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साइबर ठग ने निर्यातक की आईडी हैक कर अमेरिकी ग्राहक से अपने खाते में डलवाए 3.50 करोड़ रुपये
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मंडी धनौरा(अमरोहा)। साइबर अपराधियों ने निर्यातक की आईडी हैक कर अमेरिकी ग्राहक से पेमेंट के साढ़े तीन करोड़ रुपये अपने खाते में मंगा लिए। निर्यात फर्म के जीएम के अनुसार जब हकीकत पता चली तो अमेरिकी कंपनी और निर्यात फर्म के होश उड़ गए। हालांकि अमेरिका की जांच एजेंसी में शिकायत दर्ज कराने पर चार दिन के भीतर पेमेंट रिकवर हो गई। मोटी रकम होने की वजह से अमेरिकी ग्राहक व निर्यातक फर्म दोनों ने राहत की सांस ली। अमेरिका की सिटी बैंक की कार्यशैली से निर्यातक बेहद नाराज है।
नगर की मैंथा निर्यातक फर्म नोरेक्स फ्लेवर्स को एक अमेरिकी ग्राहक से अपना पेमेंट लेना था। फर्म के प्रबंध निदेशक वैभव अग्रवाल ने बताया कि साइबर अपराधियों ने नोरेक्स फ्लेवर्स की आईडी हैक कर कर ली। इसके बाद निर्यातक फर्म के बिल में दर्ज बैंक डिटेल बदल कर अमेरिकी कस्टमर को भेज दी। अमेरिकी कस्टमर ने सारी पेमेंट साइबर अपराधियों के द्वारा भेजे गए सिटी बैंक एकाउंट में ट्रांसफर कर दी।
रकम ट्रांसफर करने के बाद अमेरिकी ग्राहक ने निर्यातक फर्म के प्रबंध निदेशक वैभव अग्रवाल को फोन कर जानकारी दी कि उनकी सिटी बैंक की इनवाइस का भुगतान कर दिया गया है। जनरल मैनेजर ने अमेरिकी ग्राहक को बताया कि उनकी फर्म का सिटी बैंक में एकाउंट ही नहीं है। तो दोनों के पांव तले जमीन खिसक गई।
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अमेरिकी कंपनी और निर्यात फर्म ने अमेरिका की सरकारी जांच एजेंसी के साथ-साथ सिटी बैंक में इसकी शिकायत दर्ज कराई। इसके तीन दिन बाद वह रकम निर्यातक फर्म के बैंक खाते में भेज दी गई। पेमेंट अपने खाते में आने पर निर्यातक फर्म व अमेरिकी ग्राहक ने राहत की सांस ली। फर्म के प्रबंध निदेशक वैभव अग्रवाल ने बताया कि अमेरिका के सिटी बैंक ने इस मामले में अपेक्षित सहयोग नहीं दिया।
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नगर की मैंथा निर्यातक फर्म नोरेक्स फ्लेवर्स को एक अमेरिकी ग्राहक से अपना पेमेंट लेना था। फर्म के प्रबंध निदेशक वैभव अग्रवाल ने बताया कि साइबर अपराधियों ने नोरेक्स फ्लेवर्स की आईडी हैक कर कर ली। इसके बाद निर्यातक फर्म के बिल में दर्ज बैंक डिटेल बदल कर अमेरिकी कस्टमर को भेज दी। अमेरिकी कस्टमर ने सारी पेमेंट साइबर अपराधियों के द्वारा भेजे गए सिटी बैंक एकाउंट में ट्रांसफर कर दी।
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रकम ट्रांसफर करने के बाद अमेरिकी ग्राहक ने निर्यातक फर्म के प्रबंध निदेशक वैभव अग्रवाल को फोन कर जानकारी दी कि उनकी सिटी बैंक की इनवाइस का भुगतान कर दिया गया है। जनरल मैनेजर ने अमेरिकी ग्राहक को बताया कि उनकी फर्म का सिटी बैंक में एकाउंट ही नहीं है। तो दोनों के पांव तले जमीन खिसक गई।
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अमेरिकी कंपनी और निर्यात फर्म ने अमेरिका की सरकारी जांच एजेंसी के साथ-साथ सिटी बैंक में इसकी शिकायत दर्ज कराई। इसके तीन दिन बाद वह रकम निर्यातक फर्म के बैंक खाते में भेज दी गई। पेमेंट अपने खाते में आने पर निर्यातक फर्म व अमेरिकी ग्राहक ने राहत की सांस ली। फर्म के प्रबंध निदेशक वैभव अग्रवाल ने बताया कि अमेरिका के सिटी बैंक ने इस मामले में अपेक्षित सहयोग नहीं दिया।