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करिह क्षमा छठ मइया भूल-चूक गलती हमार...
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मरोहा वासुदेव मंदिर तालाब पर छठ पूजा के दौरान समाज के लोग।
- फोटो : JPNAGAR
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अमरोहा/गजरौला। करिह क्षमा छठ मइया भूल-चूक गलती हमार...। यही मन्नत लेकर व्रती छठ पर्व के तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य देने वासुदेव तीर्थ मंदिर पहुंचीं। निर्जल व्रतियों ने सरोवर में खड़ी होकर विधिविधान से पूजा-अर्चना की। खरना की रस्में निभाईं। पानी में खड़े होकर लोक गीत गुनगुनाए। डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार और संतान की सुख शांति के लिए कामना की। गुरुवार को तड़के उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ पर्व का समापन होगा।
मंगलवार की शाम नगर के प्राचीन वासुदेव तीर्थ मंदिर के तालाब किनारे भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार और संतान की सुख शांति के लिए मन्नतें मांगी। छठ पूजा करने वाले परिवारों में सोमवार को खरना की रस्में पूरी करके 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू किया गया था। तालाब किनारे व्रतियों ने छठ मैया की महिमा का गुणगान किया। पानी में खड़े होकर लोक गीत गुनगुनाए...पहिले पहिल हम कईनी, छठी मैया व्रत तोहार करिहा क्षमा छठ मइया भूल-चूक गलती हमार...। सबके बलकवा के दिहा, छठ मईया ममता-दुलार पिया के सनईहा बनईहा मइया दिहा सुख-सार...। नारियल केरवा घोउदवा, साजल नदिया किनार सुनिहा अरज छठ मइया बढ़े कुल परिवार...। पहिले पहिल हम कईनी, छठ मइया व्रत तोहार। करिहा क्षमा छठ मइया, भूल-चूक गलती हमार...।
छठ पूजा के दौरान मंदिर के सरोवर के किनारे उत्सव जैसे माहौल बना रहा। समाज के लोगों ने आतिशबाजी की। आज तड़के उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व का समापन किया जाएगा।
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वहीं गजरौला में बिहार मूल के परिजनों ने छठ पूजा पर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान छठी मैया के गीत भी गाए गए। छठ पूजा के तीसरे के दिन ब्रजघाट में व्रतियों ने गंगा में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया। महिलाओं और पुरुषों ने गंगा की धारा में खड़े होकर छठी मैया के गीत गाए।
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मंगलवार की शाम नगर के प्राचीन वासुदेव तीर्थ मंदिर के तालाब किनारे भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार और संतान की सुख शांति के लिए मन्नतें मांगी। छठ पूजा करने वाले परिवारों में सोमवार को खरना की रस्में पूरी करके 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू किया गया था। तालाब किनारे व्रतियों ने छठ मैया की महिमा का गुणगान किया। पानी में खड़े होकर लोक गीत गुनगुनाए...पहिले पहिल हम कईनी, छठी मैया व्रत तोहार करिहा क्षमा छठ मइया भूल-चूक गलती हमार...। सबके बलकवा के दिहा, छठ मईया ममता-दुलार पिया के सनईहा बनईहा मइया दिहा सुख-सार...। नारियल केरवा घोउदवा, साजल नदिया किनार सुनिहा अरज छठ मइया बढ़े कुल परिवार...। पहिले पहिल हम कईनी, छठ मइया व्रत तोहार। करिहा क्षमा छठ मइया, भूल-चूक गलती हमार...।
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छठ पूजा के दौरान मंदिर के सरोवर के किनारे उत्सव जैसे माहौल बना रहा। समाज के लोगों ने आतिशबाजी की। आज तड़के उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व का समापन किया जाएगा।
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वहीं गजरौला में बिहार मूल के परिजनों ने छठ पूजा पर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान छठी मैया के गीत भी गाए गए। छठ पूजा के तीसरे के दिन ब्रजघाट में व्रतियों ने गंगा में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया। महिलाओं और पुरुषों ने गंगा की धारा में खड़े होकर छठी मैया के गीत गाए।