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Amroha News: गंगा उफान पर, नहरें लबालब... फिर भी खेत सूखे
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अमरोहा। एक तरफ गंगा पूरे शबाब पर है, मध्य गंगा नहर लबालब बह रही है और तटीय इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, वहीं दूसरी ओर जिले के बरसात कम होने के कारण खेत सूखे पड़े हैं। सुनने में यह अटपटा जरूर लगता है, लेकिन कृषि विभाग के आंकड़े यही हकीकत बयां कर रहे हैं। पहाड़ों पर हुई बारिश से गंगा उफान पर है, मगर अमरोहा की धरती पर बादल उम्मीद के मुताबिक नहीं बरसे। नतीजा यह है कि अगस्त के 22 दिन बीतने के बावजूद जिले में केवल 17 एमएम बारिश दर्ज की गई है।
जिला विभाग के अनुसार अगस्त का महीना खरीफ फसलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान कम से कम 200 एमएम बारिश फसलों की बेहतर बढ़वार के लिए जरूरी होती है, लेकिन इस बार बारिश का आंकड़ा उम्मीदों से कोसों दूर है। हालात यह हैं कि खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए किसानों को ट्यूबवेल और नलकूपों का सहारा लेना पड़ रहा है। यदि जिले में सिंचाई के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं होते तो धान, गन्ना और अन्य खरीफ फसलों पर संकट के बादल मंडरा सकते थे।
बारिश की बेरुखी सिर्फ अगस्त तक सीमित नहीं है। जुलाई में भी मौसम ने किसानों को निराश किया। जहां करीब 200 एमएम बारिश की आवश्यकता थी, वहां केवल 174 एमएम पानी ही बरसा। लगातार दो महीनों से कम बारिश का सिलसिला चिंता बढ़ा रहा है। गंगा का बढ़ता जलस्तर और सूखे खेत इस बार के मानसून की सबसे बड़ी विडंबना बन गए हैं। एक ओर नदी का रौद्र रूप लोगों की चिंता बढ़ा रहा है, तो दूसरी ओर खेतों की प्यास बता रही है कि जिले को अब भी अच्छी बारिश का इंतजार है। हालांकि अभी तक फसलों पर कोई बड़ा प्रतिकूल असर सामने नहीं आया है।
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छह साल में सिर्फ एक बार अगस्त में हुई मानक के अनुरूप बारिश
पिछले पांच वर्षों के बारिश के आंकड़ों की बात करते तो वर्ष 2025 में अगस्त के दौरान 223 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई थी, जो मानक के अनुरूप रही। इसके बाद वर्ष 2024 में अगस्त में 99.37 एमएम, 2023 में 137.25 एमएम और 2022 में महज 53 एमएम बारिश हुई थी। वर्ष 2021 में 122.50 एमएम और 2020 में 177.20 एमएम बारिश दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक छह वर्षों में केवल वर्ष 2025 में ही अगस्त के दौरान बारिश मानक के आसपास रही, जबकि बाकी वर्षों में बारिश अपेक्षाकृत कम रही। इससे स्पष्ट है कि जिले में मानसून के दौरान बारिश का वितरण और मात्रा दोनों ही असमान रहे हैं।
जिले में बरसात जरूर कम हुई है, लेकिन सिंचाई के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। किसानों ने समय पर सिंचाई कर फसलों की जरूरत पूरी की है। इसलिए कम बारिश के बावजूद फिलहाल फसलों को नुकसान की स्थिति नहीं बनी है।-
मनोज कुमार, जिला कृषि अधिकारी
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जिला विभाग के अनुसार अगस्त का महीना खरीफ फसलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान कम से कम 200 एमएम बारिश फसलों की बेहतर बढ़वार के लिए जरूरी होती है, लेकिन इस बार बारिश का आंकड़ा उम्मीदों से कोसों दूर है। हालात यह हैं कि खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए किसानों को ट्यूबवेल और नलकूपों का सहारा लेना पड़ रहा है। यदि जिले में सिंचाई के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं होते तो धान, गन्ना और अन्य खरीफ फसलों पर संकट के बादल मंडरा सकते थे।
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बारिश की बेरुखी सिर्फ अगस्त तक सीमित नहीं है। जुलाई में भी मौसम ने किसानों को निराश किया। जहां करीब 200 एमएम बारिश की आवश्यकता थी, वहां केवल 174 एमएम पानी ही बरसा। लगातार दो महीनों से कम बारिश का सिलसिला चिंता बढ़ा रहा है। गंगा का बढ़ता जलस्तर और सूखे खेत इस बार के मानसून की सबसे बड़ी विडंबना बन गए हैं। एक ओर नदी का रौद्र रूप लोगों की चिंता बढ़ा रहा है, तो दूसरी ओर खेतों की प्यास बता रही है कि जिले को अब भी अच्छी बारिश का इंतजार है। हालांकि अभी तक फसलों पर कोई बड़ा प्रतिकूल असर सामने नहीं आया है।
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छह साल में सिर्फ एक बार अगस्त में हुई मानक के अनुरूप बारिश
पिछले पांच वर्षों के बारिश के आंकड़ों की बात करते तो वर्ष 2025 में अगस्त के दौरान 223 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई थी, जो मानक के अनुरूप रही। इसके बाद वर्ष 2024 में अगस्त में 99.37 एमएम, 2023 में 137.25 एमएम और 2022 में महज 53 एमएम बारिश हुई थी। वर्ष 2021 में 122.50 एमएम और 2020 में 177.20 एमएम बारिश दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक छह वर्षों में केवल वर्ष 2025 में ही अगस्त के दौरान बारिश मानक के आसपास रही, जबकि बाकी वर्षों में बारिश अपेक्षाकृत कम रही। इससे स्पष्ट है कि जिले में मानसून के दौरान बारिश का वितरण और मात्रा दोनों ही असमान रहे हैं।
जिले में बरसात जरूर कम हुई है, लेकिन सिंचाई के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। किसानों ने समय पर सिंचाई कर फसलों की जरूरत पूरी की है। इसलिए कम बारिश के बावजूद फिलहाल फसलों को नुकसान की स्थिति नहीं बनी है।-
मनोज कुमार, जिला कृषि अधिकारी