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दिल्ली के छात्र जुबैर और जायद मलिक ने धर्म के नाम पर फंड जुटाकर खरीदा था तबाही का सामान
Mon, 31 Dec 2018 02:40 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरोहा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरोहा
Published by: Vikas Kumar
Updated Mon, 31 Dec 2018 02:40 AM IST
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एनआईए और एटीएस की टीम
- फोटो : अमर उजाला
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एनआईए और एटीएस के हत्थे चढ़े नए मॉड्यूल का सरगना मुफ्ती सुहैल सहित संदिग्धों को अभी तक आईएसआईएस से फंडिंग का पैसा नहीं नहीं मिला था। लिहाजा धर्म के नाम पर फंड (चंदा) जुटाते थे। फंड जुटाने में दिल्ली के जाफराबाद निवासी छात्र जुबैर और जायद मलिक मदद करते थे। चंदे के रूप में मिलने वाले पैसे से ही सुहैल तबाही का समान खरीदता था।
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एनआईए और एटीएस की संयुक्त छापामारी कर बुधवार को आईएसआईएस के नए मॉड्यूल हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम का पर्दाफाश किया था। एनआईए और एटीएस ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के सत्रह ठिकानों पर एक साथ छापामारी कर सरगना सहित दस संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। इनके कब्जे से लाखों की नकदी, अवैध तमंचे, पिस्टल, आईएसआईएस के झंडे और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी। संदिग्धों के पास नकदी और हथियार और बम बनाने का समान कहां से आया और किसने भेजा है।
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एनआईए इसकी जांच कर रही है, लेकिन खुफिया सूत्रों के मुताबिक नए मॉड्यूल संदिग्धों को अभी तक आईएसआईएस से फंडिंग का कोई पैसा नहीं मिला है। इसका खुलासा उनके बैंक एकाउंट चेक करने से हुआ। नेटवर्क को सुहैल लीड कर रहा था। लिहाजा उसकी के इशारे पर दिल्ली के जाफराबाद निवासी स्नातक की पढ़ाई कर रहे जुबैर और जायद मलिक धर्म के नाम पर फंड जुटाते थे। दोनों इस काम में माहिर हैं। चंदे के रूप में मिले पैसे से ही सुहैल तबाही का समान खरीदता था। इतना ही नहीं ज्यादा पैसे की जरूरत पड़ने पर संदिग्धों ने घर के सोने-चांदी के जेवर तक बेच डाले थे।
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