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फिरौती नहीं देेने पर मार डाला था मासूम को, दोषी को उम्रकैद
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Thu, 15 Dec 2016 11:46 PM IST
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एनजीटी में हाोनी है सुनवाई।
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पांच लाख की फिरौती नहीं देने पर अपहरणकर्ताओं ने किसान के मासूम बेटे का कत्ल कर दिया था। खेलते वक्त अपहरण कर लिया था। छह साल से यह मामला अदालत में विचाराधीन था। गुरुवार को मुकदमे पर सुनवाई हुई। अदालत ने हत्या के दोषी को उम्रकैद व 80 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। संलिप्त दो हत्यारोपी नाबालिग थे, जिनका केस किशोर न्याय बोर्ड में चल रहा है।
यह घटनाक्रम आदमपुर थाने के गांव देहरी गुर्जर का है। यहां के रहने वाले किसान पीतम उर्फ पिंटू का तीन वर्षीय बेटा छोटू उर्फ सूर्यांश 19 मई 2010 को अपने परिवार में ही खेलने गया था, मगर वापस नहीं लौटा था। तलाश के बाद परिजनों ने 22 मई 2010 को बेटे के अपहरण की अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी।
पुलिस ने पड़ताल चालू की थी तो हसनपुर कोतवाली के गांव जयतौली निवासी आमिर व आदमपुर थाने के नानई गांव निवासी मनोत्तम व देवी सहाय का नाम सामने आया था। पांच लाख की फिरौती उनके द्वारा मांगी जा रही थी। नहीं देने पर उन्होंने बच्चे को मार दिया था।
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केस को वर्कआउट करते हुए पुलिस ने तीनों की निशानदेही पर बच्चे का कंकाल का कुछ हिस्सा बरामद किया था। तीनों हत्यारोपियों को जेल भेजने के बाद उसने कंकाल का डीएनए टेस्ट कराया था। डीएनए टेस्ट में कंकाल सूर्यांश का ही निकला। तब से यह मामला एफटीसी प्रथम में विचाराधीन था।
गुरुवार को न्यायाधीश अखिलेश दुबे ने केस की सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता निशात अकरम फारूकी ने तमाम दलीलें व साक्ष्य पेश कर हत्यारोपी को सख्त से सख्त सजा देने की मांग की। न्यायाधीश ने गवाहों की गवाही व पत्रावली पर उपलब्ध सुबूतों का अवलोकन किया और आमिर को घटना का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व 80 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।
दो हत्यारोपी निकले थे नाबालिग
अमरोहा। अपर शासकीय अधिवक्ता की मानें तो पुलिस ने मासूम की हत्या में तीन हत्यारोपी जेल भेजे थे। इनमें देवी सहाय व मनोत्तम दोनों नाबालिग पाए गए थे। इसलिए उनकी पत्रावलियां भी अलग कर किशोर न्याय बोर्ड के पास भेज दी गई थीं। उनका मसला अब बोर्ड में ही विचाराधीन है।
घटना के बाद से ही जेल में बंद है आमिर
अमरोहा। फिरौती के लिए मासूम को मौत के घाट उतारने वाले आमिर को पुलिस ने पकड़कर जेल भेज दिया था। तब से वह जेल में ही बंद था। केस की सुनवाई के दौरान पुलिस साथ लाई थी। इसके बाद फिर उसको सलाखों के पीछे भेज दिया गया।
पिता को अभी और न्याय की आस
अमरोहा। बेटे की हत्या के गम को पीतम अभी तक नहीं भुला पाया है। न जाने उसको कैसे मारा होगा, यह दर्द उसके चेहरे पर साफ दिख रहा है। आमिर को सजा सुनाने के बाद वह फफक पड़ा और कहने लगा कि अभी न्याय अधूरा है। बेटे के अभी दो हत्यारोपी और बचे हैं।
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यह घटनाक्रम आदमपुर थाने के गांव देहरी गुर्जर का है। यहां के रहने वाले किसान पीतम उर्फ पिंटू का तीन वर्षीय बेटा छोटू उर्फ सूर्यांश 19 मई 2010 को अपने परिवार में ही खेलने गया था, मगर वापस नहीं लौटा था। तलाश के बाद परिजनों ने 22 मई 2010 को बेटे के अपहरण की अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी।
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पुलिस ने पड़ताल चालू की थी तो हसनपुर कोतवाली के गांव जयतौली निवासी आमिर व आदमपुर थाने के नानई गांव निवासी मनोत्तम व देवी सहाय का नाम सामने आया था। पांच लाख की फिरौती उनके द्वारा मांगी जा रही थी। नहीं देने पर उन्होंने बच्चे को मार दिया था।
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केस को वर्कआउट करते हुए पुलिस ने तीनों की निशानदेही पर बच्चे का कंकाल का कुछ हिस्सा बरामद किया था। तीनों हत्यारोपियों को जेल भेजने के बाद उसने कंकाल का डीएनए टेस्ट कराया था। डीएनए टेस्ट में कंकाल सूर्यांश का ही निकला। तब से यह मामला एफटीसी प्रथम में विचाराधीन था।
गुरुवार को न्यायाधीश अखिलेश दुबे ने केस की सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता निशात अकरम फारूकी ने तमाम दलीलें व साक्ष्य पेश कर हत्यारोपी को सख्त से सख्त सजा देने की मांग की। न्यायाधीश ने गवाहों की गवाही व पत्रावली पर उपलब्ध सुबूतों का अवलोकन किया और आमिर को घटना का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व 80 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।
दो हत्यारोपी निकले थे नाबालिग
अमरोहा। अपर शासकीय अधिवक्ता की मानें तो पुलिस ने मासूम की हत्या में तीन हत्यारोपी जेल भेजे थे। इनमें देवी सहाय व मनोत्तम दोनों नाबालिग पाए गए थे। इसलिए उनकी पत्रावलियां भी अलग कर किशोर न्याय बोर्ड के पास भेज दी गई थीं। उनका मसला अब बोर्ड में ही विचाराधीन है।
घटना के बाद से ही जेल में बंद है आमिर
अमरोहा। फिरौती के लिए मासूम को मौत के घाट उतारने वाले आमिर को पुलिस ने पकड़कर जेल भेज दिया था। तब से वह जेल में ही बंद था। केस की सुनवाई के दौरान पुलिस साथ लाई थी। इसके बाद फिर उसको सलाखों के पीछे भेज दिया गया।
पिता को अभी और न्याय की आस
अमरोहा। बेटे की हत्या के गम को पीतम अभी तक नहीं भुला पाया है। न जाने उसको कैसे मारा होगा, यह दर्द उसके चेहरे पर साफ दिख रहा है। आमिर को सजा सुनाने के बाद वह फफक पड़ा और कहने लगा कि अभी न्याय अधूरा है। बेटे के अभी दो हत्यारोपी और बचे हैं।