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Amroha News: करोड़ों रुपये पर फिरा पानी... फिर भी लोग प्यासे

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 14 Apr 2026 01:58 AM IST
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Crores of Rupees Down the Drain... Yet People Remain Thirsty
अमरोहा। जिले में जल जीवन मिशन की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ओवरहेड टैंक सफेद हाथी साबित हो रहे हैं और भीषण गर्मी के बीच लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। अप्रैल में ही तापमान 33 डिग्री पार कर चुका है और आने वाले दिनों में इसके 48 डिग्री तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जिससे हालात और गंभीर होने की आशंका है।
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ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में योजना का लाभ धरातल पर नजर नहीं आ रहा। कई गांवों में टैंक बनकर तैयार हैं, लेकिन पानी की आपूर्ति नहीं हो रही। जहां सप्लाई हो भी रही है, वहां पानी का प्रेशर बेहद कम है या पाइपलाइन जगह-जगह से लीक हो चुकी है। अमरोहा शहर, जोया और नौगावां सादात क्षेत्र में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। शहर के मोहल्ला अहमदनगर, सराय कोहना, बटवाल, नल नई बस्ती और सुबोध नगर के लोग लंबे समय से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।
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जोया क्षेत्र में भी स्थिति खराब बनी हुई है। मोहल्ला चौधरियान की निवासी गीता शर्मा के अनुसार पानी या तो आता नहीं है और आता भी है तो बहुत कम प्रेशर में और गंदा होता है। वहीं इकबाल नगर फैजाबाद की कविता का कहना है कि कई दिनों तक पानी नहीं आता और जब आता है तो पीने योग्य नहीं होता। गर्मी बढ़ने के साथ जलापूर्ति की अव्यवस्था लोगों की परेशानी को और बढ़ा रही है। यदि समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत, प्रेशर सुधार और नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में हालात और विकट हो सकते हैं।
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करोड़ों की टंकी बनी शोपीस, डिडौली में गहराया पेयजल संकट

डिडौली। हर घर स्वच्छ जल योजना के तहत ग्राम पंचायत डिडौली में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से बनी ओवरहेड पानी की टंकी अब बदहाल व्यवस्था का प्रतीक बन गई है। जिस टंकी से ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल की उम्मीद थी, वह आज बंद पड़ी है और गांव में जल संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार निर्माण के बाद कुछ समय तक ही सीमित अवधि के लिए पानी की आपूर्ति हुई, लेकिन जल निगम की लापरवाही के चलते सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई। इसके बाद से टंकी दोबारा चालू नहीं हो सकी। पेयजल संकट के कारण ग्रामीणों को महंगे सबमर्सिबल और निजी संसाधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जो हर किसी के लिए संभव नहीं है। भीषण गर्मी के चलते हालात और गंभीर हो गए हैं, जिससे इंसानों के साथ पशुओं के सामने भी पानी की किल्लत खड़ी हो रही है। ग्रामीणों ने विभाग से जल्द टंकी चालू कर नियमित जलापूर्ति बहाल करने की मांग की है। संवाद
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बरखेड़ा राजपूत में करोड़ों की पानी की टंकी बनी शोपीस
जोया। विकास खंड जोया के गांव बरखेड़ा राजपूत में जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी आज भी ग्रामीणों के लिए महज एक शोपीस बनकर रह गई है। करीब 2 करोड़ 29 लाख 74 हजार रुपये की लागत से तैयार इस टंकी से ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल मिलने की उम्मीद थी, लेकिन हकीकत में आज तक गांव के लोगों को एक बूंद पानी भी नसीब नहीं हो सका है। ग्रामीणों के अनुसार ठेकेदार द्वारा टंकी निर्माण कार्य 15 मई 2023 तक पूरा करने का दावा किया गया था, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बावजूद यह परियोजना शुरू नहीं हो सकी। ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी के इस दौर में पानी की समस्या और विकराल हो गई है। संवाद
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चार साल बाद भी घरों में नहीं पहुंचा पानी
हसनपुर। सरकार की हर घर जल योजना क्षेत्र के गांव सिहाली जागीर में कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है। गांव में करीब चार साल पहले जल जीवन मिशन के तहत दो करोड़ की लागत से ओवरहेड टैंक का निर्माण किया गया था और पाइपलाइन भी बिछाई गई थी, लेकिन हकीकत यह है कि घरों में पानी नहीं पहुंच सका। गांव निवासी शकील खान और रफी खान एडवोकेट ने बताया कि योजना के तहत गांव में लगभग 500 कनेक्शन किए जा चुके हैं। दो साल पहले एक बार पानी की सप्लाई शुरू करने की कोशिश की गई थी, लेकिन पाइपलाइन में जगह-जगह लीकेज और तकनीकी कमियों के कारण प्रोजेक्ट फेल हो गया। तब से लेकर आज तक सुधार के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वर्तमान में पाइपलाइन और स्टैंड पोस्ट बदहाली का शिकार हैं। भीषण गर्मी के मौसम में पानी की बूंद-बूंद के लिए ग्रामीण हैंडपंपों पर निर्भर हैं। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि करोड़ों खर्च होने के बावजूद उन्हें इस सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि लीकेज को ठीक कर जल्द से जल्द जलापूर्ति सुचारू की जाए ताकि उन्हें राहत मिल सके।

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जल जीवन मिशन योजना में गांवों में काम चल रहे है। इसका लक्ष्य दिसंबर 2028 तक कर दिया गया है। जिले में 58 गांवों में सौ प्रतिशत काम हो चुका है और 29 गांव ऐसे हैं जहां पर नब्बे प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। जहां कहीं अगर लीकेज हैं तो उनको ठीक कराया जाएगा। -चंद्रहास, अधिशासी अभियंता
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