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Amroha News: निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों का प्रदर्शन, नारेबाजी
Thu, 03 Jul 2025 01:32 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 03 Jul 2025 01:32 AM IST
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अमरोहा। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर जिले में बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने बिजली के निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया। साथ ही नौ जुलाई के राष्ट्रव्यापी अभियान में ज्यादा से ज्यादा लोगों के शामिल होने का आह्वान किया।
बुधवार को बिजली कर्मचारी अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर एकत्र हुए। प्रदर्शन करके विरोध जताया। कहा कि प्रदेश के बिजली कर्मी बीते सात माह से लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने आज तक एक बार भी उनसे वार्ता नहीं की है। निजी घरानों से बहुत महंगी दरों पर बिजली खरीदने के कारण अतिरिक्त भार आ रहा है। प्रदेश में सरकारी विभागों पर 14.5 करोड़ रुपये का बिजली राजस्व का बकाया है। किसानों को मुफ्त बिजली दी जाती है, गरीबी रेखा से नीचे के बिजली उपभोक्ताओं को 3 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली दी जाती है। बिजली की लागत 7.85 पैसे प्रति यूनिट है।
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बुनकरों आदि को भी सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी की धनराशि ही लगभग 22 हजार करोड़ रुपए है। प्रदेश सरकार इन सबको घाटा बताती है और इसी आधार पर निजीकरण का निर्णय लिया गया है। चेतावनी दी है कि यदि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों का कोई भी उत्पीड़न करने की कोशिश की गई तो देश के तमाम 27 लाख बिजली कर्मी मूक दर्शन नहीं रहेंगे।
इस दौरान एसडीओ आरके मिश्रा, तरंग शर्मा, राजन सिंह, चंद्रेश विश्वकर्मा, जेई नवीन कुमार, यशवंत गौड़, मोहम्मद जावेद आदि मौजूद रहे।
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बुधवार को बिजली कर्मचारी अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर एकत्र हुए। प्रदर्शन करके विरोध जताया। कहा कि प्रदेश के बिजली कर्मी बीते सात माह से लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
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प्रदेश सरकार ने आज तक एक बार भी उनसे वार्ता नहीं की है। निजी घरानों से बहुत महंगी दरों पर बिजली खरीदने के कारण अतिरिक्त भार आ रहा है। प्रदेश में सरकारी विभागों पर 14.5 करोड़ रुपये का बिजली राजस्व का बकाया है। किसानों को मुफ्त बिजली दी जाती है, गरीबी रेखा से नीचे के बिजली उपभोक्ताओं को 3 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली दी जाती है। बिजली की लागत 7.85 पैसे प्रति यूनिट है।
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बुनकरों आदि को भी सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी की धनराशि ही लगभग 22 हजार करोड़ रुपए है। प्रदेश सरकार इन सबको घाटा बताती है और इसी आधार पर निजीकरण का निर्णय लिया गया है। चेतावनी दी है कि यदि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों का कोई भी उत्पीड़न करने की कोशिश की गई तो देश के तमाम 27 लाख बिजली कर्मी मूक दर्शन नहीं रहेंगे।
इस दौरान एसडीओ आरके मिश्रा, तरंग शर्मा, राजन सिंह, चंद्रेश विश्वकर्मा, जेई नवीन कुमार, यशवंत गौड़, मोहम्मद जावेद आदि मौजूद रहे।