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Amroha News: कांस्टेबल की जमानत याचिका पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा
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अमरोहा। हरियाणा की युवती से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद सीआरपीएफ के निरीक्षक लालाराम यादव और हसनपुर कोतवाली में तैनात दरोगा संजय तोमर की जमानत याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई होगी। वहीं, आरोपी कांस्टेबल प्रमोद कुमार की जमानत अर्जी पर शनिवार को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में तीनों आरोपियों की जमानत पर न्यायालय के रुख को लेकर निगाहें टिकी हैं।
एडीजीसी मनोज सक्सेना ने बताया कि 22 सितंबर की रात उत्तराखंड के खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश शर्मा के हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव झुलपुरी स्थित फार्म हाउस पर हरियाणा के फतेहाबाद निवासी युवती ने सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पीड़िता की शिकायत पर सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल मोहित, निरीक्षक लालाराम यादव, हसनपुर कोतवाली में तैनात दरोगा संजय तोमर और कांस्टेबल प्रमोद कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। फिलहाल सभी बिजनौर जेल में बंद हैं।
मामले की शुरुआती प्राथमिकी में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल नहीं थीं। बाद में पीड़िता के अनुसूचित जाति से होने की जानकारी मिलने पर पुलिस ने फतेहाबाद पुलिस से उसका जाति प्रमाणपत्र मंगवाया। इसके बाद विवेचना के दौरान एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी बढ़ा दी गईं। आरोपी कांस्टेबल प्रमोद कुमार की ओर से अधिवक्ता कपिल चिकारा ने पहले जमानत याचिका दाखिल की थी, लेकिन नई धाराएं जुड़ने के बाद उसे वापस ले लिया गया। इसके बाद संशोधित धाराओं के आधार पर दूसरी जमानत अर्जी दाखिल की गई। शनिवार को अदालत में दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें रखीं। सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया। उधर, सीआरपीएफ के निरीक्षक लालाराम यादव और दरोगा संजय तोमर की ओर से भी जमानत याचिका दायर की गई। अब मंगलवार को इनकी जमानत याचिकाओं पर सुनवाई होनी है।
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एडीजीसी मनोज सक्सेना ने बताया कि 22 सितंबर की रात उत्तराखंड के खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश शर्मा के हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव झुलपुरी स्थित फार्म हाउस पर हरियाणा के फतेहाबाद निवासी युवती ने सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पीड़िता की शिकायत पर सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल मोहित, निरीक्षक लालाराम यादव, हसनपुर कोतवाली में तैनात दरोगा संजय तोमर और कांस्टेबल प्रमोद कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। फिलहाल सभी बिजनौर जेल में बंद हैं।
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मामले की शुरुआती प्राथमिकी में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल नहीं थीं। बाद में पीड़िता के अनुसूचित जाति से होने की जानकारी मिलने पर पुलिस ने फतेहाबाद पुलिस से उसका जाति प्रमाणपत्र मंगवाया। इसके बाद विवेचना के दौरान एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी बढ़ा दी गईं। आरोपी कांस्टेबल प्रमोद कुमार की ओर से अधिवक्ता कपिल चिकारा ने पहले जमानत याचिका दाखिल की थी, लेकिन नई धाराएं जुड़ने के बाद उसे वापस ले लिया गया। इसके बाद संशोधित धाराओं के आधार पर दूसरी जमानत अर्जी दाखिल की गई। शनिवार को अदालत में दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें रखीं। सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया। उधर, सीआरपीएफ के निरीक्षक लालाराम यादव और दरोगा संजय तोमर की ओर से भी जमानत याचिका दायर की गई। अब मंगलवार को इनकी जमानत याचिकाओं पर सुनवाई होनी है।
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