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Amroha News: शिव विवाह के प्रसंग पर गूंजे जयकारे
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अमरोहा के रिसायत मंदिर में शिव महापुराण कथा सुनतीं श्रद्धालु। स्रोत आयोजक
अमरोहा। प्राचीन रियासत मंदिर पर चल रहे शिव महापुराण के चौथे दिन बुधवार को आचार्य नवीन शास्त्री नौटियाल ने शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया। इस दौरान लोगों ने हर-हर महादेव के जयकारे लगाए और फूल बरसाए।
कथावाचक ने कहा कि माता पार्वती ने हिमालय राजा के यहां पर जन्म लिया था। पार्वती बचपन से ही भगवान भोलेनाथ को अपना पति मानती थी। इसीलिए भोलेनाथ से माता पार्वती का विवाह हुआ। इस दौरान शिव-पार्वती की झांकी पर श्रद्धालुओं ने जमकर पुष्प बरसाए और खुशी से झूम उठे। उन्होंने शिव विवाह प्रसंग सुनाते हुए बताया कि तारकासुर राक्षस का तीनों लोक में अत्याचार था और उसका वध भोलेनाथ व माता पार्वती के पुत्र से होना था। तभी भोलेनाथ व माता पार्वती का विवाह पहले से ही होना तय था।
कहा कि जो भी भक्त भोलेनाथ की पूजा-अर्चना और उनके नाम का जाप करता है, भोलेनाथ उसके सभी कार्यों को शीघ्र पूरा करते हैं। पर्वतराज के घर बेटी के रूप में अवतरित होने का वरदान दिया।
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एक दिन पर्वतराज के घर महर्षि नारद पहुंचे और उन्होंने भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती के विवाह का संयोग बताया। कहा कि नंदी पर सवार भोलेनाथ जब भूत-पिशाचों के साथ बरात लेकर पहुंचे तो उसे देखकर पर्वतराज और उनके परिजन अचंभित हो गए। लेकिन पार्वती खुशी से भोलेनाथ को पति के रूप में स्वीकार कर लिया था। कथा में रमेश चंद्र गुप्ता, अभिषेक रघुवंशी, करन रघुवंशी, दिनेश रघुवंशी, नन्हे प्रजापति आदि मौजूद रहे।
भगवान ने इंद्र का अभिमान तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत को उठाया
मंडी धनौरा। आनंद धाम आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथाव्यास सौरभ कौशिक ने गोवर्धन पर्वत का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान को अहंकार पसंद नहीं है। इंद्र को अपनी सत्ता का घमंड हो गया था। उसको तोड़ने के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर सात दिन तक उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। उन्होंने कहा कि भगवान पग पग पर अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। न्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे प्रभु के नाम का स्मरण के साथ अच्छे कर्म करें। इस दौरान भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। इस मौके पर विनोद अरोड़ा, एमपी शर्मा, अनूप अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, नीति अग्रवाल आदि मौजूद रहीं।
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कथावाचक ने कहा कि माता पार्वती ने हिमालय राजा के यहां पर जन्म लिया था। पार्वती बचपन से ही भगवान भोलेनाथ को अपना पति मानती थी। इसीलिए भोलेनाथ से माता पार्वती का विवाह हुआ। इस दौरान शिव-पार्वती की झांकी पर श्रद्धालुओं ने जमकर पुष्प बरसाए और खुशी से झूम उठे। उन्होंने शिव विवाह प्रसंग सुनाते हुए बताया कि तारकासुर राक्षस का तीनों लोक में अत्याचार था और उसका वध भोलेनाथ व माता पार्वती के पुत्र से होना था। तभी भोलेनाथ व माता पार्वती का विवाह पहले से ही होना तय था।
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कहा कि जो भी भक्त भोलेनाथ की पूजा-अर्चना और उनके नाम का जाप करता है, भोलेनाथ उसके सभी कार्यों को शीघ्र पूरा करते हैं। पर्वतराज के घर बेटी के रूप में अवतरित होने का वरदान दिया।
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एक दिन पर्वतराज के घर महर्षि नारद पहुंचे और उन्होंने भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती के विवाह का संयोग बताया। कहा कि नंदी पर सवार भोलेनाथ जब भूत-पिशाचों के साथ बरात लेकर पहुंचे तो उसे देखकर पर्वतराज और उनके परिजन अचंभित हो गए। लेकिन पार्वती खुशी से भोलेनाथ को पति के रूप में स्वीकार कर लिया था। कथा में रमेश चंद्र गुप्ता, अभिषेक रघुवंशी, करन रघुवंशी, दिनेश रघुवंशी, नन्हे प्रजापति आदि मौजूद रहे।
भगवान ने इंद्र का अभिमान तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत को उठाया
मंडी धनौरा। आनंद धाम आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथाव्यास सौरभ कौशिक ने गोवर्धन पर्वत का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान को अहंकार पसंद नहीं है। इंद्र को अपनी सत्ता का घमंड हो गया था। उसको तोड़ने के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर सात दिन तक उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। उन्होंने कहा कि भगवान पग पग पर अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। न्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे प्रभु के नाम का स्मरण के साथ अच्छे कर्म करें। इस दौरान भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। इस मौके पर विनोद अरोड़ा, एमपी शर्मा, अनूप अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, नीति अग्रवाल आदि मौजूद रहीं।