्यात होता था लेकिन अब लागत अधिक होने से सामान की कीमत महंगा हो गया है। यासिर अंसारी, बुनकर नेता
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