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अब हस्तिनापुर सेंचुरी में शामिल हो सकते हैं 72 गांव, अक्षांश-देशांतर रेखा मिलान में 14 गांव बढ़ें
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अमरोहा। हस्तिनापुर सेंचुरी के लिए प्रस्तावित गांव की संख्या में इजाफा हो सकता है। दरअसल अक्षांश और देशांतर रेखाओं के मिलान कराने पर 14 गांव और शामिल हो गए हैं। जून महीने में 58 गांव की सूची जारी की गई थी, लेकिन राजस्व विभाग ने अक्षांश और देशांतर रेखाओं का मिलान कराया तो 14 गांव और दायरे में आ गए। ऐसे में सब कुछ सही रहा तो सेंचुरी में कुल गांवों की संख्या 72 हो सकती हैं फिलहाल दो महीने तक आपत्ति का मौका है।
गंगा नदी के तटीय क्षेत्र को हस्तिनापुर अभयारण्य (सेंचुरी) घोषित किया गया है। दरअसल पर्यावरण के संरक्षण, संवर्द्धन और विकास करने के मकसद से अनुकूल पाई गई है। जिले में पहले 80 गांव वन अभयारण्य में थे लेकिन गजरौला के आस पास और धनौरा तहसील क्षेत्र के गांवों में औद्योगिक गतिविधियां शुरू हो गईं, इसके चलते इन इलाकों से जीव जंतुओं की संख्या में कमी आने लगी। इसके बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण के फरमान के बाद वन अभ्यारण्य की सीमा को तय करने का फैसला लिया गया। महकमे ने 58 गांव की प्रस्तावित सूची जारी की लेकिन राजस्व विभाग के अक्षांश और देशांतर रेखाओं के मिलान कराने पर 14 गांव और दायरे में आ गए।
डीएफओ देवमणि मिश्र ने बताया कि वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून के वैज्ञानिकों ने हस्तिनापुर सेंचुरी का सर्वे किया था। उन्होंने वन अभयारण्य की सीमा तय की। दरअसल कई जगहों पर औद्योगिक गतिविधियां संचालित हो गई हैं। उन्होंने 58 गांव के बारे में जानकारी दी। इसके बाद राजस्व विभाग ने अक्षांश और देशांतर रेखाओं के आधार पर मिलान किया। इसके चलते 14 गांव और दायरे में आने लगे। एसडीएम धनौरा ने राजस्व विभाग से सर्वे कराया इसमें 14 गांवों के दायरे में आने की रिपोर्ट दी थी।
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ये हैं जिले के 58 गांव
आगापुर खुर्द, अली नगर, वाजिदपुर, बसंतपुर एहतमाली, बसंतपुर मुस्तहकम, वसी एहतमाली, भोजपुरा, विशावली एहतमाली, विशावली मुस्तहकम, चकनवाला मुस्तहकम, चांदरा एहतमाली, चांदरा मुस्तहकम, चुड़ियाला, दारा नगर एहतमाली, दारानगर मुस्तहकम, दयावली मुस्तहकम, धलेण्डा, फरीदपुर एहतमाली, गडावाली एहतमाली,गुलालपुर एहतमाली, गुलालपुर मुस्तहकम, हाशमपुर खादर, ईश्वर देवा, जगदेपुर एहतमाली, जलालपुर उर्फ रायअजदापुर, जयथल एहतमाली, कादराबाद, कांकाठेर, लठौरा एहतमाली, मीरापुर एहतमाली, मोहसनपुर, मुकारमपुर एहतमाली, मुकारमपुर मुस्तहकम, ओसिता एहतमाली, ओसिता मुस्तहकम, पपसरा खादर, रायवानदल्लीपुर, रम्पुरा खादर निकट वाजिदपुर, रम्पुरा खादर एहतमाली, रम्पुरा खादर मुस्तहकम, रुस्तमपुर छात एहतमाली, रसूलपुर भांवर एहतमाली, रसूलपुर भांवर मुस्तहकम, श्यामपुर, सराय कांजी, शाहजहांपुर छात मुस्तहकम, शरीफपुर शुमाली, शेरपुर एहतमाली, सिहालीमेव एहतमाली, सिहालीमेव मुस्तहकम, सरकड़ी खादर, सुनपुरा खुर्द और तिगरी शामिल हैं।
इन 14 गांवों के लिए आपत्ति का मौका
पपसरी खादर, इब्राहिमपुर, आजमपुर, रुस्तमपुर उर्फ रफायतपुर, जयथल मुस्तहकम, शेरपुर मुस्तहकम, खाबड़ी, ढयोटी, अब्दुल्लेपुर, वलीपुर, फिरोजपुर बगद, मुरादपुर, गंगापुरी और मोहरका शामिल है।
