{"_id":"6acd4fcb9984a963d902c430","slug":"insurance-claim-of-5-lakh-rejected-for-concealing-a-serious-illness-jpnagar-news-c-284-1-smbd1013-175313-2026-10-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amroha News: गंभीर बीमारी छिपाने पर पांच लाख का बीमा क्लेम खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amroha News: गंभीर बीमारी छिपाने पर पांच लाख का बीमा क्लेम खारिज
विज्ञापन
अमरोहा। बीमा पॉलिसी लेते समय पहले से मौजूद गंभीर बीमारियों की जानकारी छिपाना किसान को भारी पड़ गया। उपभोक्ता आयोग ने महिला की मौत के बाद पांच लाख रुपये का बीमा क्लेम खारिज करने के कंपनी के फैसले को सही ठहराते हुए किसान का वाद खारिज कर दिया। दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च स्वयं वहन करने का आदेश दिया।
संभल जिले के गांव करनपुर कायस्थ निवासी गौतम वर्तमान में जोया के खेड़ा मोहल्ले में रहते हैं। उन्होंने पत्नी शकुंतला के नाम 10 जनवरी 2023 को लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से पॉलिसी ली थी। 2360 रुपये वार्षिक प्रीमियम वाली पॉलिसी में गौतम को नामिनी बनाया गया था। 19 फरवरी 2023 को शकुंतला की अचानक तबीयत खराब होने से घर पर मौत हो गई। गौतम ने आवश्यक दस्तावेजों के साथ क्लेम किया, लेकिन कंपनी ने दावा निरस्त कर दिया।
इस पर उन्होंने आयोग में परिवाद दायर कर पांच लाख रुपये की बीमा राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज, मानसिक, शारीरिक व आर्थिक क्षति के लिए एक लाख और परिवाद व्यय के रूप में एक लाख रुपये दिलाने की मांग की।
विज्ञापन
आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित के समक्ष सुनवाई में बीमा कंपनी ने बताया कि शकुंतला पॉलिसी लेने से पहले से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। कंपनी ने लखनऊ के अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड व जांच रिपोर्ट पेश कर बीमा प्रस्ताव में बीमारियों की जानकारी छिपाने का दावा किया।
आयोग ने मेडिकल दस्तावेजों और सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित फैसलों का अवलोकन करने के बाद माना कि बीमा प्रस्ताव में महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा नहीं किया गया था। इसी आधार पर कंपनी द्वारा क्लेम निरस्त करने के फैसले को विधिसम्मत ठहराते हुए किसान गौतम का परिवाद खारिज कर दिया।
विज्ञापन
संभल जिले के गांव करनपुर कायस्थ निवासी गौतम वर्तमान में जोया के खेड़ा मोहल्ले में रहते हैं। उन्होंने पत्नी शकुंतला के नाम 10 जनवरी 2023 को लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से पॉलिसी ली थी। 2360 रुपये वार्षिक प्रीमियम वाली पॉलिसी में गौतम को नामिनी बनाया गया था। 19 फरवरी 2023 को शकुंतला की अचानक तबीयत खराब होने से घर पर मौत हो गई। गौतम ने आवश्यक दस्तावेजों के साथ क्लेम किया, लेकिन कंपनी ने दावा निरस्त कर दिया।
विज्ञापन
इस पर उन्होंने आयोग में परिवाद दायर कर पांच लाख रुपये की बीमा राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज, मानसिक, शारीरिक व आर्थिक क्षति के लिए एक लाख और परिवाद व्यय के रूप में एक लाख रुपये दिलाने की मांग की।
विज्ञापन
आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित के समक्ष सुनवाई में बीमा कंपनी ने बताया कि शकुंतला पॉलिसी लेने से पहले से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। कंपनी ने लखनऊ के अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड व जांच रिपोर्ट पेश कर बीमा प्रस्ताव में बीमारियों की जानकारी छिपाने का दावा किया।
आयोग ने मेडिकल दस्तावेजों और सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित फैसलों का अवलोकन करने के बाद माना कि बीमा प्रस्ताव में महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा नहीं किया गया था। इसी आधार पर कंपनी द्वारा क्लेम निरस्त करने के फैसले को विधिसम्मत ठहराते हुए किसान गौतम का परिवाद खारिज कर दिया।