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फर्जी डिमांड ड्राफ्ट से बैंक से निकाले एक करोड़
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गजरौला (अमरोहा)। नोएडा स्थित एक निजी बैंक की शाखा में फर्जी डिमांड ड्राफ्ट पेश करके एक करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। इसका आरोपी गजरौला क्षेत्र का निवासी होने की जानकारी लेकर बैंक प्रबंधन की टीम मंगलवार को यहां पहुंची और थाना प्रभारी को सारा वाकया बताकर आरोपी की तलाश में मदद मांगी। हालांकि स्थानीय स्तर पर न कोई एफआईआर कराई गई, न ही लिखित शिकायत दी गई।
नोएडा से आए निजी बैंक के अधिकारियों का कहना था कि एक सप्ताह पूर्व गजरौला निवासी एक शख्स ने स्टेट बैंक नोएडा की शाखा का अपने नाम से तैयार फर्जी डिमांड ड्राफ्ट निजी बैंक की नोएडा शाखा में पेश किया। ड्राफ्ट एक करोड़ रुपये की राशि का था। ड्राफ्ट कैश कराते समय दलील दी कि जोया में हाईवे किनारे हॉस्पीटल बनवा रहा है। बैंक ने भुगतान से पहले क्रॉसचेकिंग के लिए इस ड्राफ्ट की जानकारी मेल से स्टेट बैंक की शाखा को भेजी। काफी समय बाद भी वहां से कोई आपत्ति या जवाब नहीं आने पर ड्राफ्ट को सही मानकर एक करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। बाद में स्पष्ट हुआ कि ड्राफ्ट फर्जी था। बैंक की टीम में शामिल लोगों का दावा है कि ठगी का पता चलने पर आरोपी तक पहुंच गए थे। दबाव बनाने पर उसने 15 लाख रुपये जमा भी करा दिए थे। शेष रकम की रिकवरी के वादे के बाद वह हाछ नहीं आया। उसकी तलाश में बैंक की एक टीम नोएडा, दूसरी हरिद्वार और तीसरी मुरादाबाद-गजरौला में है। बैंक टीम के सदस्यों का कहना था कि गजरौला में पता चला कि आरोपी ने अपना मकान बेच दिया है और किराए पर रहने लगा। किराए के मकान पर उसकी पत्नी मिली, जिसने उन्हें खरी-खोटी सुनाकर पति के बारे में जानकारी देने से इन्कार कर दिया।
इंस्पेक्टर आरपी शर्मा ने इस मामले की एफआईआर के बाबत पूछा तो बैंक प्रबंधन के लोगों ने नोएडा में दर्ज होने की बात कही लेकिन कोई प्रति नहीं दी। स्थानीय स्तर पर भी कोई शिकायत नहीं दी। इंस्पेक्टर ने बैंकर्स को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
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इस बाबत पूछने पर इंस्पेक्टर ने कहा कि बाद में कोई बैंक अधिकारी उन तक नहीं पहुंचा, न ही कोई शिकायत दर्ज कराई। नोएडा पुलिस से कोई सूचना मिली तो उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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नोएडा से आए निजी बैंक के अधिकारियों का कहना था कि एक सप्ताह पूर्व गजरौला निवासी एक शख्स ने स्टेट बैंक नोएडा की शाखा का अपने नाम से तैयार फर्जी डिमांड ड्राफ्ट निजी बैंक की नोएडा शाखा में पेश किया। ड्राफ्ट एक करोड़ रुपये की राशि का था। ड्राफ्ट कैश कराते समय दलील दी कि जोया में हाईवे किनारे हॉस्पीटल बनवा रहा है। बैंक ने भुगतान से पहले क्रॉसचेकिंग के लिए इस ड्राफ्ट की जानकारी मेल से स्टेट बैंक की शाखा को भेजी। काफी समय बाद भी वहां से कोई आपत्ति या जवाब नहीं आने पर ड्राफ्ट को सही मानकर एक करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। बाद में स्पष्ट हुआ कि ड्राफ्ट फर्जी था। बैंक की टीम में शामिल लोगों का दावा है कि ठगी का पता चलने पर आरोपी तक पहुंच गए थे। दबाव बनाने पर उसने 15 लाख रुपये जमा भी करा दिए थे। शेष रकम की रिकवरी के वादे के बाद वह हाछ नहीं आया। उसकी तलाश में बैंक की एक टीम नोएडा, दूसरी हरिद्वार और तीसरी मुरादाबाद-गजरौला में है। बैंक टीम के सदस्यों का कहना था कि गजरौला में पता चला कि आरोपी ने अपना मकान बेच दिया है और किराए पर रहने लगा। किराए के मकान पर उसकी पत्नी मिली, जिसने उन्हें खरी-खोटी सुनाकर पति के बारे में जानकारी देने से इन्कार कर दिया।
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इंस्पेक्टर आरपी शर्मा ने इस मामले की एफआईआर के बाबत पूछा तो बैंक प्रबंधन के लोगों ने नोएडा में दर्ज होने की बात कही लेकिन कोई प्रति नहीं दी। स्थानीय स्तर पर भी कोई शिकायत नहीं दी। इंस्पेक्टर ने बैंकर्स को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
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इस बाबत पूछने पर इंस्पेक्टर ने कहा कि बाद में कोई बैंक अधिकारी उन तक नहीं पहुंचा, न ही कोई शिकायत दर्ज कराई। नोएडा पुलिस से कोई सूचना मिली तो उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।