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क्रिकेट का मैदान हो या सियासी पिच, दिखता था चेतन का जुझारूपन
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अमरोहा में राज्यपाल के आमगन पर उनका स्वागत करने पहुंचे थे कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान
- फोटो : JPNAGAR
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अमरोहा। क्रिकेट का मैदान हो या सियासत की पिच, दोनों पर ही चेतन चौहान का सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा था। क्रिकेट की तरह राजनीतिक रास्तों पर भी असफलताओं के कई बाउंसर आए लेकिन जुझारू तेवर से सामना करके वह आगे बढ़ते रहे। हमेशा के लिए उनके दूर हो जाने के बाद क्रिकेट प्रेमियों से लेकर राजनीतिज्ञों तक के बीच तक उनके इस तेवर को याद किया जा रहा है। सराहा जा रहा है।
करीबी बताते हैं कि बतौर क्रिकेटर चेतन चौहान को स्थापित होते समय काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। डटकर सबका मुकाबला किया और टीम इंडिया में सुनील गावस्कर के साथ सलामी बल्लेबाजी की ऐसी जोड़ी बनाई, जिसे आज भी याद किया जाता है।
क्रिकेट से दूर होने के बाद सियासत में उनका पदार्पण भाजपा के कुछ नेताओं की राय पर हुआ था। अमरोहा संसदीय सीट से 1991 का पहला चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। लेकिन दूसरा चुनाव हार गए थे। इसके बाद वर्ष 1998 का चुनाव जीतकर दोबारा सांसद बने थे। इसके बाद अमरोहा और दिल्ली में लगातार दो लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। तब राजनीति के रणनीतिकार उनकी सियासी पारी पर विराम लगता मानने लगे थे। चेतन चौहान इससे विचलित नहीं हुए और पिच बदलकर लोकसभा की जगह विधानसभा का रुख किया। करीब सात साल बाद वर्ष 2017 में अमरोहा जिले की नौगांवा विधानसभा सीट से जीत दर्ज करके प्रदेश सरकार की कैबिनेट में शामिल हुए।
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वर्ष------चुनाव----परिणाम
1991--लोकसभा----जीत
1996--लोकसभा----हार
1998--लोकसभा----जीत
1999--लोकसभा----हार
2004--लोकसभा----हार
2009--लोकसभा----हार
2017--विधानसभा---जीत
नोट: चेतन चौहान ने 1991 से 2004 तक अमरोहा और 2009 का लोकसभा चुनाव दिल्ली से लड़ा था। वहीं विधानसभा चुनाव अमरोहा के नौगांवा सादात से चुनाव लड़ा था।
शीला दीक्षित के बेटे के खिलाफ दिल्ली से लड़ा था चुनाव
अमरोहा। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और रालोद का गठबंधन था। अमरोहा की सीट रालोद के खाते में आई थी। ऐसे में चेतन चौहान को पार्टी ने दिल्ली से चुनाव मैदान में उतारा था। वहां उन्होंने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिल सकी थी।
सात के साथ का अजब संयोग
अमरोहा। चेतन चौहान के साथ सात की संख्या का अजब संयोग रहा। राजनीतिक जीवन में उन्होंने सात चुनाव लड़े। क्रिकेट के मैदान पर वनडे मैच भी सात ही खेले। इसके अलावा जुलाई यानी सातवां महीना उनके जन्म का माह था। निधन की तारीख 16 अगस्त, टेस्ट मैच में 16 अर्द्धशतक, टेस्ट मैच में 205 चौके, बॉलिंग में 106 रन देने के आंकड़ों में अलग-अलग का योग करें तो वह भी सात ही आता है।
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करीबी बताते हैं कि बतौर क्रिकेटर चेतन चौहान को स्थापित होते समय काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। डटकर सबका मुकाबला किया और टीम इंडिया में सुनील गावस्कर के साथ सलामी बल्लेबाजी की ऐसी जोड़ी बनाई, जिसे आज भी याद किया जाता है।
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क्रिकेट से दूर होने के बाद सियासत में उनका पदार्पण भाजपा के कुछ नेताओं की राय पर हुआ था। अमरोहा संसदीय सीट से 1991 का पहला चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। लेकिन दूसरा चुनाव हार गए थे। इसके बाद वर्ष 1998 का चुनाव जीतकर दोबारा सांसद बने थे। इसके बाद अमरोहा और दिल्ली में लगातार दो लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। तब राजनीति के रणनीतिकार उनकी सियासी पारी पर विराम लगता मानने लगे थे। चेतन चौहान इससे विचलित नहीं हुए और पिच बदलकर लोकसभा की जगह विधानसभा का रुख किया। करीब सात साल बाद वर्ष 2017 में अमरोहा जिले की नौगांवा विधानसभा सीट से जीत दर्ज करके प्रदेश सरकार की कैबिनेट में शामिल हुए।
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वर्ष------चुनाव----परिणाम
1991--लोकसभा----जीत
1996--लोकसभा----हार
1998--लोकसभा----जीत
1999--लोकसभा----हार
2004--लोकसभा----हार
2009--लोकसभा----हार
2017--विधानसभा---जीत
नोट: चेतन चौहान ने 1991 से 2004 तक अमरोहा और 2009 का लोकसभा चुनाव दिल्ली से लड़ा था। वहीं विधानसभा चुनाव अमरोहा के नौगांवा सादात से चुनाव लड़ा था।
शीला दीक्षित के बेटे के खिलाफ दिल्ली से लड़ा था चुनाव
अमरोहा। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और रालोद का गठबंधन था। अमरोहा की सीट रालोद के खाते में आई थी। ऐसे में चेतन चौहान को पार्टी ने दिल्ली से चुनाव मैदान में उतारा था। वहां उन्होंने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिल सकी थी।
सात के साथ का अजब संयोग
अमरोहा। चेतन चौहान के साथ सात की संख्या का अजब संयोग रहा। राजनीतिक जीवन में उन्होंने सात चुनाव लड़े। क्रिकेट के मैदान पर वनडे मैच भी सात ही खेले। इसके अलावा जुलाई यानी सातवां महीना उनके जन्म का माह था। निधन की तारीख 16 अगस्त, टेस्ट मैच में 16 अर्द्धशतक, टेस्ट मैच में 205 चौके, बॉलिंग में 106 रन देने के आंकड़ों में अलग-अलग का योग करें तो वह भी सात ही आता है।