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मेरठ पुलिस ने दिया जख्म, बेटे की पीठ पर घाव दिखाकर फफक पड़ी बूढ़ी मां
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गजरौला(अमरोहा)। दिल्ली और अन्य प्रांतों में फंसे प्रवासी श्रमिकों के लिए कहीं खाकी मित्र साबित हो रही है और उन्हें वाहनों में बैठाने के साथ ही भोजन तक करा रही है तो कहीं खाकी के कुछ कारिंदे अमानवीय कृत्य भी कर रहे हैं। हापुड़ में दो पुलिसकर्मियों का वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें लाइन हाजिर किए जाने के अगले ही दिन मेरठ पुलिस ने बबराला (संभल) लौट रहे पिता-पुत्र पर लाठियां बरसाईं। इनमें पुत्र के पांव में काफी चोट आईं और पीठ पर घाव का निशान भी पड़ गया। बेटे की पीठ पर उभरा निशान दिखाते हुए बूढ़ी मां फफक पड़ी।
बुधवार को हाईवे पर कांकाठेर के निकट दिल्ली की दिशा से दो मोटर रिक्शा पर आ रहे श्रमिकों का परिवार एक पेड़ की छांव तले बैठा हुआ था। पूछने पर शौकीन, नवीशेर ने बताया कि वे सभी गवां बबराला के रहने वाले हैं और हरियाणा में मजदूरी करते थे। लॉकडाउन 4 में कुछ छूट मिलने की खबर सुनकर बाइक से बनाई गई मोटर रिक्शा में बैठकर निकल पड़े। बताया कि सफर में काफी परेशानी भी हुई। सबसे अधिक दिक्कत सुबह सवेरे मेरठ में हुई। वहां पुलिस ने रोक लिया। इसी बीच उनके साथ मौजूद वृद्धा अफसाना अपने पुत्र सलीम खां के पैर और पीठ में लगी चोट के निशान दिखाते हुए फफक पड़ीं। आरोप लगाया कि उनके शौहर शौकत और पुत्र सलीम खां को मेरठ में पुलिस ने लाठियों से पीटा। सबसे अधिक चोट सलीम को ही आईं। उसकी पीठ पर घाव का निशान भी था। इन श्रमिकों का कहना था कि उन्हें ब्रजघाट और अमरोहा पुलिस ने कुछ नहीं कहा। बल्कि उनकी परेशानी जानकर उन्हें जाने दिया। पुलिस ने भोजन के पैकेट भी दिए। बूढ़ी महिला का कहना था कि इस सफर में पुलिस के भी दो रूप देखने को मिले।
भूख से बिलख रही थीं बच्चियां
गजरौला। गवां बबराला जा रहे श्रमिकों के परिवार में शामिल खिल्लो ने बताया कि उसकी तीन और पांच वर्षीय पुत्रियां भूख से बेहाल हैं। दूध नहीं मिलने के कारण वे रास्ते भर रोती हुई आ रही हैं। बड़ों का क्या है। हम तो रूखी-सूखी रोटी अचार से खाकर अपना पेट भर रहे हैं। नाजरीन का कहना था कि किसी तरह घर पहुंच जाएं। अल्लाह से यही दुआ कर रहे हैं।
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बुधवार को हाईवे पर कांकाठेर के निकट दिल्ली की दिशा से दो मोटर रिक्शा पर आ रहे श्रमिकों का परिवार एक पेड़ की छांव तले बैठा हुआ था। पूछने पर शौकीन, नवीशेर ने बताया कि वे सभी गवां बबराला के रहने वाले हैं और हरियाणा में मजदूरी करते थे। लॉकडाउन 4 में कुछ छूट मिलने की खबर सुनकर बाइक से बनाई गई मोटर रिक्शा में बैठकर निकल पड़े। बताया कि सफर में काफी परेशानी भी हुई। सबसे अधिक दिक्कत सुबह सवेरे मेरठ में हुई। वहां पुलिस ने रोक लिया। इसी बीच उनके साथ मौजूद वृद्धा अफसाना अपने पुत्र सलीम खां के पैर और पीठ में लगी चोट के निशान दिखाते हुए फफक पड़ीं। आरोप लगाया कि उनके शौहर शौकत और पुत्र सलीम खां को मेरठ में पुलिस ने लाठियों से पीटा। सबसे अधिक चोट सलीम को ही आईं। उसकी पीठ पर घाव का निशान भी था। इन श्रमिकों का कहना था कि उन्हें ब्रजघाट और अमरोहा पुलिस ने कुछ नहीं कहा। बल्कि उनकी परेशानी जानकर उन्हें जाने दिया। पुलिस ने भोजन के पैकेट भी दिए। बूढ़ी महिला का कहना था कि इस सफर में पुलिस के भी दो रूप देखने को मिले।
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भूख से बिलख रही थीं बच्चियां
गजरौला। गवां बबराला जा रहे श्रमिकों के परिवार में शामिल खिल्लो ने बताया कि उसकी तीन और पांच वर्षीय पुत्रियां भूख से बेहाल हैं। दूध नहीं मिलने के कारण वे रास्ते भर रोती हुई आ रही हैं। बड़ों का क्या है। हम तो रूखी-सूखी रोटी अचार से खाकर अपना पेट भर रहे हैं। नाजरीन का कहना था कि किसी तरह घर पहुंच जाएं। अल्लाह से यही दुआ कर रहे हैं।
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