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चौहान के 'चेतन' होने का हर कोई था कायल
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दिल्ली-लखनऊ में जहां भी मिले, शुरुआती दौर जैसा दिखा जोश-जज्बा : कलराज
अमरोहा। राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि चेतन चौहान ने खिलाड़ी की छवि को राजनीति में भी बरकरार रखा। कई चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा लेकिन खिलाड़ी की तरह डटे रहे। निधन की खबर से सदमा लगा है। कैबिनेट मंत्री के पद पर होने के बावजदू लोगों के बीच रहना, उनके विराट व्यक्तित्व को बयान करता है। लखनऊ या दिल्ली में जहां और जब भी मिले, बहुत आत्मीयता रहती थी। शब्दों में मिठास लोगों को अपनी तरफ खींचती थी।
मोबाइल से बातचीत में राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि राजनीति में आने के बाद भी क्रिकेटर जैसा जोश और जज्बा रखते थे। राजनीति में सुधार के पक्षधर थे। क्रिकेट की दुनिया में उन्होंने बहुत नाम कमाया। क्रिकेट से संन्यास के बाद भाजपा से जुड़ गए। शुरुआती दौर से ही उनसे ताल्लुकात रहे। राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि चेतन चौहान संवेदनशील व्यक्तित्व के मालिक थे। सभी के बीच लोकप्रिय थे। बुद्धिजीवी हो या समाज का कोई तबका, उनसे बेहद लगाव रखता था। एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि का यूं चले जाना बहुत खटक रहा है।
एक्सरसाइज का मंत्र दे छुड़वा दी थी दवा : राशिद
अमरोहा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद राशिद अल्वी ने कहा कि चेतन चौहान का व्यक्तित्व अनोखा था। व्यक्तिगत रिश्ते बहुत अलग रखते थे। जो उनसे मिलता उनका हो जाता था।
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एक संस्मरण साझा करते हुए अल्वी ने बताया, एक बार मैं संसद के मेडिकल सेक्शन में गया था। वहां पर चेतन चौहान भी आ गए थे। उन्होंने हाल चाल पूछा। इसके बाद आने की वजह पूछी, मैंने कोहनी में चोट के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इसके लिए दवा की जरूरत नहीं है। यह एक्सरसाइज से सही हो जाएगा। उन्होंने बताया कि मुझे भी चोट लग गई थी, मैने एक्सरसाइज की, फिट हो गया। उन्होंने हाथ को उठवा कर एक्सरसाइज कराई। उसके बाद मैं पूरी तरह फिट हो गया। उनका चले जाना, बहुत अखर रहा है।
कई बार हुईं मुलाकातें, दोस्ताना था लहजा : मौलाना आब्दी
नौगांवा सादात (अमरोहा)। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में चेतन चौहान के मुकाबले पर सपा उम्मीदवार बने मौलाना जावेद आब्दी भी कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान के व्यक्तित्व से प्रभावित हैं।
बकौल मौलाना जावेद, लखनऊ में उनसे कई बार मुलाकात हुई। उन्होंने एक भाई और दोस्त की तरह इज्जत दी। गर्मजोशी से मिलते थे। चुनाव के दौरान भी कई बार वाहनों से आमना-सामना हुआ था। दुआ सलाम होती थी। इसके बाद हम दोनों अपने-अपने रास्ते बढ़ जाते थे। उनकी बॉडी लैंग्वेज बहुत सकारात्मक रहती थी। हमेशा मुस्करा कर मिलते थे। अच्छे इंसान से मिलने का एहसास होता था। भेदभाव से वह बहुत दूर थे। उनके परिवार के साथ हम हैं। क्रिकेट में बड़ा नाम उन्होंने कमाया। पूरी दुनिया उनके नाम से वाकिफ है। लोगों से फ्रेंडली मिलते थे।
मौत की खबर मिली तो तकलीफ पहुंची। जनता को उनसे बहुत उम्मीदें थी। ऐसा आभास था कि वह लंबे समय तक सेवा करेंगे। बीमारी का इलाज है, लेकिन मौत का नहीं है।
चेतन चौहान के मुकाबले अपनी मजबूती के लिए सपा ने साल 2017 के चुनाव में अचानक तत्कालीन सपा विधायक अशफाक अली का टिकट काटकर मौलाना आब्दी को चुनाव मैदान में उतारा था। मौलाना आब्दी सपा के राष्ट्रीय सचिव हैं। शिया समुदाय के धर्म गुरु हैं। मोहर्रम के समय मजलिसें करने के लिए दूसरे मुल्कों तक जाते हैं। हालांकि जीत चेतन चौहान के ही हाथ लगी थी।
