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गंगा में आकर्षण का केंद्र बने हैं साइबेरियन पक्षी
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गजरौला (अमरोहा)। तिगरी और ब्रजघाट के बीच गुजर रही गंगा साइबेरियन पक्षियों की अठखेलियों का केंद्र बनी हुई है। विदेशों में हिमपात और मौसम में आए परिवर्तन के कारण ये विदेशी मेहमान यहां प्रजनन करने के लिए आते हैं। ब्रजघाट में गंगा में इन रंग-बिरंगे पक्षियों को देखने के लिए लोगों का तांता लगा रहता है। वहीं, दूर तक फैली गंगा में ये विदेशी मेहमान स्वतंत्र वातावरण में समय बिताते हैं।
2073 वर्ग किलोमीटर में फैले हस्तिनापुर वन्यजीव विहार सेंचुरी क्षेत्र में गुजर रही गंगा विदेशी मेहमान यानी साइबर पक्षियों की मेजबानी करती है। यहां साइबेरियन पक्षियों के साथ ही बड़े फर वाली चिड़िया, बत्तख, छोटे तथा लंबी गर्दन वाले सारस और विभिन्न प्रजातियों की रंग-बिरंगी चिड़ियां गंगा में अठखेलियां करने और प्रजनन करने आती हैं। नवंबर से फरवरी तक हजारों पक्षियों की मधुर ध्वनि और उनकी मौजूदगी से गंगा का क्षेत्र गुलजार रहता है हालांकि इस बार वातावरण में बढ़ते प्रदूषण, पुराली जलाने से छाई धुंध और मौसम में आए बदलाव के कारण इनकी संख्या में कुछ कमी आई है लेकिन इन्होंने यहां गंगा की गोद में आना नहीं छोड़ा है। ब्लॉक के गांव तिगरी से ब्रजघाट के बीच गुजर रही गंगा प्रत्येक वर्ष दिसंबर माह में विदेशी मेहमानों की एशगाह में तब्दील हो जाती है। देश-विदेश से आने वाले साइबर पक्षी और अन्य परिंदे यहां गंगा के स्वच्छंद वातावरण में अठखेलियां और प्रजनन करते हैं। इन विदेशी मेहमानों की एक झलक पाने के लिए लोग बेताब रहते हैं और दूर-दराज से अलौकिक नजारों को कैमरों एवं मोबाइल में कैद करने के लिए ब्रजघाट और तिगरी आते हैं। बताते हैं कि 15 नवंबर से फरवरी माह के अंत तक ये विदेशी मेहमान इस क्षेत्र में सैरसपाटा करते हैं और फिर लौट जाते हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश की इस सबसे बड़ी सेंचुरी में मेरठ, मुजफ्फरनगर, हापुड़, बिजनौर और अमरोहा जनपद के क्षेत्र आते हैं। पीपुल फोर एनिमल की प्रदेश रेडिंग टीम के प्रभारी डॉ. रविंद्र शुक्ल एडवोकेट ने बताया कि 1986 में घोषित इस सेंचुरी क्षेत्र में 1972 अधिनियम एवं 1923 वन अधिनियम का कानून चलता है। इस क्षेत्र में हिरन, पाड़ा, सांभर, बंदर, वनरोज (नीलगाय), जंगली सुअर, चौसिंघा आदि जानवर भी पाए जाते हैं।
शिकारियों से बचाने को करने होंगे इंतजाम
गजरौला। ब्रजघाट और तिगरी के गंगा क्षेत्र में आने वाले विदेशी मेहमान परिंदों की आमद के साथ ही यहां शिकारी भी सक्रिय हो जाते हैं। बताते हैं कि गंगा किनारे स्थित गांव मुकारमपुर, रसूलपुर, विशावली, सुजमना, गढ़गंगा, लठीरा, तिगरी में शिकारी यहां आने वाले विदेशी मेहमानों का शिकार करते हैं। मुरादाबाद में गलशहीद और मेरठ में लालकुर्ती इलाके में इन बेजुबान परिंदों को मनमानी कीमतों में बेचा जाता है। ऐसे में पुलिस-प्रशासन को चाहिए कि इन क्षेत्रों में शिकारियों पर नजर रखने के लिए विशेष चौकियां स्थापित करे। साथ ही गंगा में गश्त के लिए इलेक्ट्रानिक बोट की व्यवस्था भी कराए।
