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Amroha News: अंधाधुंध दोहन से भूजल संकट... तीन ब्लॉक डार्क जोन में
Sun, 28 Jun 2026 02:06 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sun, 28 Jun 2026 02:06 AM IST
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अमरोहा। अंधाधुंध दोहन से जिले में भूजल संकट गहरा गया है। नतीजन अमरोहा के छह में से तीन ब्लॉक मंडी धनौरा, गजरौला और जोया डार्क जोन की श्रेणी में पहुंच चुके हैं। इसमें जोया ब्लॉक की स्थिति और भी खराब है। इसे अतिदोहित में रखा है। जबकि गंगेश्वरी, हसनपुर और अमरोहा ब्लॉक को सेमीक्रिटकल में रखा है।
हाल ही में केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की नेशनल कंपाइलेशन ऑन डायनेमिक ग्राउंड वाटर रिसोर्सेज ऑफ इंडिया-2025 रिपोर्ट में भी अमरोहा को उन आठ जिलों में शामिल किया गया है, जहां भूजल उपयोग के लिहाज से एक भी ब्लॉक सुरक्षित श्रेणी में नहीं बचा है। रिपोर्ट के अनुसार जिले में जितना पानी बारिश के माध्यम से जमीन में रीचार्ज होता है, उससे कहीं अधिक तेजी से भूजल निकाला जा रहा है। यही कारण है कि जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और अधिकांश ब्लॉक अतिदोहित श्रेणी में पहुंच चुके हैं।
प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से हो रही बोरिंग
डार्क जोन घोषित होने के बाद नियमों के अनुसार नए ट्यूबवेल और बोरिंग पर प्रतिबंध है। साथ ही ऐसी सरकारी योजनाएं भी लागू नहीं की जातीं, जिनसे भूजल का अतिरिक्त दोहन हो। इसके बावजूद जिले के शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना रोक-टोक बोरिंग कराई जा रही है। संबंधित विभागों की निगरानी कमजोर होने के कारण नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य बनाने के बावजूद अधिकांश सरकारी और निजी भवनों में इसकी व्यवस्था नहीं है। जल संरक्षण के उपायों की अनदेखी से स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
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किसानों पर बढ़ा सिंचाई का संकट
भूजल संकट का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। जिले में करीब दो लाख किसान खेती पर निर्भर हैं। सिंचाई के लिए लगभग 35 हजार ट्यूबवेल कनेक्शन संचालित हैं। डार्क जोन घोषित होने के बाद नए ट्यूबवेल कनेक्शन जारी नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में जिन किसानों के पास निजी सिंचाई की सुविधा नहीं है, उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह स्थिति आर्थिक संकट का कारण बन रही है।
पेयजल पर भी मंडरा रहा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि भूजल स्तर अत्यधिक नीचे जाने पर पानी की गुणवत्ता भी प्रभावित होने लगती है। ऐसे क्षेत्रों में भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे हानिकारक तत्वों की मात्रा बढ़ने की आशंका रहती है। लंबे समय तक ऐसे पानी का सेवन करने से दांत, हड्डियों, त्वचा तथा अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए भूजल संरक्षण केवल सिंचाई का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।
पहले भी डार्क जोन घोषित हो चुके हैं ब्लॉक
जिले के पांच विकासखंडों को वर्ष 2019-20 में भी गिरते भूजल स्तर के कारण डार्क जोन घोषित किया गया था। उस समय भी सरकार ने भूजल दोहन पर नियंत्रण और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए थे। हालांकि वर्षों बाद भी हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। भूजल दोहन की रफ्तार कम नहीं हुई और जल संचयन की योजनाएं भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सकीं। प्रदेश सरकार विभिन्न विभागों के सहयोग से जल संरक्षण और भूजल रीचार्ज की कार्ययोजना पर काम कर रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आम लोगों की भागीदारी नहीं बढ़ेगी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाबों के संरक्षण तथा वर्षा जल संचयन को अभियान के रूप में लागू नहीं किया जाएगा, तब तक स्थिति में सुधार संभव नहीं है।
ग्रामीण क्षेत्र में बहता सबमर्सिबल का पानी
ग्रामीण क्षेत्र में लोग अभी पानी के महत्व को नहीं समझ पा रहे हैं। घरों में लगे सबमर्सिबल से बेकार में ही पानी बहता रहता है। छोटे-छोटे काम निपटाने के लिए भी सबमर्सिबल चलाना पड़ता है पशुओं को नहलाते समय पानी ऐसे ही बेकार चलता रहता है। इससे कई हजार लीटर पानी बेकार ही नालियों में चला जाता है। इसके प्रति भी लोगों में जागरुकता होनी जरुरी है।
