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Amroha News: पांच हजार जननियों को सुरक्षा राशि का इंतजार
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अमरोहा। जिले के सरकारी अस्पतालों में प्रसव करने वाली महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नौ महीने से पांच हजार से ज्यादा महिलाओं की सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी हुई हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाली जननी सुरक्षा योजना की राशि नहीं मिल सकी है। जिम्मेदार भी इसको लेकर गंभीर नहीं है। वहीं, महिलाओं के परिजन रोजाना सीएचसी के चक्कर काट रहे हैं। उन्हें सिर्फ जल्द भुगतान का आश्वासन दिया जा रहा है।
इतना ही नहीं प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर होने वाले गर्भवती महिलाओं की जांच का पैसा भी अटका हुआ है।
जननी सुरक्षा योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाली प्रोत्साहन धनराशि प्रसव के बाद पोषण, दवाओं और आवश्यक जरूरतों के लिए दी जाती है। इस लाभ को लेने के लिए गर्भवतियों को प्रसव सरकारी या मान्यता प्राप्त अस्पताल में कराना होता है। इसका उद्देश्य मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने वाली महिलाओं को 1400 रुपये और शहरी में 1000 रुपये की नकद सहायता मिलती है। इससे वह प्रसव के बाद अपने स्वास्थ्य पर खर्च कर सकती हैं।
योजना के तहत प्रसव के बाद 48 घंटे में महिला के खाते में धनराशि का भुगतान करना होता है लेकिन जिला के सरकारी अस्पतालों से प्रसव कराने वाली हजार से ज्यादा महिलाओं को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया। आंकड़ों की बात करते तो नौ महीने में जिला अस्पताल में दो हजार, नौगांवा सादात 515, मंडी धनौरा में 617, बछरायूं में 226 और जोया 734 प्रसव हुए है।
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मंडी धनौरा में 617 और बछरायूं में 226 प्रसव हुए
मंडी धनौरा/ बछरायूं। सरकारी अस्पतालों में प्रसव की संख्या लक्ष्य से काफी दूर है।। बीते नौ महीने में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धनौरा पर अप्रैल 2025 से दिसंबर तक 617 जबकि संयुक्त चिकित्सालय बछरायूं में मात्र 226 प्रसव ही हो पाए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ राहुल कुमार का कहना है कि प्रसव बढ़ाने के लिए आशा वर्कर्स को चेतावनी जारी की गई है। धनौरा में सर्वाधिक 115 प्रसव नवंबर 2025 में हुए हैं। जबकि बछरायूं में दिसंबर माह में सर्वाधिक 46 महिलाओं की डिलीवरी कराई गई है। संवाद
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एनएचएम से वित्तीय भुगतान नहीं होने के कारण कुछ प्रतिशत भुगतान रुका हुआ है जो जल्दी मिल जाएगा। यह धनराशि शासन स्तर से जारी होती है।
-डॉ. योगेंद्र सिंह, कार्यवाहक सीएमओ
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इतना ही नहीं प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर होने वाले गर्भवती महिलाओं की जांच का पैसा भी अटका हुआ है।
जननी सुरक्षा योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाली प्रोत्साहन धनराशि प्रसव के बाद पोषण, दवाओं और आवश्यक जरूरतों के लिए दी जाती है। इस लाभ को लेने के लिए गर्भवतियों को प्रसव सरकारी या मान्यता प्राप्त अस्पताल में कराना होता है। इसका उद्देश्य मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने वाली महिलाओं को 1400 रुपये और शहरी में 1000 रुपये की नकद सहायता मिलती है। इससे वह प्रसव के बाद अपने स्वास्थ्य पर खर्च कर सकती हैं।
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योजना के तहत प्रसव के बाद 48 घंटे में महिला के खाते में धनराशि का भुगतान करना होता है लेकिन जिला के सरकारी अस्पतालों से प्रसव कराने वाली हजार से ज्यादा महिलाओं को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया। आंकड़ों की बात करते तो नौ महीने में जिला अस्पताल में दो हजार, नौगांवा सादात 515, मंडी धनौरा में 617, बछरायूं में 226 और जोया 734 प्रसव हुए है।
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मंडी धनौरा में 617 और बछरायूं में 226 प्रसव हुए
मंडी धनौरा/ बछरायूं। सरकारी अस्पतालों में प्रसव की संख्या लक्ष्य से काफी दूर है।। बीते नौ महीने में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धनौरा पर अप्रैल 2025 से दिसंबर तक 617 जबकि संयुक्त चिकित्सालय बछरायूं में मात्र 226 प्रसव ही हो पाए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ राहुल कुमार का कहना है कि प्रसव बढ़ाने के लिए आशा वर्कर्स को चेतावनी जारी की गई है। धनौरा में सर्वाधिक 115 प्रसव नवंबर 2025 में हुए हैं। जबकि बछरायूं में दिसंबर माह में सर्वाधिक 46 महिलाओं की डिलीवरी कराई गई है। संवाद
एनएचएम से वित्तीय भुगतान नहीं होने के कारण कुछ प्रतिशत भुगतान रुका हुआ है जो जल्दी मिल जाएगा। यह धनराशि शासन स्तर से जारी होती है।
-डॉ. योगेंद्र सिंह, कार्यवाहक सीएमओ