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गंगा में साइबेरियन पक्षियों की सुरक्षा और उनके स्वच्छंद विचरण में कोई बाधा नहीं आएगी। वन विभाग को शिकारियों पर पैनी नजर रखने परिंदों की सुरक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
- उमेश मिश्र, जिलाधिकारी
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2073 वर्ग किलोमीटर में फैले हस्तिनापुर वन्यजीव विहार सेंचुरी क्षेत्र में गुजर रही गंगा विदेशी मेहमान यानी साइबर पक्षियों की मेजबानी करती है। यहां साइबेरियन पक्षियों के साथ ही बड़े फर वाली चिड़िया, बत्तख, छोटे तथा लंबी गर्दन वाले सारस और विभिन्न प्रजातियों की रंग-बिरंगी चिड़ियां गंगा में अठखेलियां करने और प्रजनन करने आती हैं। नवंबर से फरवरी तक हजारों पक्षियों की मधुर ध्वनि और उनकी मौजूदगी से गंगा का क्षेत्र गुलजार रहता है हालांकि इस बार वातावरण में बढ़ते प्रदूषण, पुराली जलाने से छाई धुंध और मौसम में आए बदलाव के कारण इनकी संख्या में कुछ कमी आई है लेकिन इन्होंने यहां गंगा की गोद में आना नहीं छोड़ा है। ब्लॉक के गांव तिगरी से ब्रजघाट के बीच गुजर रही गंगा प्रत्येक वर्ष दिसंबर माह में विदेशी मेहमानों की एशगाह में तब्दील हो जाती है। देश-विदेश से आने वाले साइबर पक्षी और अन्य परिंदे यहां गंगा के स्वच्छंद वातावरण में अठखेलियां और प्रजनन करते हैं। इन विदेशी मेहमानों की एक झलक पाने के लिए लोग बेताब रहते हैं और दूर-दराज से अलौकिक नजारों को कैमरों एवं मोबाइल में कैद करने के लिए ब्रजघाट और तिगरी आते हैं। बताते हैं कि 15 नवंबर से फरवरी माह के अंत तक ये विदेशी मेहमान इस क्षेत्र में सैरसपाटा करते हैं और फिर लौट जाते हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश की इस सबसे बड़ी सेंचुरी में मेरठ, मुजफ्फरनगर, हापुड़, बिजनौर और अमरोहा जनपद के क्षेत्र आते हैं। पीपुल फोर एनिमल की प्रदेश रेडिंग टीम के प्रभारी डॉ. रविंद्र शुक्ल एडवोकेट ने बताया कि 1986 में घोषित इस सेंचुरी क्षेत्र में 1972 अधिनियम एवं 1923 वन अधिनियम का कानून चलता है। इस क्षेत्र में हिरन, पाड़ा, सांभर, बंदर, वनरोज (नीलगाय), जंगली सुअर, चौसिंघा आदि जानवर भी पाए जाते हैं।
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शिकारियों से बचाने को करने होंगे इंतजाम
गजरौला। ब्रजघाट और तिगरी के गंगा क्षेत्र में आने वाले विदेशी मेहमान परिंदों की आमद के साथ ही यहां शिकारी भी सक्रिय हो जाते हैं। बताते हैं कि गंगा किनारे स्थित गांव मुकारमपुर, रसूलपुर, विशावली, सुजमना, गढ़गंगा, लठीरा, तिगरी में शिकारी यहां आने वाले विदेशी मेहमानों का शिकार करते हैं। मुरादाबाद में गलशहीद और मेरठ में लालकुर्ती इलाके में इन बेजुबान परिंदों को मनमानी कीमतों में बेचा जाता है। ऐसे में पुलिस-प्रशासन को चाहिए कि इन क्षेत्रों में शिकारियों पर नजर रखने के लिए विशेष चौकियां स्थापित करे। साथ ही गंगा में गश्त के लिए इलेक्ट्रानिक बोट की व्यवस्था भी कराए।
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गंगा में साइबेरियन पक्षियों की सुरक्षा और उनके स्वच्छंद विचरण में कोई बाधा नहीं आएगी। वन विभाग को शिकारियों पर पैनी नजर रखने परिंदों की सुरक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
- उमेश मिश्र, जिलाधिकारी