जनपद के धनौरा, गजरौला और जोया ब्लॉक को डार्क जोन में रखा गया है। इन क्षेत्रों में पानी का दोहन नहीं किया जा सकता। इसके अलावा गंगेश्वरी, हसनपुर और अमरोहा ब्लाॅक को सेमीक्रिटिकल की श्रेणी में रखा गया है। लोगों को जागरुक करने के लिए अभियान चलाया जाता है। पानी की बचत के लिए स्वयं भी जागरुक रहने की जरुरत है। विपिन कुमार त्यागी, सहायक अभियंता लघु सिंचाई विभाग
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हाल ही में केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की नेशनल कंपाइलेशन ऑन डायनेमिक ग्राउंड वाटर रिसोर्सेज ऑफ इंडिया-2025 रिपोर्ट में भी अमरोहा को उन आठ जिलों में शामिल किया गया है, जहां भूजल उपयोग के लिहाज से एक भी ब्लॉक सुरक्षित श्रेणी में नहीं बचा है। रिपोर्ट के अनुसार जिले में जितना पानी बारिश के माध्यम से जमीन में रीचार्ज होता है, उससे कहीं अधिक तेजी से भूजल निकाला जा रहा है। यही कारण है कि जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और अधिकांश ब्लॉक अतिदोहित श्रेणी में पहुंच चुके हैं।
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प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से हो रही बोरिंग
डार्क जोन घोषित होने के बाद नियमों के अनुसार नए ट्यूबवेल और बोरिंग पर प्रतिबंध है। साथ ही ऐसी सरकारी योजनाएं भी लागू नहीं की जातीं, जिनसे भूजल का अतिरिक्त दोहन हो। इसके बावजूद जिले के शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना रोक-टोक बोरिंग कराई जा रही है। संबंधित विभागों की निगरानी कमजोर होने के कारण नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य बनाने के बावजूद अधिकांश सरकारी और निजी भवनों में इसकी व्यवस्था नहीं है। जल संरक्षण के उपायों की अनदेखी से स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
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किसानों पर बढ़ा सिंचाई का संकट
भूजल संकट का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। जिले में करीब दो लाख किसान खेती पर निर्भर हैं। सिंचाई के लिए लगभग 35 हजार ट्यूबवेल कनेक्शन संचालित हैं। डार्क जोन घोषित होने के बाद नए ट्यूबवेल कनेक्शन जारी नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में जिन किसानों के पास निजी सिंचाई की सुविधा नहीं है, उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह स्थिति आर्थिक संकट का कारण बन रही है।
पेयजल पर भी मंडरा रहा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि भूजल स्तर अत्यधिक नीचे जाने पर पानी की गुणवत्ता भी प्रभावित होने लगती है। ऐसे क्षेत्रों में भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे हानिकारक तत्वों की मात्रा बढ़ने की आशंका रहती है। लंबे समय तक ऐसे पानी का सेवन करने से दांत, हड्डियों, त्वचा तथा अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए भूजल संरक्षण केवल सिंचाई का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।
पहले भी डार्क जोन घोषित हो चुके हैं ब्लॉक
जिले के पांच विकासखंडों को वर्ष 2019-20 में भी गिरते भूजल स्तर के कारण डार्क जोन घोषित किया गया था। उस समय भी सरकार ने भूजल दोहन पर नियंत्रण और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए थे। हालांकि वर्षों बाद भी हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। भूजल दोहन की रफ्तार कम नहीं हुई और जल संचयन की योजनाएं भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सकीं। प्रदेश सरकार विभिन्न विभागों के सहयोग से जल संरक्षण और भूजल रीचार्ज की कार्ययोजना पर काम कर रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आम लोगों की भागीदारी नहीं बढ़ेगी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाबों के संरक्षण तथा वर्षा जल संचयन को अभियान के रूप में लागू नहीं किया जाएगा, तब तक स्थिति में सुधार संभव नहीं है।
ग्रामीण क्षेत्र में बहता सबमर्सिबल का पानी
ग्रामीण क्षेत्र में लोग अभी पानी के महत्व को नहीं समझ पा रहे हैं। घरों में लगे सबमर्सिबल से बेकार में ही पानी बहता रहता है। छोटे-छोटे काम निपटाने के लिए भी सबमर्सिबल चलाना पड़ता है पशुओं को नहलाते समय पानी ऐसे ही बेकार चलता रहता है। इससे कई हजार लीटर पानी बेकार ही नालियों में चला जाता है। इसके प्रति भी लोगों में जागरुकता होनी जरुरी है।
जनपद के धनौरा, गजरौला और जोया ब्लॉक को डार्क जोन में रखा गया है। इन क्षेत्रों में पानी का दोहन नहीं किया जा सकता। इसके अलावा गंगेश्वरी, हसनपुर और अमरोहा ब्लाॅक को सेमीक्रिटिकल की श्रेणी में रखा गया है। लोगों को जागरुक करने के लिए अभियान चलाया जाता है। पानी की बचत के लिए स्वयं भी जागरुक रहने की जरुरत है। विपिन कुमार त्यागी, सहायक अभियंता लघु सिंचाई विभाग