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Amroha News: जीत को छोड़िए, मुकाबले से भी बसपा प्रत्याशी रहे दूर
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अमरोहा। बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी डॉ. चौधरी मुजाहिद हुसैन जीतना तो दूर मुकाबले में भी नहीं आ सके। पहले ही राउंड से उन्हें का सामना करना पड़ा। जीतने वाले भाजपा प्रत्याशी कंवर सिंह तंवर से मुकाबला तो छोड़ो दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर दानिश अली से टक्कर में भी शामिल नहीं हो सके।
बता दें कि वर्ष 2019 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी दानिश अली ने लोकसभा क्षेत्र में बीस साल के सूखे को खत्म किया था। लेकिन, 2024 के चुनाव में भी 2014 की तरह बसपा प्रत्याशी को तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा है। अमराेहा लोकसभा सीट पर बसपा ने वर्ष 1999 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी के रूप में राशिद अल्वी ने जीत दर्ज की थी। उन्हें 337919 वोट मिले थे। उन्होंने भाजपा के चेतन चौहान को हराया था। चेतन चौहान को 244694 वोट मिले थे। इसके बाद बसपा के लिए सूखा चल रहा था। अमरोहा लोकसभा सीट पर बसपा का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा। एक चुनाव छोड़कर हर बार पार्टी को यहां हार का सामना करना पड़ा है। निराशाजनक प्रदर्शन के बीच बसपा जीत के लिए तरसती रही।
लेकिन वर्ष 1999 के चुनाव में पार्टी को जीत नसीब हुई। जनता ने बसपा प्रत्याशी राशिद अल्वी को चुनकर संसद में भेजा था। मगर इसके बाद हुए चार चुनावों में पार्टी को जीत नहीं मिली। बीस साल से पार्टी लगातार हार रही थी, लेकिन वर्ष 2019 के चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन ने कुंवर दानिश अली को मैदान में भेजा था। कुंवर दानिश अली ने बसपा के सिंबल पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की थी। कुंवर दानिश अली की इस जीत से बसपा का बीस साल का सूख खत्म हो गया था। लेकिन, इस बार भी बसपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें केवल 164099 वोट मिले हैं।
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बता दें कि वर्ष 2019 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी दानिश अली ने लोकसभा क्षेत्र में बीस साल के सूखे को खत्म किया था। लेकिन, 2024 के चुनाव में भी 2014 की तरह बसपा प्रत्याशी को तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा है। अमराेहा लोकसभा सीट पर बसपा ने वर्ष 1999 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी के रूप में राशिद अल्वी ने जीत दर्ज की थी। उन्हें 337919 वोट मिले थे। उन्होंने भाजपा के चेतन चौहान को हराया था। चेतन चौहान को 244694 वोट मिले थे। इसके बाद बसपा के लिए सूखा चल रहा था। अमरोहा लोकसभा सीट पर बसपा का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा। एक चुनाव छोड़कर हर बार पार्टी को यहां हार का सामना करना पड़ा है। निराशाजनक प्रदर्शन के बीच बसपा जीत के लिए तरसती रही।
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लेकिन वर्ष 1999 के चुनाव में पार्टी को जीत नसीब हुई। जनता ने बसपा प्रत्याशी राशिद अल्वी को चुनकर संसद में भेजा था। मगर इसके बाद हुए चार चुनावों में पार्टी को जीत नहीं मिली। बीस साल से पार्टी लगातार हार रही थी, लेकिन वर्ष 2019 के चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन ने कुंवर दानिश अली को मैदान में भेजा था। कुंवर दानिश अली ने बसपा के सिंबल पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की थी। कुंवर दानिश अली की इस जीत से बसपा का बीस साल का सूख खत्म हो गया था। लेकिन, इस बार भी बसपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें केवल 164099 वोट मिले हैं।
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