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डेंगू की रफ्तार कुछ थमी पर ठंड में बरतें सावधानी
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अमरोहा। सर्दियों का मौसम सेहत का पूरा ख्याल रखें। जिले में डेंगू की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है। लेकिन सुबह-शाम की ठंड लोगों को बीमार बना रही है। चिकित्सकों की मानें तो यहीं मौसम सेहत के लिए ज्यादा खतरनाक होते हैं। खासकर सुबह और शाम में तो ज्यादा सतर्कता बरतना चाहिए। सर्दी-जुकाम, बुखार और त्वचा रोग सहित कई बीमारियों से पीड़ित लोग अस्पतालों में पहुंच रहे है। इसके अलावा प्रतिदिन 6 से 10 बच्चे निमोनिया से मिल रहे हैं।
शनिवार को जिला अस्पताल सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की भीड़ लगी रही है। सबसे अधिक सर्दी, जुकाम, बुखार, त्वचा आदि बीमारियों से पीड़ित लोग चिकित्सक के पास इलाज कराने को पहुंचे। फिजीशियन डॉ. फाइल अली ने बताया कि सर्दी-जुकाम इसे कॉमन कोल्ड भी कहते हैं, जो तापमान में परिवर्तन के कारण होता है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें यह जल्दी पकड़ता है। इसमें भाप, नमक के पानी के गरारे आदि काफी लाभदायक हैं। इसमें गर्म तरल पदार्थ का ज्यादा प्रयोग करना चाहिए। सर्दियों में हाइपोथर्मिया बीमारी होती है। इसमें हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं, सांस लेने में तकलीफ बनने लगती है। इसमें ज्यादा सावधानी बरतनी होती है। बच्चों में टॉन्सिल की समस्या आम होती है। गले में काफी दर्द होता है। खाना खाने में दिक्कत होती है, तेज बुखार भी हो सकता है। यह बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण से हो सकता है। इससे बचे रहने के लिए इस मौसम में ठंडी चीजों का प्रयोग करने से बचें।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ मुनीश आदिल ने बताया कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन 6 से 10 बच्चे निमोनिया के मिल रहे हैं। खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित बच्चों की रोजाना 8 से 15 तक हैं। एक माह में 200 से 250 तक निमोनिया, खांसी, जुकाम और बुखार के बच्चे मिल चुके हैं। जरा सी लापरवाही से बीमारी की जद में आ सकते हैं। बच्चों का पूरा ध्यान रखें। उन्हें गर्म कपड़े पहना कर रखें।
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शनिवार को जिला अस्पताल सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की भीड़ लगी रही है। सबसे अधिक सर्दी, जुकाम, बुखार, त्वचा आदि बीमारियों से पीड़ित लोग चिकित्सक के पास इलाज कराने को पहुंचे। फिजीशियन डॉ. फाइल अली ने बताया कि सर्दी-जुकाम इसे कॉमन कोल्ड भी कहते हैं, जो तापमान में परिवर्तन के कारण होता है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें यह जल्दी पकड़ता है। इसमें भाप, नमक के पानी के गरारे आदि काफी लाभदायक हैं। इसमें गर्म तरल पदार्थ का ज्यादा प्रयोग करना चाहिए। सर्दियों में हाइपोथर्मिया बीमारी होती है। इसमें हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं, सांस लेने में तकलीफ बनने लगती है। इसमें ज्यादा सावधानी बरतनी होती है। बच्चों में टॉन्सिल की समस्या आम होती है। गले में काफी दर्द होता है। खाना खाने में दिक्कत होती है, तेज बुखार भी हो सकता है। यह बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण से हो सकता है। इससे बचे रहने के लिए इस मौसम में ठंडी चीजों का प्रयोग करने से बचें।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ मुनीश आदिल ने बताया कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन 6 से 10 बच्चे निमोनिया के मिल रहे हैं। खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित बच्चों की रोजाना 8 से 15 तक हैं। एक माह में 200 से 250 तक निमोनिया, खांसी, जुकाम और बुखार के बच्चे मिल चुके हैं। जरा सी लापरवाही से बीमारी की जद में आ सकते हैं। बच्चों का पूरा ध्यान रखें। उन्हें गर्म कपड़े पहना कर रखें।
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