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Amroha News: विधायक को भी आधे घंटे बाद मिली पुलिस की मदद, आम आदमी की कैसे हो सुनवाई

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 24 Feb 2026 01:42 AM IST
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Even the MLA got police help after half an hour, how can the common man be heard?
अमरोहा। सत्ताधारी भाजपा के विधायक राजीव तरारा को मुसीबत के समय आधा घंटे तक पुलिस की मदद नहीं मिली तो आम इंसान की सुनवाई की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। पुलिस या प्रशासनिक अफसर संवेदनशील बिंदुओं पर कितने गंभीर...यह बात विधायक तरारा की आपबीती से स्पष्ट हो रही है। तरारा ने बताया कि उन की गाड़ी पर पथराव, सुरक्षा टीम से मारपीट की सूचना खुद फोन से दी लेकिन एसएसआई ने पूरी तरह अनदेखी कर दी। एसपी को भी चार बार फोन किया तो आधे घंटे बाद पुलिस मौके पर आई।
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विधायक राजीव तरारा रविवार रात अपने क्षेत्र धनौरा में अमरोहा रोड पर रेलवे फाटक के पास से गुजर रहे थे। उसी समय उनकी कार से बाइक की टक्कर और फिर प्रतिक्रिया में कार पर पथराव की घटना हुई। विधायक ने बताया कि आरोपियों द्वारा सुरक्षा टीम के साथ मारपीट शुरू करने पर मैंने तत्काल एसएसआई सतीश मौर्या को फोन पर जानकारी दी, क्योंकि थाना प्रभारी छुट्टी पर थे लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद एसपी अमित कुमार आनंद को फोन किया। उनके निर्देश के बाद भी पुलिस तुरंत नहीं पहुंची। एसपी को चार फोन करने पड़े तो करीब आधे घंटे बाद पुलिस आई।
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इस घटना के चर्चा-ए-आम बनने पर सोमवार को एसपी ने आनन फानन एसएसआई सतीश मौर्या, कस्बा चौकी इंचार्ज जुगल किशोर और लेपर्ड ड्यूटी के सिपाही अंकुश को निलंबित कर दिया। इस सख्त कार्रवाई के बावजूद बड़ा सवाल पुलिस और प्रशासन की संवेदनशीलता का खड़ा हो गया।
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विधायक से लेकर अन्य लोग एक ही बात पूछ रहे हैं कि जब सत्तासीन जनप्रतिनिधि के फोन पर अफसरों के रुख का यह हाल है तो आम आदमी की कॉल, अर्जी, गुहार का अधिकारियों पर कितना असर पड़ता होगा। लोग कह रहे हैं कि यही वजह है कि समाधान दिवस, थाना दिवस, तहसील कार्यालय से लेकर आला अफसरों के दफ्तरों तक फरियादी चक्कर काटते रहते हैं लेकिन समस्याओं का निदान नहीं हो पाता।

सवाल उठ रहा है कि अगर भाजपा विधायक को ही बेबसी का सामना करना पड़ जाए तो वास्तविक रूप से बेबस जनता कहां जाए। इसी तरह की प्रतिक्रिया पिछले दिनों लखनऊ में विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय की ओर से भी सामने आई थी।
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