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निर्दोष होकर भी हमने काटी जेल, जमीन बेची, घर आज भी गिरवी, दोषी पुलिसकर्मियों को मिले सख्त सजा
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अमरोहा। ऑनर किलिंग के झूठे मुकदमे में जेल काटने वाले किसान का परिवार टूट चुका है। पुलिस और प्रशासनिक अफसर सुध लेने को तैयार नहीं है। मुकदमे बाजी में उसे 16 बीघा जमीन तक बेचनी पड़ी। घर और बाकी जमीन गिरवी है। आठ लाख रुपये से अधिक का कर्ज सिर पर बोझ है। निर्दोष होने के बाद भी महीनों की जेल काटनी पड़ी। लेकिन यह पुलिसकर्मी दोषी हैं, उन्हें तो सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। क्योंकि निर्दोषों को जेल भेजकर सभी पुलिसकर्मियों ने वाहवाही लूटी और जश्न मनाया था।
यह कहना है पीड़ित (किशोरी के पिता) किसान का। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में पत्नी के अलावा पांच बेटे और चार बेटियां हैं। वह दो बेटों और एक बेटी की शादी कर चुके थे। लेकिन दूसरे नंबर की बेटी छह फरवरी 2019 को खेत से अचानक गायब हो गई थी। वह जिंदा थी, यह हम जानते थे। इसलिए बेटे ने शक के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ बहन के अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन, बेटी को जल्द बरामद की शिकायत करना थानेदार को नागवार गुजरा। जिसका खामियाजा जेल में रहकर भुगतना पड़ा। तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा सहित अन्य पुलिस कर्मियों ने षड्यंत्र के तहत झूठा फंसाया। थाने में बैठाकर कई दिन तक थर्ड डिग्री दी। बाद में 28 दिसंबर 2019 को पिता, भाई और एक रिश्तेदार को ऑनर किलिग में जेल भेज दिया था। पुलिस ने हत्या की झूठी कहानी बनाई थी। उन्होंने बताया कि पुलिस की कारगुजारी के कारण पिता को 11, भाई को नौ और रिश्तेदार को 15 महीने जेल में गुजारने पड़े।
इस बीच मुकदमे बाजी के चक्कर में सोलह बीघा जमीन बेचनी पड़ी। इतना ही नहीं बाकी बची जमीन और घर को गिरवी रखना पड़ा। जो आज भी बंधक है। घर के एवज में ढाई लाख रुपये छह प्रतिशत ब्याज पर लिए थे। जबकि 10 बीघा जमीन को पांच लाख रुपये में गिरवी रखना पड़ा। पीड़ित किसान का कहना है कि आज तक पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने सुध नहीं ली है। किसी को अपनी गलती का पछतावा नहीं हैं। तीन बेटे और दो बेटियां शादी को तैयार हैं। सबकुछ मुकदमेबाजी में बर्बाद हो चुका है। निर्दोष होकर भी जेल काटनी पड़ी। घर-जमीन सब गिरवी है। बेवजह सिर पर आठ लाख से अधिक का कर्ज बोझ बना हुआ है। आखिरकार इन सब कौन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि निर्दोष होकर भी हमें जेल में रहना पड़ा। यह पुलिसकर्मी तो दोषी हैं, इन्हें तो सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।
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यह कहना है पीड़ित (किशोरी के पिता) किसान का। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में पत्नी के अलावा पांच बेटे और चार बेटियां हैं। वह दो बेटों और एक बेटी की शादी कर चुके थे। लेकिन दूसरे नंबर की बेटी छह फरवरी 2019 को खेत से अचानक गायब हो गई थी। वह जिंदा थी, यह हम जानते थे। इसलिए बेटे ने शक के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ बहन के अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन, बेटी को जल्द बरामद की शिकायत करना थानेदार को नागवार गुजरा। जिसका खामियाजा जेल में रहकर भुगतना पड़ा। तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा सहित अन्य पुलिस कर्मियों ने षड्यंत्र के तहत झूठा फंसाया। थाने में बैठाकर कई दिन तक थर्ड डिग्री दी। बाद में 28 दिसंबर 2019 को पिता, भाई और एक रिश्तेदार को ऑनर किलिग में जेल भेज दिया था। पुलिस ने हत्या की झूठी कहानी बनाई थी। उन्होंने बताया कि पुलिस की कारगुजारी के कारण पिता को 11, भाई को नौ और रिश्तेदार को 15 महीने जेल में गुजारने पड़े।
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इस बीच मुकदमे बाजी के चक्कर में सोलह बीघा जमीन बेचनी पड़ी। इतना ही नहीं बाकी बची जमीन और घर को गिरवी रखना पड़ा। जो आज भी बंधक है। घर के एवज में ढाई लाख रुपये छह प्रतिशत ब्याज पर लिए थे। जबकि 10 बीघा जमीन को पांच लाख रुपये में गिरवी रखना पड़ा। पीड़ित किसान का कहना है कि आज तक पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने सुध नहीं ली है। किसी को अपनी गलती का पछतावा नहीं हैं। तीन बेटे और दो बेटियां शादी को तैयार हैं। सबकुछ मुकदमेबाजी में बर्बाद हो चुका है। निर्दोष होकर भी जेल काटनी पड़ी। घर-जमीन सब गिरवी है। बेवजह सिर पर आठ लाख से अधिक का कर्ज बोझ बना हुआ है। आखिरकार इन सब कौन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि निर्दोष होकर भी हमें जेल में रहना पड़ा। यह पुलिसकर्मी तो दोषी हैं, इन्हें तो सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।
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