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खादर के 19 गांव बाढ़ के मुहाने पर, अभी नहीं बनाए गए आश्रय स्थल
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गजरौला। बारिश का सीजन शुरू हो चुका है। गंगा और रामगंगा पोषक नहर उफान पर हैं। पानी ओवरफ्लो होकर खादर में गंगा और रामगंगा पोषक नहर के किनारों पर स्थित गांवों के खेतों तक जा पहुंचा है। खादर के 19 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडारा रहा है। वहीं प्रशासन उदासीन है। अभी तक इन गांवों के लोगों के लिए आश्रय स्थलों की व्यवस्था नहीं की गई है। बीते वर्ष बाढ़ पानी गांवों तक पहुंचने पर कई गांवों के ग्रामीणों ने पलायन किया था।
गंगा में हालांकि अभी बाढ़ नहीं आई है। लेकिन, रोजाना ही बिजनौर बैराज से छोड़े जाने वाले हजारों क्यूसेक पानी के कारण गंगा उफान पर है। रामगंगा का पानी भी काफी बढ़ा हुआ है और वह भी तेजी से कटान कर रही है। बाढ़ का पानी रामगंगा से सटे गांव शीशोवाली, जाटोवाली, टीकोवाली, दारानगर में खेतों में भरा हुआ है। ग्रामीणों की फसलें डूबी हुई हैं। ग्रामीण बाढ़ को लेकर आशंकित हैं। उन्हें चिंता सताए जा रही है कि कहीं इस बार भी बाढ़ उन पर कहर न बरपा दे। खास बात यह है कि बीते वर्ष बाढ़ का पानी इन गांवों में भर जाने के बाद दहशतजदा ग्रामीणों ने अपने पालतू पशुओं के संग पलायन करना शुरू कर दिया था। इस पर चेते प्रशासन ने आनन-फानन में गांव चकनवाला और पतेईएमन के स्कूलों में इनके लिए बाढ़ विस्थापित केंद्र (अस्थाई आश्रय स्थल) बनवाए थे। गांव वालों का कहना है कि यदि पहले ही प्रशासन उनके लिए कोई ठोस इंतजाम कर दे तो इस बार गांवों से पलायन रोका जा सकता है। यदि पलायन के बाद कोई व्यवस्था की गई तो उसे औपचारिक ही माना जाएगा।
यह 19 गांव घिर जाते हैं हर बार बाढ़ के पानी में
शीशोवाली, टीकोवाली, जाटोवाली, दारानगर, अलीनगर, मंदिर वाली भुड्डी, पछैल भुड्डी, जाटोवाली, ढाकोवाली, सुल्तानपुर, रम्पुरा, दियावली, घेर, लंगड़ेवाली, देववाली, विशावली, मन्नोवाली, कुएंवाली, मीरापुर।
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दारानगर में तटबंध बनाने को लिखा पत्र
गजरौला। एसडीएम विवेक यादव ने बताया कि खादर के गांव दारानगर में रामगंगा पोषक नहर के टूटे नाले का पानी गांव में भरने की शिकायत पर वहां राजस्व विभाग की टीम को भेजा गया था। वहां तटबंध बनाने के लिए संबंधित विभाग को भी पत्र लिखा गया है ताकि बाढ़ का पानी गांव में नहीं घुस सके और ग्रामीण सुरक्षित रहें।
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गंगा में हालांकि अभी बाढ़ नहीं आई है। लेकिन, रोजाना ही बिजनौर बैराज से छोड़े जाने वाले हजारों क्यूसेक पानी के कारण गंगा उफान पर है। रामगंगा का पानी भी काफी बढ़ा हुआ है और वह भी तेजी से कटान कर रही है। बाढ़ का पानी रामगंगा से सटे गांव शीशोवाली, जाटोवाली, टीकोवाली, दारानगर में खेतों में भरा हुआ है। ग्रामीणों की फसलें डूबी हुई हैं। ग्रामीण बाढ़ को लेकर आशंकित हैं। उन्हें चिंता सताए जा रही है कि कहीं इस बार भी बाढ़ उन पर कहर न बरपा दे। खास बात यह है कि बीते वर्ष बाढ़ का पानी इन गांवों में भर जाने के बाद दहशतजदा ग्रामीणों ने अपने पालतू पशुओं के संग पलायन करना शुरू कर दिया था। इस पर चेते प्रशासन ने आनन-फानन में गांव चकनवाला और पतेईएमन के स्कूलों में इनके लिए बाढ़ विस्थापित केंद्र (अस्थाई आश्रय स्थल) बनवाए थे। गांव वालों का कहना है कि यदि पहले ही प्रशासन उनके लिए कोई ठोस इंतजाम कर दे तो इस बार गांवों से पलायन रोका जा सकता है। यदि पलायन के बाद कोई व्यवस्था की गई तो उसे औपचारिक ही माना जाएगा।
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यह 19 गांव घिर जाते हैं हर बार बाढ़ के पानी में
शीशोवाली, टीकोवाली, जाटोवाली, दारानगर, अलीनगर, मंदिर वाली भुड्डी, पछैल भुड्डी, जाटोवाली, ढाकोवाली, सुल्तानपुर, रम्पुरा, दियावली, घेर, लंगड़ेवाली, देववाली, विशावली, मन्नोवाली, कुएंवाली, मीरापुर।
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दारानगर में तटबंध बनाने को लिखा पत्र
गजरौला। एसडीएम विवेक यादव ने बताया कि खादर के गांव दारानगर में रामगंगा पोषक नहर के टूटे नाले का पानी गांव में भरने की शिकायत पर वहां राजस्व विभाग की टीम को भेजा गया था। वहां तटबंध बनाने के लिए संबंधित विभाग को भी पत्र लिखा गया है ताकि बाढ़ का पानी गांव में नहीं घुस सके और ग्रामीण सुरक्षित रहें।