कोट्स
वन अभ्यारण्य की सीमा को सुव्यवस्थित किया जाना है। इसके चलते प्रस्तावित 14 और गांवों की सूची प्रकाशित की गई है। दो महीने की अवधि में आपत्ति का मौका है। सेंचुरी की सीमा तय होने के बाद जंगली जीव की सुरक्षा प्राथमिकता में हो जाएगी। देवमणि मिश्र, डीएफओ
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गंगा नदी के तटीय क्षेत्र को हस्तिनापुर अभयारण्य (सेंचुरी) घोषित किया गया है। दरअसल पर्यावरण के संरक्षण, संवर्द्धन और विकास करने के मकसद से अनुकूल पाई गई है। जिले में पहले 80 गांव वन अभयारण्य में थे लेकिन गजरौला के आस पास और धनौरा तहसील क्षेत्र के गांवों में औद्योगिक गतिविधियां शुरू हो गईं, इसके चलते इन इलाकों से जीव जंतुओं की संख्या में कमी आने लगी। इसके बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण के फरमान के बाद वन अभ्यारण्य की सीमा को तय करने का फैसला लिया गया। महकमे ने 58 गांव की प्रस्तावित सूची जारी की लेकिन राजस्व विभाग के अक्षांश और देशांतर रेखाओं के मिलान कराने पर 14 गांव और दायरे में आ गए।
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डीएफओ देवमणि मिश्र ने बताया कि वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून के वैज्ञानिकों ने हस्तिनापुर सेंचुरी का सर्वे किया था। उन्होंने वन अभयारण्य की सीमा तय की। दरअसल कई जगहों पर औद्योगिक गतिविधियां संचालित हो गई हैं। उन्होंने 58 गांव के बारे में जानकारी दी। इसके बाद राजस्व विभाग ने अक्षांश और देशांतर रेखाओं के आधार पर मिलान किया। इसके चलते 14 गांव और दायरे में आने लगे। एसडीएम धनौरा ने राजस्व विभाग से सर्वे कराया इसमें 14 गांवों के दायरे में आने की रिपोर्ट दी थी।
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ये हैं जिले के 58 गांव
आगापुर खुर्द, अली नगर, वाजिदपुर, बसंतपुर एहतमाली, बसंतपुर मुस्तहकम, वसी एहतमाली, भोजपुरा, विशावली एहतमाली, विशावली मुस्तहकम, चकनवाला मुस्तहकम, चांदरा एहतमाली, चांदरा मुस्तहकम, चुड़ियाला, दारा नगर एहतमाली, दारानगर मुस्तहकम, दयावली मुस्तहकम, धलेण्डा, फरीदपुर एहतमाली, गडावाली एहतमाली,गुलालपुर एहतमाली, गुलालपुर मुस्तहकम, हाशमपुर खादर, ईश्वर देवा, जगदेपुर एहतमाली, जलालपुर उर्फ रायअजदापुर, जयथल एहतमाली, कादराबाद, कांकाठेर, लठौरा एहतमाली, मीरापुर एहतमाली, मोहसनपुर, मुकारमपुर एहतमाली, मुकारमपुर मुस्तहकम, ओसिता एहतमाली, ओसिता मुस्तहकम, पपसरा खादर, रायवानदल्लीपुर, रम्पुरा खादर निकट वाजिदपुर, रम्पुरा खादर एहतमाली, रम्पुरा खादर मुस्तहकम, रुस्तमपुर छात एहतमाली, रसूलपुर भांवर एहतमाली, रसूलपुर भांवर मुस्तहकम, श्यामपुर, सराय कांजी, शाहजहांपुर छात मुस्तहकम, शरीफपुर शुमाली, शेरपुर एहतमाली, सिहालीमेव एहतमाली, सिहालीमेव मुस्तहकम, सरकड़ी खादर, सुनपुरा खुर्द और तिगरी शामिल हैं।
इन 14 गांवों के लिए आपत्ति का मौका
पपसरी खादर, इब्राहिमपुर, आजमपुर, रुस्तमपुर उर्फ रफायतपुर, जयथल मुस्तहकम, शेरपुर मुस्तहकम, खाबड़ी, ढयोटी, अब्दुल्लेपुर, वलीपुर, फिरोजपुर बगद, मुरादपुर, गंगापुरी और मोहरका शामिल है।
कोट्स
वन अभ्यारण्य की सीमा को सुव्यवस्थित किया जाना है। इसके चलते प्रस्तावित 14 और गांवों की सूची प्रकाशित की गई है। दो महीने की अवधि में आपत्ति का मौका है। सेंचुरी की सीमा तय होने के बाद जंगली जीव की सुरक्षा प्राथमिकता में हो जाएगी। देवमणि मिश्र, डीएफओ