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Amroha News: एससी/एसटी अत्याचार अधिनियम के उल्लंघन में पांच कर्मचारी दोषी
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अमरोहा। अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार अधिनियम के उल्लंघन में जिला समाज कल्याण अधिकारी समेत पांच कर्मी प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं। इसकी रिपोर्ट कमिश्नर को सौंप दी गई है।
न्याय मंच के अध्यक्ष बृजलाल जाटव अधिवक्ता ने कमिश्नर से शिकायत की थी। इसके आधार उपनिदेशक समाज कल्याण अधिकारी मोहम्मद मुश्ताक अहमद ने जांच की।
जांच रिपोर्ट में वर्ष 2022 से लेकर अभी तक के समस्त अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण के सभी थानों में दर्ज मुकदमों में मिलने वाली धनराशि में स्पष्ट तौर से शासनादेश का उल्लंघन करते हुए पीड़ितों को मिलने वाली मुआवजा धनराशि अपने मनमर्जी अपने मन से आधी अधूरी धनराशि का वितरण किया गया। इसकी रिपोर्ट कमिश्नर को सौंपी गई लेकिन कमिश्नर ने 28 जुलाई को जांच रिपोर्ट अधूरी बताते हुए वापस कर दी और अवशेष बिंदुओं पर जांच आख्या मांगी।
उप निदेशक समाज कल्याण ने सभी बिंदुओं को शामिल करते हुए जांच की। इसमें पाया कि वित्तीय वर्ष 2023-24, वर्ष 2024-25, वर्ष 2025-26 और वर्ष 2026-27 एवं शिकायती पत्र में उल्लिखित समस्त प्रकरणों का परीक्षण किया गया।
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इसमें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होता है कि एससी,एसटी एक्ट की धारा 3(2) 5 ए के अंतर्गत प्रकरणों में जिला समाज कल्याण अधिकारी की ओर से पुलिस विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्तावों को बिना समयक परीक्षण के ही पीड़ितों को कम धनराशि का भुगतान किया गया। जिस कारण योजना के वास्तविक लाभ पूर्ण नहीं हो सके।
उप निदेशक समाज कल्याण अधिकारी ने बताया इसके लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी पंखुरी जैन, तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी दिवंगत आशीष कुमार, अशोक कुमार प्रधान सहायक, काकुल देव कनिष्ठ सहायक और ग्राम विकास अधिकारी प्रमोद कुमार उत्तरदायी हैं।
बताया कि जिला समाज कल्याण अधिकारी ने प्रस्तावों को समय से उपलब्ध नहीं कराया गया। इसकी वजह से जांच में देरी हुई। बताया कि जांच रिपोर्ट कमिश्नर को भेज दी है।
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न्याय मंच के अध्यक्ष बृजलाल जाटव अधिवक्ता ने कमिश्नर से शिकायत की थी। इसके आधार उपनिदेशक समाज कल्याण अधिकारी मोहम्मद मुश्ताक अहमद ने जांच की।
जांच रिपोर्ट में वर्ष 2022 से लेकर अभी तक के समस्त अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण के सभी थानों में दर्ज मुकदमों में मिलने वाली धनराशि में स्पष्ट तौर से शासनादेश का उल्लंघन करते हुए पीड़ितों को मिलने वाली मुआवजा धनराशि अपने मनमर्जी अपने मन से आधी अधूरी धनराशि का वितरण किया गया। इसकी रिपोर्ट कमिश्नर को सौंपी गई लेकिन कमिश्नर ने 28 जुलाई को जांच रिपोर्ट अधूरी बताते हुए वापस कर दी और अवशेष बिंदुओं पर जांच आख्या मांगी।
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उप निदेशक समाज कल्याण ने सभी बिंदुओं को शामिल करते हुए जांच की। इसमें पाया कि वित्तीय वर्ष 2023-24, वर्ष 2024-25, वर्ष 2025-26 और वर्ष 2026-27 एवं शिकायती पत्र में उल्लिखित समस्त प्रकरणों का परीक्षण किया गया।
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इसमें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होता है कि एससी,एसटी एक्ट की धारा 3(2) 5 ए के अंतर्गत प्रकरणों में जिला समाज कल्याण अधिकारी की ओर से पुलिस विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्तावों को बिना समयक परीक्षण के ही पीड़ितों को कम धनराशि का भुगतान किया गया। जिस कारण योजना के वास्तविक लाभ पूर्ण नहीं हो सके।
उप निदेशक समाज कल्याण अधिकारी ने बताया इसके लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी पंखुरी जैन, तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी दिवंगत आशीष कुमार, अशोक कुमार प्रधान सहायक, काकुल देव कनिष्ठ सहायक और ग्राम विकास अधिकारी प्रमोद कुमार उत्तरदायी हैं।
बताया कि जिला समाज कल्याण अधिकारी ने प्रस्तावों को समय से उपलब्ध नहीं कराया गया। इसकी वजह से जांच में देरी हुई। बताया कि जांच रिपोर्ट कमिश्नर को भेज दी है।