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अमरोहा। राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि चेतन चौहान ने खिलाड़ी की छवि को राजनीति में भी बरकरार रखा। कई चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा लेकिन खिलाड़ी की तरह डटे रहे। निधन की खबर से सदमा लगा है। कैबिनेट मंत्री के पद पर होने के बावजदू लोगों के बीच रहना, उनके विराट व्यक्तित्व को बयान करता है। लखनऊ या दिल्ली में जहां और जब भी मिले, बहुत आत्मीयता रहती थी। शब्दों में मिठास लोगों को अपनी तरफ खींचती थी।
मोबाइल से बातचीत में राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि राजनीति में आने के बाद भी क्रिकेटर जैसा जोश और जज्बा रखते थे। राजनीति में सुधार के पक्षधर थे। क्रिकेट की दुनिया में उन्होंने बहुत नाम कमाया। क्रिकेट से संन्यास के बाद भाजपा से जुड़ गए। शुरुआती दौर से ही उनसे ताल्लुकात रहे। राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि चेतन चौहान संवेदनशील व्यक्तित्व के मालिक थे। सभी के बीच लोकप्रिय थे। बुद्धिजीवी हो या समाज का कोई तबका, उनसे बेहद लगाव रखता था। एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि का यूं चले जाना बहुत खटक रहा है।
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एक्सरसाइज का मंत्र दे छुड़वा दी थी दवा : राशिद
अमरोहा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद राशिद अल्वी ने कहा कि चेतन चौहान का व्यक्तित्व अनोखा था। व्यक्तिगत रिश्ते बहुत अलग रखते थे। जो उनसे मिलता उनका हो जाता था।
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एक संस्मरण साझा करते हुए अल्वी ने बताया, एक बार मैं संसद के मेडिकल सेक्शन में गया था। वहां पर चेतन चौहान भी आ गए थे। उन्होंने हाल चाल पूछा। इसके बाद आने की वजह पूछी, मैंने कोहनी में चोट के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इसके लिए दवा की जरूरत नहीं है। यह एक्सरसाइज से सही हो जाएगा। उन्होंने बताया कि मुझे भी चोट लग गई थी, मैने एक्सरसाइज की, फिट हो गया। उन्होंने हाथ को उठवा कर एक्सरसाइज कराई। उसके बाद मैं पूरी तरह फिट हो गया। उनका चले जाना, बहुत अखर रहा है।
कई बार हुईं मुलाकातें, दोस्ताना था लहजा : मौलाना आब्दी
नौगांवा सादात (अमरोहा)। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में चेतन चौहान के मुकाबले पर सपा उम्मीदवार बने मौलाना जावेद आब्दी भी कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान के व्यक्तित्व से प्रभावित हैं।
बकौल मौलाना जावेद, लखनऊ में उनसे कई बार मुलाकात हुई। उन्होंने एक भाई और दोस्त की तरह इज्जत दी। गर्मजोशी से मिलते थे। चुनाव के दौरान भी कई बार वाहनों से आमना-सामना हुआ था। दुआ सलाम होती थी। इसके बाद हम दोनों अपने-अपने रास्ते बढ़ जाते थे। उनकी बॉडी लैंग्वेज बहुत सकारात्मक रहती थी। हमेशा मुस्करा कर मिलते थे। अच्छे इंसान से मिलने का एहसास होता था। भेदभाव से वह बहुत दूर थे। उनके परिवार के साथ हम हैं। क्रिकेट में बड़ा नाम उन्होंने कमाया। पूरी दुनिया उनके नाम से वाकिफ है। लोगों से फ्रेंडली मिलते थे।
मौत की खबर मिली तो तकलीफ पहुंची। जनता को उनसे बहुत उम्मीदें थी। ऐसा आभास था कि वह लंबे समय तक सेवा करेंगे। बीमारी का इलाज है, लेकिन मौत का नहीं है।
चेतन चौहान के मुकाबले अपनी मजबूती के लिए सपा ने साल 2017 के चुनाव में अचानक तत्कालीन सपा विधायक अशफाक अली का टिकट काटकर मौलाना आब्दी को चुनाव मैदान में उतारा था। मौलाना आब्दी सपा के राष्ट्रीय सचिव हैं। शिया समुदाय के धर्म गुरु हैं। मोहर्रम के समय मजलिसें करने के लिए दूसरे मुल्कों तक जाते हैं। हालांकि जीत चेतन चौहान के ही हाथ लगी थी।