अमरोहा। कृषि कानूनों के विरोध के चलते किसान संगठन नेताओं ने बुधवार को जिला प्रशासन की तरफ से आयोजित किसान दिवस का बहिष्कार कर दिया है। किसानों ने सरकार ने मनमानी का आरोप लगाया है। किसानों ने किसान दिवस कार्यक्रम को सरकारी बताया। स्पष्ट कहा कि यहां किसानों की समस्याओं पर चर्चा नहीं होगी बल्कि तीनों कानूनों की विशेषताएं बताकर किसानों को लुभाने का प्रयास किया जाएगा। किसान किसी भी कीमत पर तीनों कृषि कानूनों को बर्दाश्त नहीं करेंगा। इसके लिए आरपार की लड़ाई लड़ने की जरूरत पड़ी तो ेलड़ेंगे
23 दिसंबर को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जन्मदिन पर मनाया जाता है। उनकी जयंती के मौके पर इस दिन देशभर में राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है। पिछले 27 दिनों से देश अन्नदाता तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहा है। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहा है। बुधवार को जिला प्रशासन की तरफ से जोया के नारंगपुर सिख इंटर कालेज में किसान दिवस कार्यक्रम प्रस्तावित था। इसके लिए जिला प्रशासन ने किसान नेताओं से कार्यक्रम में पहुंचने की अपील की थी। लेकिन, भाकियू अराजनैतिक, भाकियू असली और भाकियू भानू के पदाधिकारियों ने किसान दिवस का बहिष्कार कर दिया। किसान नेताओं ने कहा कि अन्नदाता अपना जीवन बचाने के लिए पिछले 27 में दिन ठिठुरते सर्दी और विषम परिस्थितियों में दिल्ली में आंदोलनरत है। सरकार से तीनों कृषि कानूनों को वापस कराने की मांग की जा रही है। सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य पर देश के अन्नदाता को समुचित फसल खरीदने की गारंटी का कानून बनाए। यह किसान और देश हित में है।