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नोटबंदी से फीकी हुई अमरोहा के गुड़ कारोबार की मिठास
कपिलकांत शर्मा/अमर उजाला अमरोहा
Updated Fri, 25 Nov 2016 12:07 AM IST
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sugar cane
- फोटो : amar ujala
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नोटबंदी के असर से गुड़ कारोबार भी अछूता नहीं रहा। इस मौसम में अमरोहा की गुड़ मंडी गुलजार रहती थी, अब वहां जल्द ही सन्नाटा पसर जाता है। नोटबंदी के बाद अमरोहा गुड़ मंडी में कारोबार पचास से सत्तर प्रतिशत रह गया। व्यापारियों की माने तो जहां इन दिनों रोजाना एक करोड़ का कारोबार होता था वहीं तीस लाख तक ही सिमट रहा है। कुल तीस प्रतिशत ही किसान गुड़ ला रहे हैं।
बता दें कि अमरोहा के गुलड़िया रोड स्थित मंडी समिति के एक हिस्से में बड़ी गुड़ मंडी है। जहां 42 लाइसेंसी आढ़ती हैं। इसके अलावा इतने ही कच्चे आढ़ती भी हैं। जो किसानों से माल लेकर लाइसेंसी व्यापारियों की आढ़त पर बेचते हैं। इस बार महाराष्ट्र में सूखा पड़ने से चीनी और गुड़ के दाम शुरू से ही उछाल पर हैं।
मंडी में 2600 से 2525 रुपये प्रति क्विंटल गुड़ खरीदा जा रहा है। बावजूद इसके बड़े किसान मंडी नहीं पहुंच रहे। बाजार में फुट की खरीदारी भी कम है। करेंसी के अभाव में लोग गुड़ का जायका भूल गए हैं, अन्य जरूरतों को पहले पूरा कर रहे हैं। इसका सीधा असर व्यापारी और आढ़तियों पर करेंसी का अभाव है।
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अमरोहा मंडी में चार जिलों के किसान लाते हैं गुड़
अमरोहा की गुड़ मंडी में मुरादाबाद मंडल के जनपद संभल, मुरादाबाद, बिजनौर के किसान भी माल लेकर आते हैं, जहां इन दिनों मंडी में किसानों की गुड़ से भरी गाड़ियां रात दिन उतरती थीं, वहीं आज करेंसी के चक्कर में किसान मंडी नहीं पहुंच रहे। दोपहर तक बाद तक ही गुड़ मंडी में सन्नाटा पसर जाता है।
गुड़ बाजार का हाल जाने तो पिछले साल की तुलना में व्यापार 50 प्रतिशत ही रह गया है। पहले इन दिनों एक करोड़ गुड़ किसान मंडी लेकर आते थे, लेकिन अब करीब 30 लाख रुपये तक का ही माल मंडी में आ रहा है।
करेंसी न होने की वजह से बड़े किसानों ने माल दबा लिया है। बड़े किसानों का मानना है कि यदि माल व्यापारियों को उधार ही देना है तो वह अपने पास ही माल को रख कर मंदी तेजी देखेंगे। क्योंकि महाराष्ट्र में सूखे की वजह से इस बार चीनी और गुड़ का भाव भी अच्छा है। बड़े किसानों को आगे आने वाले समय में तेजी आने की उम्मीद है।
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बता दें कि अमरोहा के गुलड़िया रोड स्थित मंडी समिति के एक हिस्से में बड़ी गुड़ मंडी है। जहां 42 लाइसेंसी आढ़ती हैं। इसके अलावा इतने ही कच्चे आढ़ती भी हैं। जो किसानों से माल लेकर लाइसेंसी व्यापारियों की आढ़त पर बेचते हैं। इस बार महाराष्ट्र में सूखा पड़ने से चीनी और गुड़ के दाम शुरू से ही उछाल पर हैं।
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मंडी में 2600 से 2525 रुपये प्रति क्विंटल गुड़ खरीदा जा रहा है। बावजूद इसके बड़े किसान मंडी नहीं पहुंच रहे। बाजार में फुट की खरीदारी भी कम है। करेंसी के अभाव में लोग गुड़ का जायका भूल गए हैं, अन्य जरूरतों को पहले पूरा कर रहे हैं। इसका सीधा असर व्यापारी और आढ़तियों पर करेंसी का अभाव है।
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अमरोहा मंडी में चार जिलों के किसान लाते हैं गुड़
अमरोहा की गुड़ मंडी में मुरादाबाद मंडल के जनपद संभल, मुरादाबाद, बिजनौर के किसान भी माल लेकर आते हैं, जहां इन दिनों मंडी में किसानों की गुड़ से भरी गाड़ियां रात दिन उतरती थीं, वहीं आज करेंसी के चक्कर में किसान मंडी नहीं पहुंच रहे। दोपहर तक बाद तक ही गुड़ मंडी में सन्नाटा पसर जाता है।
गुड़ बाजार का हाल जाने तो पिछले साल की तुलना में व्यापार 50 प्रतिशत ही रह गया है। पहले इन दिनों एक करोड़ गुड़ किसान मंडी लेकर आते थे, लेकिन अब करीब 30 लाख रुपये तक का ही माल मंडी में आ रहा है।
करेंसी न होने की वजह से बड़े किसानों ने माल दबा लिया है। बड़े किसानों का मानना है कि यदि माल व्यापारियों को उधार ही देना है तो वह अपने पास ही माल को रख कर मंदी तेजी देखेंगे। क्योंकि महाराष्ट्र में सूखे की वजह से इस बार चीनी और गुड़ का भाव भी अच्छा है। बड़े किसानों को आगे आने वाले समय में तेजी आने की उम्मीद है।